भारत का रत्न-आभूषण निर्यात अप्रैल-जुलाई 2026 में 9.17 अरब डॉलर पार, चांदी के गहनों में 72% उछाल
सारांश
मुख्य बातें
भारत के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) द्वारा 14 अगस्त 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान भारत का कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात 2.44 प्रतिशत बढ़कर 9.17 अरब डॉलर पर पहुँच गया। रुपये के संदर्भ में यह वृद्धि और भी प्रभावशाली रही — निर्यात 13.58 प्रतिशत उछलकर ₹87,078.01 करोड़ हो गया।
मुख्य प्रदर्शन: किन श्रेणियों ने मारी बाज़ी
इस अवधि में सबसे शानदार प्रदर्शन चांदी के आभूषणों का रहा, जिनका निर्यात 72.19 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि के साथ 508.18 मिलियन डॉलर तक पहुँचा। जड़े हुए सोने के आभूषणों का निर्यात 21.09 प्रतिशत बढ़कर 2.24 अरब डॉलर हो गया।
प्लैटिनम ज्वेलरी का निर्यात 17.20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 77.82 मिलियन डॉलर पर पहुँचा, जबकि पॉलिश्ड लैब-ग्रोन डायमंड्स का निर्यात 7.47 प्रतिशत बढ़कर 408.50 मिलियन डॉलर रहा। साधारण और जड़ाऊ दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल सोने के आभूषणों का निर्यात 5.87 प्रतिशत बढ़कर 4.03 अरब डॉलर हो गया।
कहाँ रही कमज़ोरी
हालाँकि सभी श्रेणियाँ एकसमान नहीं रहीं। कट एंड पॉलिश्ड डायमंड्स का निर्यात 8 प्रतिशत घटकर 3.60 अरब डॉलर रह गया। इसी तरह साधारण सोने के आभूषणों का निर्यात 8.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.80 अरब डॉलर पर आ गया। आंकड़ों के अनुसार, यह गिरावट वैश्विक उपभोक्ता मांग में बदलाव और कुछ प्रमुख बाज़ारों में आर्थिक दबावों के कारण देखी गई।
प्रमुख बाज़ारों से मिला सहारा
जीजेईपीसी के आंकड़ों के अनुसार, इस वृद्धि को अमेरिका, सिंगापुर, हांगकांग और ब्रिटेन जैसे प्रमुख बाज़ारों से मज़बूत मांग का समर्थन मिला। इन बाज़ारों में भारतीय वैल्यू-एडेड आभूषणों की बढ़ती माँग ने निर्यातकों को उल्लेखनीय लाभ दिलाया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर विवेकाधीन उपभोक्ता खर्च पर दबाव बना हुआ है।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और आगे की राह
जीजेईपीसी के चेयरमैन किरित भंसाली ने कहा कि चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय माहौल के बावजूद भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग ने उल्लेखनीय मज़बूती दिखाई है। उनके अनुसार, वैल्यू-एडेड उत्पादों की बढ़ती माँग ने निर्यात वृद्धि को सहारा दिया है और भविष्य में भी यही श्रेणियाँ उद्योग के विकास की प्रमुख चालक बन सकती हैं।
भंसाली ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की कीमतों में हालिया नरमी प्रमुख उपभोक्ता बाज़ारों में माँग को और बढ़ा सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आईआईजेएस भारत प्रीमियर 2026 प्रदर्शनी के दौरान हुए कारोबारी समझौते आने वाले महीनों में वास्तविक निर्यात ऑर्डरों में बदलेंगे। इस प्रदर्शनी में 61,000 से अधिक आगंतुकों ने भाग लिया, जिनमें 80 देशों से आए 5,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार और प्रतिनिधि शामिल रहे।
गौरतलब है कि भंसाली ने हाल ही में पेश किए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 का भी स्वागत किया। उनके अनुसार, विशेष अधिसूचित क्षेत्रों के माध्यम से रफ डायमंड कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों को 15 वर्ष की आयकर छूट मिलने से भारत वैश्विक हीरा व्यापार केंद्र के रूप में उभर सकता है — न केवल प्रसंस्करण केंद्र के रूप में। यदि यह नीतिगत बदलाव धरातल पर उतरता है, तो अगले वित्त वर्ष में निर्यात के आँकड़े और मज़बूत हो सकते हैं।