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रत्न एवं आभूषण निर्यात अगस्त 2026 में 12.52% बढ़ा, स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी में 65% की उछाल

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रत्न एवं आभूषण निर्यात अगस्त 2026 में 12.52% बढ़ा, स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी में 65% की उछाल

सारांश

भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात अगस्त 2026 में ₹21,945.87 करोड़ तक पहुँचा — 12.52% की सालाना वृद्धि। असली कहानी स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी की 65% उछाल है, जो दर्शाती है कि भारत कच्चे माल के निर्यातक से मूल्यवर्धित आभूषण निर्माता बनने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

अगस्त 2026 में भारत का सकल रत्न एवं आभूषण निर्यात 12.52% बढ़कर ₹21,945.87 करोड़ पहुँचा।
स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी निर्यात में 64.96% की उछाल, 642.85 मिलियन डॉलर तक पहुँचा।
कट एंड पॉलिश्ड हीरों की निर्यात मात्रा 12.94 लाख से बढ़कर 13.36 लाख कैरेट हुई, लेकिन मूल्य पर दबाव रहा।
अप्रैल-अगस्त FY27 में चाँदी आभूषण निर्यात 35.57% और प्लैटिनम आभूषण निर्यात 19.67% बढ़ा।
लैब-ग्रोन डायमंड निर्यात 11.76% बढ़कर ₹5,076.61 करोड़ हुआ।
साधारण सोने के आभूषणों का निर्यात 11.44% घटा, जबकि जड़े हुए गोल्ड ज्वेलरी का 26.73% बढ़ा।

भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात क्षेत्र ने अगस्त 2026 में उल्लेखनीय तेज़ी दर्ज की है। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) की शनिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश का सकल रत्न एवं आभूषण निर्यात सालाना आधार पर 12.52 प्रतिशत बढ़कर ₹21,945.87 करोड़ पर पहुँच गया। यह वृद्धि वैश्विक बाज़ारों में भारतीय मूल्यवर्धित आभूषणों की बढ़ती माँग का स्पष्ट संकेत है।

स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी ने बनाया रिकॉर्ड

GJEPC की रिपोर्ट में सबसे चमकदार प्रदर्शन स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी (जड़े हुए सोने के आभूषण) श्रेणी का रहा, जिसका निर्यात 64.96 प्रतिशत की छलांग लगाकर 642.85 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया। अमेरिकी डॉलर मूल्य में भी इस श्रेणी में 51.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इस उछाल के पीछे अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), हांगकांग, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे प्रमुख बाज़ारों से मज़बूत माँग प्रमुख कारण रही।

मूल्यवर्धन की दिशा में भारत का बदलता रुझान

यह रुझान भारतीय रत्न एवं आभूषण उद्योग के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब अधिक संख्या में हीरों का उपयोग देश के भीतर तैयार किए जाने वाले तैयार आभूषणों में किया जा रहा है, जिससे विनिर्माण शृंखला में अधिक मूल्य सृजन हो रहा है। इसका सीधा लाभ रोज़गार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन के रूप में दिख रहा है। गौरतलब है कि भारत लंबे समय तक कच्चे या अर्ध-प्रसंस्कृत हीरों के निर्यात पर निर्भर रहा है, लेकिन अब तैयार मूल्यवर्धित उत्पादों की ओर रुख़ तेज़ी से बदल रहा है।

GJEPC अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

GJEPC के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा, 'अगस्त का प्रदर्शन भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग की मज़बूती और अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है।' उन्होंने आगे कहा कि हीरा निर्यात की मात्रा में वृद्धि और स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी के निर्यात में तेज़ उछाल यह साबित करता है कि भारत मूल्यवर्धित तैयार आभूषणों के क्षेत्र में अपनी वैश्विक स्थिति मज़बूत कर रहा है।

कट एंड पॉलिश्ड हीरों में मिला-जुला रुख़

हालाँकि कट और पॉलिश्ड हीरों के निर्यात मूल्य पर दबाव बना रहा, लेकिन मात्रा के लिहाज़ से सकारात्मक संकेत मिले। अगस्त 2025 में जहाँ 12.94 लाख कैरेट कट एंड पॉलिश्ड हीरों का निर्यात हुआ था, वहीं अगस्त 2026 में यह बढ़कर 13.36 लाख कैरेट हो गया। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक माँग बरक़रार है, हालाँकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतों में नरमी के कारण मूल्य-आधारित आँकड़ों पर दबाव दिखा।

अप्रैल-अगस्त FY27 का समग्र चित्र

वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-अगस्त अवधि में सोने के आभूषणों (साधारण और जड़े हुए) का कुल निर्यात 7 प्रतिशत बढ़कर ₹47,853.03 करोड़ रहा। इस दौरान साधारण सोने के आभूषणों का निर्यात 11.44 प्रतिशत घटा, जबकि जड़े हुए गोल्ड ज्वेलरी का निर्यात 26.73 प्रतिशत बढ़ा — जो मूल्यवर्धन की ओर स्पष्ट बदलाव को रेखांकित करता है। इसी अवधि में कट एंड पॉलिश्ड हीरों का निर्यात 7.38 प्रतिशत घटा।

चाँदी के आभूषणों के निर्यात में 35.57 प्रतिशत की ज़ोरदार वृद्धि दर्ज हुई, जबकि प्लैटिनम आभूषण निर्यात 19.67 प्रतिशत बढ़कर ₹953.36 करोड़ तक पहुँचा। पॉलिश्ड लैब-ग्रोन डायमंड्स का निर्यात अप्रैल-अगस्त 2026 में 11.76 प्रतिशत बढ़कर ₹5,076.61 करोड़ हो गया, जो इस उभरते सेगमेंट की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। हालाँकि रंगीन रत्नों (कलर्ड जेमस्टोन्स) के निर्यात में 1.92 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई।

आने वाले महीनों में त्योहारी सीज़न और वैश्विक माँग के रुझान इस क्षेत्र की दिशा तय करेंगे। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मूल्यवर्धन और लैब-ग्रोन डायमंड सेगमेंट में यह गति बनी रहती है, तो FY27 भारतीय रत्न एवं आभूषण निर्यात के लिए एक मज़बूत वर्ष साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय आभूषण उद्योग के ढाँचागत बदलाव का सबूत है — कच्चे हीरे भेजने से लेकर तैयार मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने तक। हालाँकि साधारण सोने के आभूषणों में 11% की गिरावट और कट-पॉलिश्ड हीरों के मूल्य पर दबाव बताता है कि यह बदलाव अभी समान नहीं है। असली चुनौती यह होगी कि लैब-ग्रोन डायमंड और स्टडेड ज्वेलरी की यह गति त्योहारी सीज़न और वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच टिक पाती है या नहीं। बिना निरंतर नीतिगत समर्थन और बाज़ार विविधीकरण के, ये आँकड़े एक अच्छी तिमाही तक सीमित रह सकते हैं।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगस्त 2026 में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात कितना रहा?
अगस्त 2026 में भारत का सकल रत्न एवं आभूषण निर्यात सालाना आधार पर 12.52 प्रतिशत बढ़कर ₹21,945.87 करोड़ पर पहुँचा। यह वृद्धि मुख्य रूप से स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी और चाँदी आभूषणों की मज़बूत माँग से प्रेरित रही।
स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी निर्यात में कितनी बढ़ोतरी हुई?
स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी का निर्यात 64.96 प्रतिशत बढ़कर 642.85 मिलियन डॉलर पहुँचा। अमेरिका, UAE, हांगकांग, ब्रिटेन और फ्रांस से मज़बूत माँग इस उछाल का प्रमुख कारण रही।
कट एंड पॉलिश्ड हीरों के निर्यात की स्थिति कैसी रही?
कट एंड पॉलिश्ड हीरों की निर्यात मात्रा 12.94 लाख कैरेट से बढ़कर 13.36 लाख कैरेट हो गई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी के कारण मूल्य-आधारित आँकड़ों पर दबाव बना रहा।
लैब-ग्रोन डायमंड निर्यात की क्या स्थिति है?
अप्रैल-अगस्त 2026 में पॉलिश्ड लैब-ग्रोन डायमंड्स का निर्यात 11.76 प्रतिशत बढ़कर ₹5,076.61 करोड़ हो गया। यह इस उभरते सेगमेंट की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता को दर्शाता है।
FY27 की अप्रैल-अगस्त अवधि में सोने के आभूषण निर्यात का प्रदर्शन कैसा रहा?
इस अवधि में सोने के आभूषणों का कुल निर्यात 7 प्रतिशत बढ़कर ₹47,853.03 करोड़ रहा। साधारण सोने के आभूषण 11.44 प्रतिशत घटे, जबकि जड़े हुए गोल्ड ज्वेलरी 26.73 प्रतिशत बढ़ी।
राष्ट्र प्रेस
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