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SKUAST जम्मू: कुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी ने चकरोई बासमती अनुसंधान केंद्र का दौरा किया, शोध को मिलेगी नई दिशा

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SKUAST जम्मू: कुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी ने चकरोई बासमती अनुसंधान केंद्र का दौरा किया, शोध को मिलेगी नई दिशा

सारांश

SKUAST जम्मू के कुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी ने चकरोई स्थित बासमती अनुसंधान केंद्र का दौरा कर शोध सुविधाओं और फील्ड ट्रायल्स की समीक्षा की। उन्होंने केंद्र को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने का संकल्प जताया और वैज्ञानिकों से किसान-केंद्रित, बहु-विषयक अनुसंधान को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

SKUAST जम्मू के कुलपति प्रो.
बीएन त्रिपाठी ने 12 सितंबर 2026 को बासमती चावल अनुसंधान केंद्र, चकरोई का दौरा किया।
केंद्र में बासमती की उन्नत किस्मों के विकास, जर्मप्लाज्म संरक्षण और गुणवत्ता सुधार पर शोध जारी है।
कुलपति ने केंद्र को भविष्य में उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) बनाने की संभावना जताई।
वैज्ञानिकों से बहु-विषयक और किसानों की ज़रूरतों पर आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया।
गुप्ता (निदेशक अनुसंधान) और डॉ.
सलगोत्रा (निदेशक, बायोटेक्नोलॉजी) भी मौजूद रहे।

शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (SKUAST) जम्मू के कुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी ने 12 सितंबर 2026 को बासमती चावल अनुसंधान केंद्र, चकरोई का दौरा किया और वहाँ स्थापित अत्याधुनिक शोध सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। यह केंद्र जम्मू क्षेत्र में बासमती धान पर वैज्ञानिक अनुसंधान को सुदृढ़ करने और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्यरत है।

कुलपति ने क्या-क्या देखा

दौरे के क्रम में प्रो. त्रिपाठी ने केंद्र की प्रयोगशालाओं, आधुनिक अनुसंधान उपकरणों और प्रायोगिक प्लॉटों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने वैज्ञानिकों एवं तकनीकी कर्मचारियों के साथ विस्तृत चर्चा की, जिसमें बासमती चावल की उन्नत किस्मों के विकास, जर्मप्लाज्म संरक्षण, गुणवत्ता सुधार और वैश्विक बाज़ार में बासमती की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने से जुड़े चल रहे शोध कार्यक्रमों पर प्रस्तुतियाँ दी गईं।

कुलपति ने अनुसंधान खेतों में बासमती धान के बीज उत्पादन कार्यक्रम और विभिन्न फील्ड ट्रायल्स की प्रगति का भी जायज़ा लिया। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई बासमती किस्मों के प्रदर्शन में उन्होंने विशेष रुचि दिखाई।

कुलपति ने क्या कहा

प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि बासमती चावल भारत की एक महत्वपूर्ण और प्रीमियम कृषि उपज है। उन्होंने पारंपरिक बासमती जर्मप्लाज्म की विरासत, पहचान और आनुवांशिक विविधता को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि वैज्ञानिक तरीकों से इसके निरंतर सुधार पर काम जारी रहना चाहिए ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो और उनकी आजीविका मज़बूत बने।

उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू की बासमती की विशिष्ट पहचान और गुणवत्ता को बनाए रखना उतना ही ज़रूरी है जितना कि उत्पादन बढ़ाना। गौरतलब है कि जम्मू क्षेत्र में उगाई जाने वाली बासमती अपनी अनूठी सुगंध और लंबे दाने के लिए जानी जाती है, और वैश्विक बाज़ार में इसकी अलग माँग है।

बहु-विषयक अनुसंधान पर बल

कुलपति ने वैज्ञानिकों को बहु-विषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) दृष्टिकोण अपनाने और किसानों की व्यावहारिक ज़रूरतों पर आधारित शोध को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान का अंतिम लक्ष्य प्रयोगशाला से खेत तक प्रौद्योगिकी पहुँचाना होना चाहिए, ताकि केंद्र की वैज्ञानिक क्षमता का सीधा लाभ किसानों को मिले।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत का बासमती निर्यात वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता मानकों के कड़े होने के कारण चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में अनुसंधान केंद्रों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

उत्कृष्टता केंद्र बनने की संभावना

प्रो. त्रिपाठी ने केंद्र के समग्र विकास और चल रही शोध गतिविधियों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बासमती राइस रिसर्च सेंटर, चकरोई में भविष्य में बासमती चावल अनुसंधान, संरक्षण और उन्नत किस्मों के विकास के क्षेत्र में एक उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) के रूप में उभरने की पूरी क्षमता मौजूद है।

कौन-कौन रहा मौजूद

इस दौरे में डॉ. एस.के. गुप्ता, निदेशक अनुसंधान, तथा डॉ. आर.के. सलगोत्रा, निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एवं निदेशक शिक्षा, SKUAST-जम्मू भी कुलपति के साथ उपस्थित रहे। आने वाले समय में केंद्र से जुड़ी नई शोध परियोजनाओं और किसान-केंद्रित कार्यक्रमों की घोषणा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अनुसंधान निवेश के मामले में यह गेहूँ और गन्ने से काफ़ी पीछे रहा है। चकरोई जैसे क्षेत्रीय केंद्रों को उत्कृष्टता केंद्र बनाने की बात स्वागतयोग्य है, परंतु इसके लिए केवल दौरों और संकल्पों से आगे बढ़कर ठोस बजटीय प्रतिबद्धता और किसानों तक प्रौद्योगिकी पहुँचाने का स्पष्ट रोडमैप ज़रूरी है। जब तक शोध का लाभ खेत के स्तर पर दिखाई नहीं देता, ऐसे दौरे प्रतीकात्मक बने रहने का जोखिम रखते हैं।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SKUAST जम्मू का बासमती चावल अनुसंधान केंद्र चकरोई क्या है?
यह शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (SKUAST) जम्मू के अंतर्गत संचालित एक विशेष शोध केंद्र है, जो बासमती चावल की उन्नत किस्मों के विकास, जर्मप्लाज्म संरक्षण और गुणवत्ता सुधार पर केंद्रित है।
कुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी ने दौरे में क्या समीक्षा की?
प्रो. त्रिपाठी ने केंद्र की प्रयोगशालाओं, अनुसंधान उपकरणों, प्रायोगिक प्लॉटों और बीज उत्पादन कार्यक्रम का निरीक्षण किया। उन्होंने वैज्ञानिकों से चल रहे शोध कार्यक्रमों और फील्ड ट्रायल्स की प्रगति पर विस्तृत चर्चा भी की।
चकरोई केंद्र को उत्कृष्टता केंद्र बनाने का क्या मतलब है?
इसका अर्थ है कि केंद्र को बासमती अनुसंधान, संरक्षण और किस्म विकास में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्राप्त संस्था के रूप में विकसित करना, जहाँ बुनियादी ढाँचा, विशेषज्ञता और अनुसंधान आउटपुट सभी उच्चतम मानकों पर हों।
जम्मू की बासमती चावल की क्या विशेषता है?
जम्मू क्षेत्र में उगाई जाने वाली बासमती अपनी अनूठी सुगंध और लंबे दाने के लिए प्रसिद्ध है। वैश्विक बाज़ार में इसकी अलग पहचान और माँग है, जिसे बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक शोध और गुणवत्ता नियंत्रण ज़रूरी है।
इस दौरे में कुलपति के साथ और कौन मौजूद रहे?
दौरे में डॉ. एस.के. गुप्ता (निदेशक अनुसंधान) और डॉ. आर.के. सलगोत्रा (निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एवं निदेशक शिक्षा, SKUAST-जम्मू) भी कुलपति के साथ उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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