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पीलीभीत में बनेगा देश का पहला बासमती-जैविक प्रशिक्षण केंद्र, 70 साल की लीज पर 7 एकड़ जमीन मंजूर

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पीलीभीत में बनेगा देश का पहला बासमती-जैविक प्रशिक्षण केंद्र, 70 साल की लीज पर 7 एकड़ जमीन मंजूर

सारांश

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में देश का पहला बासमती-जैविक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित होगा — 7 एकड़ जमीन 70 साल की लीज पर मंजूर। साथ ही AI-आधारित बासमती सर्वे प्रोजेक्ट (2026-2028) लॉन्च, जो 40 लाख हेक्टेयर और 5 लाख किसानों को कवर करेगा। ₹5.67 अरब डॉलर के निर्यात वाले इस क्षेत्र के लिए यह बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के टांडा बिजैसी में देश का पहला बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित होगा।
केंद्र के लिए करीब 7 एकड़ जमीन को 70 साल की लीज पर देने की सरकार ने मंजूरी दी।
केंद्र को AICRP का दर्जा भी मिला, जिससे पीलीभीत में यह इस तरह का तीसरा केंद्र बन गया।
केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारत के पहले AI-आधारित बासमती धान सर्वे प्रोजेक्ट (2026-2028) की शुरुआत की।
AI सर्वे प्रोजेक्ट 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र, 1.5 लाख+ स्थानों और 5 लाख+ किसानों को कवर करेगा।
बासमती चावल का निर्यात 2025-26 में 5.67 अरब डॉलर और मात्रा लगभग 65 लाख मीट्रिक टन रही।

सरकार ने 30 अप्रैल 2026 को घोषणा की कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के टांडा बिजैसी में देश का पहला बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र (ऑर्गेनिक ट्रेनिंग सेंटर) तथा डेमो फार्म स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए करीब 7 एकड़ जमीन को 70 साल की लीज पर देने की मंजूरी दी गई है। यह केंद्र उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों को पारंपरिक और जैविक दोनों तरह की बासमती खेती का प्रशिक्षण और प्रदर्शन एक ही छत के नीचे प्रदान करेगा।

केंद्र में क्या-क्या सुविधाएँ होंगी

एक आधिकारिक बयान के अनुसार इस प्रशिक्षण केंद्र में ऑडिटोरियम, संग्रहालय, बासमती और जैविक खेती पर गैलरी, कॉन्फ्रेंस रूम, प्रयोगशाला तथा जैविक खेती के लिए आवश्यक सामग्री रखने हेतु भंडारण स्थान जैसी अनेक सुविधाएँ होंगी। यह केंद्र किसानों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों और छात्रों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संसाधन केंद्र के रूप में काम करेगा।

गौरतलब है कि यह भारत का पहला ऐसा केंद्र होगा जहाँ बासमती खेती के पारंपरिक और जैविक — दोनों तरीकों का एकीकृत प्रशिक्षण और प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसान विशेष रूप से लाभान्वित होंगे।

AICRP केंद्र का दर्जा और बासमती अनुसंधान

इस केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर बासमती के परीक्षण के लिए 'ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट (AICRP)' केंद्र का दर्जा भी दिया गया है। इसके साथ ही पीलीभीत, उत्तर प्रदेश के बासमती क्षेत्र में यह इस तरह का तीसरा केंद्र बन गया है। इससे नए बासमती बीजों का परीक्षण और क्षेत्र के अनुसार उनकी उपयुक्तता का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सकेगा।

AI-आधारित बासमती सर्वे प्रोजेक्ट की शुरुआत

इसी अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारत के पहले AI-आधारित बासमती धान सर्वे प्रोजेक्ट (2026-2028) का शुभारंभ किया। यह परियोजना APEDA (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) और अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ (AIREA) के सहयोग से लागू की जाएगी।

इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा, 1.5 लाख से अधिक स्थानों से डेटा एकत्र किया जाएगा और 5 लाख से अधिक किसानों को इसमें शामिल किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य फसल का सटीक आकलन, किस्मों की पहचान, वैज्ञानिक सलाह और निर्यात योजना को और अधिक प्रभावी बनाना है।

बासमती निर्यात और वैश्विक बाज़ार

बासमती चावल भारत का एक जीआई (भौगोलिक संकेत) उत्पाद है और इसका निर्यात 2025-26 में 5.67 अरब डॉलर रहा, जबकि निर्यात की मात्रा लगभग 65 लाख मीट्रिक टन थी। यह क्षेत्र भारत के कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है और मध्य पूर्व, यूरोप तथा उत्तर अमेरिका जैसे बाज़ारों में इसकी मजबूत माँग बनी हुई है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने कृषि निर्यात को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहा है। पीलीभीत स्थित यह केंद्र न केवल स्थानीय किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि बासमती के वैश्विक बाज़ार में भारत की स्थिति को और मज़बूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति और किसानों तक पहुँच की होगी। बासमती निर्यात 5.67 अरब डॉलर पर है, फिर भी जैविक खेती की हिस्सेदारी अभी सीमित है — यह केंद्र उस अंतर को पाटने का दावा करता है। 70 साल की लीज दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का संकेत है, परंतु AICRP दर्जे और AI सर्वे के लाभ तभी मिलेंगे जब डेटा का उपयोग नीति-निर्माण और किसान-परामर्श में पारदर्शी तरीके से हो।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीलीभीत में बनने वाला बासमती प्रशिक्षण केंद्र क्या है?
यह उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के टांडा बिजैसी में स्थापित होने वाला देश का पहला बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र है, जिसके लिए सरकार ने 7 एकड़ जमीन 70 साल की लीज पर देने की मंजूरी दी है। इसमें ऑडिटोरियम, प्रयोगशाला, गैलरी और डेमो फार्म जैसी सुविधाएँ होंगी।
इस केंद्र से किन किसानों को फायदा मिलेगा?
इस केंद्र की भौगोलिक स्थिति के कारण मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसान लाभान्वित होंगे। यह केंद्र कृषि विशेषज्ञों और छात्रों के लिए भी संसाधन केंद्र के रूप में काम करेगा।
AI-आधारित बासमती धान सर्वे प्रोजेक्ट क्या है?
यह 2026-2028 के लिए शुरू किया गया भारत का पहला AI-आधारित बासमती धान सर्वे प्रोजेक्ट है, जिसे APEDA और अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ (AIREA) मिलकर लागू करेंगे। इसके तहत 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र, 1.5 लाख से अधिक स्थानों और 5 लाख से अधिक किसानों को कवर किया जाएगा।
AICRP केंद्र का दर्जा मिलने से क्या फर्क पड़ेगा?
AICRP (ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट) का दर्जा मिलने से इस केंद्र पर नए बासमती बीजों का राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षण और क्षेत्र के अनुसार उनकी उपयुक्तता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सकेगा। पीलीभीत में यह इस तरह का तीसरा केंद्र बन गया है।
भारत का बासमती चावल निर्यात कितना है?
भारत का बासमती चावल निर्यात 2025-26 में 5.67 अरब डॉलर रहा और निर्यात की मात्रा लगभग 65 लाख मीट्रिक टन थी। मध्य पूर्व, यूरोप और उत्तर अमेरिका इसके प्रमुख बाज़ार हैं।
राष्ट्र प्रेस
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