पीलीभीत में बनेगा देश का पहला बासमती-जैविक प्रशिक्षण केंद्र, 70 साल की लीज पर 7 एकड़ जमीन मंजूर
सारांश
Key Takeaways
सरकार ने 30 अप्रैल 2026 को घोषणा की कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के टांडा बिजैसी में देश का पहला बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र (ऑर्गेनिक ट्रेनिंग सेंटर) तथा डेमो फार्म स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए करीब 7 एकड़ जमीन को 70 साल की लीज पर देने की मंजूरी दी गई है। यह केंद्र उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों को पारंपरिक और जैविक दोनों तरह की बासमती खेती का प्रशिक्षण और प्रदर्शन एक ही छत के नीचे प्रदान करेगा।
केंद्र में क्या-क्या सुविधाएँ होंगी
एक आधिकारिक बयान के अनुसार इस प्रशिक्षण केंद्र में ऑडिटोरियम, संग्रहालय, बासमती और जैविक खेती पर गैलरी, कॉन्फ्रेंस रूम, प्रयोगशाला तथा जैविक खेती के लिए आवश्यक सामग्री रखने हेतु भंडारण स्थान जैसी अनेक सुविधाएँ होंगी। यह केंद्र किसानों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों और छात्रों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संसाधन केंद्र के रूप में काम करेगा।
गौरतलब है कि यह भारत का पहला ऐसा केंद्र होगा जहाँ बासमती खेती के पारंपरिक और जैविक — दोनों तरीकों का एकीकृत प्रशिक्षण और प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसान विशेष रूप से लाभान्वित होंगे।
AICRP केंद्र का दर्जा और बासमती अनुसंधान
इस केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर बासमती के परीक्षण के लिए 'ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट (AICRP)' केंद्र का दर्जा भी दिया गया है। इसके साथ ही पीलीभीत, उत्तर प्रदेश के बासमती क्षेत्र में यह इस तरह का तीसरा केंद्र बन गया है। इससे नए बासमती बीजों का परीक्षण और क्षेत्र के अनुसार उनकी उपयुक्तता का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सकेगा।
AI-आधारित बासमती सर्वे प्रोजेक्ट की शुरुआत
इसी अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारत के पहले AI-आधारित बासमती धान सर्वे प्रोजेक्ट (2026-2028) का शुभारंभ किया। यह परियोजना APEDA (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) और अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ (AIREA) के सहयोग से लागू की जाएगी।
इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा, 1.5 लाख से अधिक स्थानों से डेटा एकत्र किया जाएगा और 5 लाख से अधिक किसानों को इसमें शामिल किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य फसल का सटीक आकलन, किस्मों की पहचान, वैज्ञानिक सलाह और निर्यात योजना को और अधिक प्रभावी बनाना है।
बासमती निर्यात और वैश्विक बाज़ार
बासमती चावल भारत का एक जीआई (भौगोलिक संकेत) उत्पाद है और इसका निर्यात 2025-26 में 5.67 अरब डॉलर रहा, जबकि निर्यात की मात्रा लगभग 65 लाख मीट्रिक टन थी। यह क्षेत्र भारत के कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है और मध्य पूर्व, यूरोप तथा उत्तर अमेरिका जैसे बाज़ारों में इसकी मजबूत माँग बनी हुई है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने कृषि निर्यात को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहा है। पीलीभीत स्थित यह केंद्र न केवल स्थानीय किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि बासमती के वैश्विक बाज़ार में भारत की स्थिति को और मज़बूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।