संगठित गोल्ड ज्वेलरी बाजार में 20-25% राजस्व वृद्धि का अनुमान, पर वॉल्यूम एक दशक के निचले स्तर पर: क्रिसिल
सारांश
मुख्य बातें
भारत के संगठित गोल्ड ज्वेलरी बाजार की आय में वित्त वर्ष 2026-27 में सालाना आधार पर 20-25 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है — लेकिन यह तेजी कीमतों में उछाल की देन होगी, न कि बिक्री मात्रा में बढ़ोतरी की। क्रिसिल रेटिंग्स की 22 मई 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची सोने की कीमतों और सरकार द्वारा आयात पर कसी गई नकेल के चलते इस क्षेत्र में बिक्री की मात्रा कोविड-19 प्रभावित वित्त वर्ष 2021 को छोड़कर पिछले एक दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच सकती है।
मुख्य घटनाक्रम
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, सोने के आभूषणों के खुदरा क्षेत्र में बिक्री की मात्रा इस वित्त वर्ष में सालाना आधार पर 13-15 प्रतिशत घटकर 620-640 टन रह जाने का अनुमान है। गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष में भी इस क्षेत्र में 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। यानी लगातार दो वर्षों की गिरावट के बाद यह क्षेत्र गंभीर दबाव में है।
वित्त वर्ष 2026 में भारत ने 720 टन सोने का आयात किया, जिससे देश की 72 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बाहर गई। व्यापार घाटे को काबू में रखने और रुपये को सहारा देने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में सोने पर सीमा शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है।
सरकार के नीतिगत कदमों का असर
केंद्र सरकार द्वारा सीमा शुल्क में की गई यह बढ़ोतरी सोने की मांग को कम करने और आयात पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया गया कदम है। क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक हिमांक शर्मा ने कहा, "केंद्र सरकार द्वारा सोने पर सीमा शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का निर्णय सोने के आभूषणों की मांग पर काफी नकारात्मक प्रभाव डालेगा। हालांकि निवेश की मांग के कारण सोने की छड़ों और सिक्कों की ओर मजबूत रुझान देखा जा रहा है, लेकिन इससे समग्र मांग में आई गिरावट की पूरी तरह भरपाई होने की संभावना नहीं है।"
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतें पहले से ही ऊंचाई पर बनी हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ता की खरीद क्षमता पर सीधा असर पड़ रहा है।
राजस्व बनाम वॉल्यूम का विरोधाभास
रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण विरोधाभास उजागर किया गया है — राजस्व में वृद्धि के बावजूद ज्वेलर्स की वित्तीय स्थिति पर दबाव बना रहेगा। सोने की ऊंची कीमतों से ज्वेलरी स्टॉक रखने की लागत बढ़ेगी और बैंकों से उधार भी अधिक लेना पड़ेगा।
हालांकि क्रिसिल का मानना है कि राजस्व और नकदी प्रवाह दोनों में वृद्धि से ऋण पर बढ़ती निर्भरता संतुलित हो जाएगी, जिससे क्रेडिट प्रोफाइल स्थिर बनी रहेगी। इसके अलावा, कीमतों में बढ़ोतरी से खुदरा विक्रेताओं को इन्वेंट्री पर लाभ होगा — हालांकि इसका एक हिस्सा ग्राहकों को अधिक छूट देकर थोक बिक्री को प्रोत्साहित करने में खर्च हो सकता है।
आम जनता और खुदरा विक्रेताओं पर असर
रिपोर्ट के अनुसार, प्रचार संबंधी खर्चों में वृद्धि और सोने की छड़ों व सिक्कों के व्यापार से खुदरा विक्रेताओं के सकल लाभ पर दबाव पड़ेगा। उपभोक्ताओं के लिए आभूषण खरीदना महंगा होगा, जिससे शादी-विवाह जैसे अवसरों पर खरीद में कटौती की संभावना है।
गौरतलब है कि संगठित क्षेत्र के विपरीत, असंगठित ज्वेलर्स पर इस नीतिगत बदलाव का प्रभाव अलग तरीके से पड़ सकता है, क्योंकि उनके संचालन की लागत संरचना भिन्न होती है।
क्या होगा आगे
क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव, नियमों में और बदलाव, सोने की खरीद पर संभावित सरकारी प्रतिबंध और उपभोक्ता भावना में बदलाव पर नजर रखना जरूरी होगा। आने वाले महीनों में इन कारकों की दिशा ही तय करेगी कि यह क्षेत्र राजस्व वृद्धि के अनुमानों पर खरा उतरता है या नहीं।