सोने पर आयात शुल्क 15% होने से चालू खाता घाटे में 23 आधार अंक की कमी संभव: एमके ग्लोबल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क (सेस सहित) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के फैसले से भारत के चालू खाते के घाटे (CAD) में 23 आधार अंक तक की कमी आ सकती है। 15 मई को जारी एक विश्लेषण रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। यह कदम देश की वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित रखने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा बताया जा रहा है।
एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
घरेलू ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, बाज़ार ने भू-राजनीतिक तनाव के बाद की परिस्थितियों का आकलन पहले ही कर लिया है। हालाँकि, कच्चे तेल की कीमतें 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहने से दबाव जारी है और इस स्थिति में निफ्टी 21,000 के स्तर तक फिसल सकता है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि सोने पर आयात शुल्क में इस बढ़ोतरी का सीधा असर ज्वेलरी कंपनियों पर पड़ेगा और खुदरा महंगाई दर में भी उछाल देखने को मिल सकता है।
ईंधन कीमतें और मुद्रास्फीति का खतरा
रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, खुदरा ईंधन की कीमतों में फिलहाल ₹17-18 प्रति लीटर की अंडर रिकवरी (लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर) बनी हुई है। यदि ईंधन की कीमतों में ₹10 प्रति लीटर की वृद्धि की जाती है, तो इससे लगभग आधी अंडर रिकवरी की भरपाई हो जाएगी।
इस परिदृश्य में जून माह की मुद्रास्फीति दर 4.4 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है, जिससे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना प्रबल हो जाएगी।
अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद और नीतिगत विकल्प
एमके ग्लोबल ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते की संभावना है, जिससे कच्चे तेल का दबाव कम हो सकता है और इन उपायों की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। परंतु यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊँची बनी रहती हैं, तो नीतिगत विकल्पों में मुद्रा बाज़ारों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप, विदेशी बॉन्ड या विशेष जमा योजनाएँ, और विदेश भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) पर सीमाएँ लगाना शामिल हो सकता है।
गौरतलब है कि फिलीपींस, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों ने घरेलू यात्रा कम करने के लिए अनिवार्य 'वर्क फ्रॉम होम' जैसे उपाय पहले ही लागू किए हैं। भारत में ऐसे किसी कदम की संभावना फिलहाल बेहद कम है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार यदि ऐसा होता है तो पर्यटन, आतिथ्य और विमानन क्षेत्रों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
रेमिटेंस और चालू खाता घाटे का संदर्भ
आँकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में भारतीयों द्वारा विदेश भेजे गए धन (रेमिटेंस) में 9.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह रेमिटेंस अब चालू खाते के घाटे का 174 प्रतिशत हो गया है — जो भारत के बाह्य वित्तपोषण की मज़बूती को दर्शाता है, लेकिन साथ ही बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशीलता भी बनाए रखता है।
आगे की राह इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं और सरकार नीतिगत संतुलन किस तरह साधती है।