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सोने-चांदी की कीमतें 2026 की दूसरी छमाही में टैक्स, कस्टम ड्यूटी और भू-राजनीतिक तनाव से होंगी प्रभावित: GJC रिपोर्ट

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सोने-चांदी की कीमतें 2026 की दूसरी छमाही में टैक्स, कस्टम ड्यूटी और भू-राजनीतिक तनाव से होंगी प्रभावित: GJC रिपोर्ट

सारांश

2026 की पहली छमाही में सोना ₹1,70,480 और चांदी ₹4,02,490 प्रति किलो के शिखर से तेज़ी से लुढ़की। GJC की रिपोर्ट कहती है कि दूसरी छमाही में टैक्स नीति, कस्टम ड्यूटी और वैश्विक तनाव ही बाज़ार की दिशा तय करेंगे — और त्योहारी सीज़न हल्की ज्वेलरी की मांग को उठा सकता है।

मुख्य बातें

GJC की रिपोर्ट के अनुसार 2026 की दूसरी छमाही में बुलियन की कीमतें टैक्स बदलाव, कस्टम ड्यूटी और भू-राजनीतिक तनाव से तय होंगी।
सोना जनवरी 2026 में ₹1,70,480 प्रति 10 ग्राम के शिखर से घटकर जून अंत तक ₹1,42,800 पर आया।
चांदी ₹4,02,490 प्रति किलोग्राम से गिरकर जून अंत तक ₹2,25,940 प्रति किलोग्राम पर आई।
मई 2026 में कस्टम ड्यूटी बढ़ोतरी से घरेलू कीमतें बढ़ीं और खुदरा मांग प्रभावित हुई।
काउंसिल ने 'गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम' में सुधार और GST ढाँचे को तर्कसंगत बनाने की माँग दोहराई।
त्योहारी और विवाह सीज़न में हल्के वजन की ज्वेलरी की मांग में तेज़ी आने की उम्मीद।

ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) की 2 जुलाई 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में बुलियन बाज़ार की दिशा मुख्य रूप से टैक्स में बदलाव, कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव से तय होगी। हालिया गिरावट के बाद कीमतों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव और फिर कंसोलिडेशन का दौर आने की संभावना जताई गई है।

पहली छमाही में ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव

जनवरी 2026 में सोने की कीमतें ₹1,70,480 प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुँची थीं, जो जून 2026 के अंत तक घटकर लगभग ₹1,42,800 प्रति 10 ग्राम रह गईं। चांदी की कीमतें भी जनवरी में ₹4,02,490 प्रति किलोग्राम से ऊपर चली गई थीं और जून के अंत तक लगभग ₹2,25,940 प्रति किलोग्राम पर आ गईं। रिपोर्ट के अनुसार, इस तीव्र उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ा, लेकिन बजट की सीमाओं के कारण आभूषणों की खुदरा मांग पर दबाव बना रहा।

कस्टम ड्यूटी और GST का असर

मई 2026 में कस्टम ड्यूटी में की गई बढ़ोतरी की घोषणा ने घरेलू कीमतों को और ऊँचा कर दिया, जिससे खुदरा मांग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। GJC की रिपोर्ट में कहा गया है कि GST का बोझ और अनुपालन की जटिलताओं ने व्यापारियों के मुनाफे पर दबाव बनाए रखा है, जिसके चलते इंडस्ट्री नियामक ढाँचे को तर्कसंगत बनाने की माँग कर रही है।

ज्वेलरी मांग और बदलते उपभोक्ता रुझान

रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्राहक अब हल्के वजन वाले गहनों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जो बजट की सीमाओं और बदलते फैशन ट्रेंड दोनों को दर्शाता है। समग्र ज्वेलरी मांग कम रहने की उम्मीद है, हालाँकि त्योहारी और विवाह सीज़न में इस श्रेणी में बिक्री में तेज़ी आ सकती है। GJC के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा, "आने वाले त्योहारों के मौसम और साल की दूसरी छमाही में शादियों के पीक सीज़न से ज्वेलरी की मांग को, खासकर हल्के वजन वाली ज्वेलरी की कैटेगरी में, जबरदस्त सहारा मिलने की उम्मीद है।"

गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में सुधार की माँग

काउंसिल ने 'गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम' में व्यापक सुधार की अपनी माँग दोहराई है, ताकि घरों में निष्क्रिय पड़े सोने की वैल्यू का उत्पादक उपयोग हो सके, आयात पर निर्भरता घटे और घरेलू सप्लाई चेन को मज़बूती मिले। इंडस्ट्री संभावित टैक्स बदलावों पर सरकार की ओर से स्पष्टता का भी इंतजार कर रही है।

आगे की राह

रोकड़े ने कहा कि बाज़ार असाधारण रूप से ऊँचे स्तरों के बाद अब एडजस्टमेंट के दौर में है और फ्यूचर्स कीमतों में सुधार के बावजूद खुदरा कीमतें ऊँची बनी हुई हैं। भू-राजनीतिक जोखिम एक अहम चर बने रहेंगे — वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग एक बार फिर उभर सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, सांस्कृतिक लगाव और त्योहारी माँग भारतीय बुलियन बाज़ार को दीर्घकालिक रूप से सहारा देती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी 'गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम' जैसे दीर्घकालिक समाधानों पर सरकारी स्पष्टता का अभाव बना हुआ है। जब तक घरेलू सोने की रिसाइक्लिंग और मॉनेटाइजेशन को व्यावहारिक रूप नहीं दिया जाता, भारत की सोने की भूख आयात बिल के रूप में अर्थव्यवस्था पर बोझ बनती रहेगी। त्योहारी मांग राहत दे सकती है, लेकिन यह संरचनात्मक सुधार का विकल्प नहीं है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 की दूसरी छमाही में सोने-चांदी की कीमतें किन कारणों से प्रभावित होंगी?
GJC की रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स में बदलाव, कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव 2026 की दूसरी छमाही में बुलियन की कीमतें तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। हालिया गिरावट के बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव और फिर कंसोलिडेशन का दौर आने की संभावना है।
2026 में सोने और चांदी की कीमतें कितनी ऊँची गईं और अब कहाँ हैं?
जनवरी 2026 में सोना ₹1,70,480 प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुँचा था, जो जून 2026 के अंत तक घटकर लगभग ₹1,42,800 प्रति 10 ग्राम रह गया। चांदी जनवरी में ₹4,02,490 प्रति किलोग्राम से ऊपर गई थी और जून अंत तक लगभग ₹2,25,940 प्रति किलोग्राम पर आ गई।
कस्टम ड्यूटी बढ़ोतरी का ज्वेलरी बाज़ार पर क्या असर पड़ा?
मई 2026 में कस्टम ड्यूटी बढ़ाए जाने की घोषणा से घरेलू सोने की कीमतें बढ़ गईं, जिससे खुदरा ज्वेलरी की मांग पर नकारात्मक असर पड़ा। GST का बोझ और अनुपालन की जटिलताओं ने व्यापारियों के मुनाफे पर भी दबाव बनाए रखा।
GJC ने 'गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम' में सुधार की माँग क्यों की है?
काउंसिल का मानना है कि इस स्कीम में सुधार से घरों में निष्क्रिय पड़े सोने का उत्पादक उपयोग हो सकेगा, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और घरेलू सप्लाई चेन मज़बूत होगी। इंडस्ट्री संभावित टैक्स बदलावों पर सरकारी स्पष्टता का भी इंतजार कर रही है।
त्योहारी सीज़न में ज्वेलरी की मांग कैसी रहने की उम्मीद है?
GJC के चेयरमैन राजेश रोकड़े के अनुसार, आगामी त्योहारी और विवाह सीज़न में हल्के वजन वाली ज्वेलरी की मांग में उल्लेखनीय तेज़ी आने की उम्मीद है। सांस्कृतिक लगाव और भारत के सोने के साथ गहरे भावनात्मक जुड़ाव के कारण बाज़ार उतार-चढ़ाव के बावजूद मज़बूत बना रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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