सोने-चांदी की कीमतें 2026 की दूसरी छमाही में टैक्स, कस्टम ड्यूटी और भू-राजनीतिक तनाव से होंगी प्रभावित: GJC रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) की 2 जुलाई 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में बुलियन बाज़ार की दिशा मुख्य रूप से टैक्स में बदलाव, कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव से तय होगी। हालिया गिरावट के बाद कीमतों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव और फिर कंसोलिडेशन का दौर आने की संभावना जताई गई है।
पहली छमाही में ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव
जनवरी 2026 में सोने की कीमतें ₹1,70,480 प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुँची थीं, जो जून 2026 के अंत तक घटकर लगभग ₹1,42,800 प्रति 10 ग्राम रह गईं। चांदी की कीमतें भी जनवरी में ₹4,02,490 प्रति किलोग्राम से ऊपर चली गई थीं और जून के अंत तक लगभग ₹2,25,940 प्रति किलोग्राम पर आ गईं। रिपोर्ट के अनुसार, इस तीव्र उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ा, लेकिन बजट की सीमाओं के कारण आभूषणों की खुदरा मांग पर दबाव बना रहा।
कस्टम ड्यूटी और GST का असर
मई 2026 में कस्टम ड्यूटी में की गई बढ़ोतरी की घोषणा ने घरेलू कीमतों को और ऊँचा कर दिया, जिससे खुदरा मांग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। GJC की रिपोर्ट में कहा गया है कि GST का बोझ और अनुपालन की जटिलताओं ने व्यापारियों के मुनाफे पर दबाव बनाए रखा है, जिसके चलते इंडस्ट्री नियामक ढाँचे को तर्कसंगत बनाने की माँग कर रही है।
ज्वेलरी मांग और बदलते उपभोक्ता रुझान
रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्राहक अब हल्के वजन वाले गहनों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जो बजट की सीमाओं और बदलते फैशन ट्रेंड दोनों को दर्शाता है। समग्र ज्वेलरी मांग कम रहने की उम्मीद है, हालाँकि त्योहारी और विवाह सीज़न में इस श्रेणी में बिक्री में तेज़ी आ सकती है। GJC के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा, "आने वाले त्योहारों के मौसम और साल की दूसरी छमाही में शादियों के पीक सीज़न से ज्वेलरी की मांग को, खासकर हल्के वजन वाली ज्वेलरी की कैटेगरी में, जबरदस्त सहारा मिलने की उम्मीद है।"
गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में सुधार की माँग
काउंसिल ने 'गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम' में व्यापक सुधार की अपनी माँग दोहराई है, ताकि घरों में निष्क्रिय पड़े सोने की वैल्यू का उत्पादक उपयोग हो सके, आयात पर निर्भरता घटे और घरेलू सप्लाई चेन को मज़बूती मिले। इंडस्ट्री संभावित टैक्स बदलावों पर सरकार की ओर से स्पष्टता का भी इंतजार कर रही है।
आगे की राह
रोकड़े ने कहा कि बाज़ार असाधारण रूप से ऊँचे स्तरों के बाद अब एडजस्टमेंट के दौर में है और फ्यूचर्स कीमतों में सुधार के बावजूद खुदरा कीमतें ऊँची बनी हुई हैं। भू-राजनीतिक जोखिम एक अहम चर बने रहेंगे — वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग एक बार फिर उभर सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, सांस्कृतिक लगाव और त्योहारी माँग भारतीय बुलियन बाज़ार को दीर्घकालिक रूप से सहारा देती रहेंगी।