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भारत में Q2 2026 सोने की मांग 6% घटकर 131.4 टन, आभूषण खरीद 15% लुढ़की: WGC रिपोर्ट

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भारत में Q2 2026 सोने की मांग 6% घटकर 131.4 टन, आभूषण खरीद 15% लुढ़की: WGC रिपोर्ट

सारांश

WGC की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि भारत में Q2 2026 में सोने की कुल माँग 131.4 टन रही — सालाना 6% की गिरावट। ज्वेलरी खंड 15% लुढ़का, लेकिन निवेश माँग टिकी रही। PM मोदी की 'शादियों में सोना न खरीदें' अपील और US Fed की नीति ने बाज़ार की धारणा को प्रभावित किया।

मुख्य बातें

भारत में Q2 2026 (अप्रैल-जून) में सोने की कुल माँग सालाना 6% घटकर 131.4 टन रही, जो पिछले वर्ष 139.7 टन थी।
आभूषण (ज्वेलरी) माँग सबसे अधिक प्रभावित — 15% गिरकर 88.8 टन से 75.1 टन पर आई।
PM नरेंद्र मोदी ने मई 2026 में नागरिकों से एक वर्ष तक शादियों के लिए सोना न खरीदने की अपील की थी।
निवेश-उद्देश्य से सोने की माँग अपेक्षाकृत मज़बूत बनी रही।
MCX पर गुरुवार को सोने-चाँदी में 1% तक की गिरावट, US Fed फैसले से पहले मुनाफावसूली।
आगामी RBI नीति समीक्षा और सितंबर में Fed का फैसला सोने की दिशा तय करेगा।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की Q2 2026 गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 6 प्रतिशत घटकर 131.4 टन रह गई, जो एक वर्ष पहले 139.7 टन थी। मौसमी सुस्ती, आयात शुल्क के दबाव और उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं ने खरीदारी को प्रभावित किया, हालांकि निवेश-उद्देश्य से सोने की मांग अपेक्षाकृत मज़बूत बनी रही।

आभूषण मांग में सबसे बड़ी गिरावट

WGC के आँकड़ों के अनुसार, इस तिमाही में सर्वाधिक नुकसान आभूषण (ज्वेलरी) खंड को हुआ। ज्वेलरी की मांग सालाना आधार पर 15 प्रतिशत लुढ़ककर 88.8 टन से घटकर 75.1 टन पर आ गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊँची कीमतों और आयात लागत में बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं को सोने की खरीद से दूर रखा।

PM मोदी की अपील और उसका असर

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से गैर-ज़रूरी सोने की खरीदारी को कुछ समय के लिए टालने और बचत के वैकल्पिक साधनों पर विचार करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था, 'मैं लोगों से अपील करूंगा कि वे एक वर्ष तक शादियों के लिए सोना न खरीदें।' यह अपील पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उससे उपजी वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच की गई थी, जब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा था।

MCX पर कीमतों में उतार-चढ़ाव

गुरुवार को MCX पर मुनाफावसूली के चलते सोने और चाँदी की कीमतों में 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने अमेरिकी फेडरल रिज़र्व (US Fed) की मौद्रिक नीति के फैसले से पहले अपनी पोज़िशन हल्की की। बाज़ार विश्लेषकों का कहना है कि 4,080 डॉलर के आसपास सोने की कीमतों का टिके रहना इस बात का संकेत है कि बाज़ार एक ओर सख्त मौद्रिक नीति और दूसरी ओर पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।

विशेषज्ञों की राय और आगे की संभावनाएँ

विशेषज्ञों के अनुसार, US Fed ने महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया है और सितंबर में दरों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना भी कम बताई जा रही है। इसके बावजूद वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की माँग फिर से बढ़ सकती है। हालाँकि, Fed का 2 प्रतिशत महंगाई लक्ष्य हासिल करने का सख्त रुख अल्पकाल में सोने की कीमतों के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल बना सकता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि आगामी त्योहारी सीज़न, अगले सप्ताह होने वाली भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा, सितंबर में US Fed का फैसला और घरेलू व वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम — ये सभी मिलकर सोने की कीमतों और ज्वेलरी बिक्री की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

आयात शुल्क और सरकारी अपील के संयुक्त असर का परिणाम है। दिलचस्प यह है कि जब उपभोक्ता माँग सिकुड़ रही थी, निवेश माँग टिकी रही — यह दर्शाता है कि भारतीय बाज़ार में सोने की भूमिका 'आभूषण' से 'परिसंपत्ति' की ओर धीरे-धीरे बदल रही है। PM मोदी की 'सोना न खरीदें' अपील राजनीतिक रूप से असाधारण थी, लेकिन इसका दीर्घकालिक व्यवहार-परिवर्तन पर असर मापना अभी बाकी है। त्योहारी सीज़न और RBI-Fed के फैसले यह तय करेंगे कि यह गिरावट अस्थायी है या नई प्रवृत्ति की शुरुआत।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q2 2026 में भारत की सोने की माँग कितनी रही?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत की कुल सोने की माँग 131.4 टन रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 139.7 टन थी — यानी सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट।
सोने की ज्वेलरी माँग में इतनी गिरावट क्यों आई?
आँकड़ों के अनुसार, ज्वेलरी माँग 15 प्रतिशत घटकर 75.1 टन रह गई। मौसमी सुस्ती, ऊँची आयात लागत और PM मोदी की गैर-ज़रूरी सोने की खरीद टालने की अपील को इसके प्रमुख कारण माना जा रहा है।
PM मोदी ने सोने को लेकर क्या अपील की थी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2026 में नागरिकों से अपील की थी कि वे एक वर्ष तक शादियों के लिए सोना न खरीदें। उन्होंने कहा था कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आयात लागत के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है।
निवेश के लिए सोने की माँग पर क्या असर पड़ा?
ज्वेलरी माँग में गिरावट के बावजूद निवेश-उद्देश्य से सोने की माँग अपेक्षाकृत मज़बूत बनी रही। वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव के चलते निवेशक सोने को सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में देखते रहे।
आगे सोने की कीमतों की दिशा क्या होगी?
विशेषज्ञों के अनुसार, RBI की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा, सितंबर में US Fed का फैसला और त्योहारी सीज़न की माँग सोने की कीमतों और ज्वेलरी बिक्री की दिशा तय करेंगे। US Fed का 2 प्रतिशत महंगाई लक्ष्य हासिल करने का सख्त रुख अल्पकाल में कीमतों के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल बना सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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