दिल्ली स्वास्थ्य खरीद घोटाला: पूर्व डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल और डीसीए नीरज चोपड़ा गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने 27 जून 2026 को दवाइयों, सर्जिकल सामग्रियों और चिकित्सा उपकरणों की सरकारी खरीद में कथित बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के मामले में स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्व महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल और केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को राऊज एवेन्यू स्थित विशेष भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अदालत में पेश किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला दिल्ली सरकार के विजिलेंस निदेशालय की शिकायत से उपजा, जिसमें आरोप लगाया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अंतर्गत कार्यरत सीपीए ने दवाइयों, सर्जिकल सामान और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में व्यापक अनियमितताएं कीं। एसीबी ने 2 जून 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
गौरतलब है कि इससे पहले सीपीए के तत्कालीन हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा को 18 जून 2026 को गिरफ्तार किया जा चुका है और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। डॉ. रंगा से पूछताछ और खरीद रिकॉर्ड के विश्लेषण के दौरान ही डॉ. अग्रवाल और चोपड़ा की कथित भूमिका जांच एजेंसी के सामने आई।
आरोपों का विवरण
एसीबी के अनुसार, कुछ सरकारी अधिकारियों ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर खरीद प्रक्रिया, निविदा शर्तों और तकनीकी मानकों में हेरफेर किया, ताकि चुनिंदा आपूर्तिकर्ताओं को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके। आरोप है कि निविदा शर्तें इस प्रकार तैयार की गईं कि वास्तविक प्रतिस्पर्धी स्वतः अपात्र हो जाएं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
जांच के दायरे में आई वस्तुओं में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, बेडशीट और लिनेन सामग्री, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन, ओआरएस, सर्जिकल उपभोग्य सामग्री और विभिन्न दवाइयाँ शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन सभी की खरीद बाज़ार दर से अधिक कीमतों पर की गई।
दोनों आरोपियों की कथित भूमिका
एसीबी के अनुसार, खरीद प्रस्तावों की मंजूरी, निविदा विनिर्देशों का अनुमोदन, खरीद समितियों का गठन और खरीद पद्धति से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय विभिन्न स्तरों पर स्वीकृत किए गए थे। बड़ी राशि वाले खरीद प्रस्ताव सीपीए की अकाउंट्स शाखा के माध्यम से संसाधित हुए, जबकि बिलों की जांच और भुगतान की प्रक्रिया डीसीए कार्यालय के जरिए पूरी की गई — यही वह कड़ी है जो चोपड़ा को इस मामले से जोड़ती है।
न्यायिक कार्यवाही और आगे की जांच
एसीबी ने अदालत से एक दिन की पुलिस रिमांड की माँग की है। जांच एजेंसी का कहना है कि रिमांड के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए जाएंगे, लापता खरीद रिकॉर्ड का पता लगाया जाएगा, अन्य लाभार्थियों और सह-साजिशकर्ताओं की पहचान की जाएगी तथा धन के प्रवाह की जांच कर व्यापक साजिश का खुलासा किया जाएगा। एसीबी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना है।