नोएडा में लव जिहाद मामले पर पुलिस की लापरवाही, डीसीपी से मांगा गया स्पष्टीकरण

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नोएडा में लव जिहाद मामले पर पुलिस की लापरवाही, डीसीपी से मांगा गया स्पष्टीकरण

सारांश

ग्रेटर नोएडा में लव जिहाद से जुड़े मामले में पुलिस की लापरवाही ने उठाए कई सवाल। कमिश्नरेट ने कार्रवाई करते हुए दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया और डीसीपी से स्पष्टीकरण मांगा। क्या यह प्रशासन की सख्ती का संकेत है?

मुख्य बातें

लव जिहाद मामले में पुलिस की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की गई।
दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया।
डीसीपी से स्पष्टीकरण मांगा गया।
हिंदू संगठनों का प्रदर्शन और कड़ी कार्रवाई की मांग।
प्रशासन ने संदेश दिया कि कानून-व्यवस्था में लापरवाही नहीं सहेगी।

ग्रेटर नोएडा, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नोएडा में लव जिहाद से संबंधित एक मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही उजागर होने पर कमिश्नरेट स्तर पर कठोर कार्रवाई की गई है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाया है। इस कार्रवाई के तहत जांच के आदेश दिए गए हैं और लापरवाही करने वाले दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।

जानकारी के अनुसार, 17 मार्च 2026 को थाना फेस-3 में एक महिला ने मामला दर्ज कराया था। इस मामले में एफआईआर तो दर्ज की गई थी, लेकिन जांच के दौरान यह पाया गया कि कई महत्वपूर्ण धाराएं शामिल नहीं की गई थीं, जो इस प्रकरण की गंभीरता को दर्शाने के लिए आवश्यक थीं। विशेष रूप से, उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 5(3) और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) को एफआईआर में शामिल नहीं किया गया था।

इन धाराओं का समावेश न करने को पुलिस प्रशासन ने गंभीर लापरवाही माना है। इसके चलते डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही, एसीपी-1 सेंट्रल नोएडा उमेश यादव को इस मामले की प्रारंभिक जांच के आदेश दिए गए हैं। थाना फेस-3 के प्रभारी पुनीत कुमार और मामले की विवेचक उपनिरीक्षक प्रीति गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

निलंबित अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए उचित धाराओं को शामिल नहीं किया। पूरे मामले की विस्तृत जांच अब एडीसीपी नोएडा को सौंपी गई है, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता की पूरी तरह से जांच हो सके और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

इस मामले को लेकर हिंदू संगठनों में भी काफी आक्रोश देखा गया। संगठनों के कार्यकर्ताओं ने थाना फेस-3 का घेराव कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस कमिश्नरेट की इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह संदेश दिया गया है कि कानून-व्यवस्था के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह आवश्यक है कि प्रशासन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस मामले में क्या कार्रवाई की गई?
इस मामले में दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है और डीसीपी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
क्यों हुई पुलिस की लापरवाही?
पुलिस ने एफआईआर में आवश्यक धाराएं शामिल नहीं की थीं, जो मामले की गंभीरता को समझने में महत्वपूर्ण थीं।
हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया क्या थी?
हिंदू संगठनों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
क्या यह मामला प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है?
जी हाँ, यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि प्रशासन कानून-व्यवस्था के मामलों में लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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