क्या केरल में महिला पुलिसकर्मी से दुष्कर्म के आरोप में पुलिसकर्मी को निलंबित किया गया?
सारांश
Key Takeaways
- महिला पुलिसकर्मी के साथ दुष्कर्म का आरोप गंभीर है।
- निलंबन के बाद पुलिस विभाग में चिंता का माहौल।
- दुष्कर्म के मामलों में 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई जाती है।
- आरोपी नवास पर गंभीर आरोप हैं।
- महिला कर्मियों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल।
कोल्लम, 17 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। केरल के कोल्लम जिले में एक महिला पुलिसकर्मी के साथ दुष्कर्म के गंभीर आरोपों के बाद केरल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक सिविल पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया है।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि अधिकारी का आचरण पुलिस बल की गरिमा के अनुरूप नहीं था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।
निलंबन की कार्रवाई सिटी पुलिस कमिश्नर द्वारा की गई। निलंबित सिविल पुलिस अधिकारी का नाम नवास बताया गया है, जो घटना के समय नींदाकारा कोस्टल पुलिस स्टेशन में तैनात था।
यह कथित घटना 6 नवंबर को हुई। शिकायत के अनुसार, महिला पुलिस अधिकारी अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद शौचालय से लौट रही थी, तभी आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। यह घटना पुलिस परिसर में हुई, जिससे सुरक्षा, अनुशासन और कार्यस्थल की गरिमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
महिला अधिकारी ने इस मामले में सीधे पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी। इसके बाद चवारा पुलिस स्टेशन में आरोपी नवास के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर मामला उठाया गया, जिसके बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई की।
अधिकारियों का कहना है कि निलंबन का फैसला आरोपों की गंभीरता और पुलिस सेवा की विश्वसनीयता बनाए रखने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया।
पुलिस कमिश्नर ने निलंबन आदेश में कहा कि नवास पर लगाए गए आरोपों से पुलिस बल की छवि को ठेस पहुंची है और वर्दी की गरिमा को नुकसान हुआ है।
आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह सेवा नियमों और पुलिसकर्मियों से अपेक्षित नैतिक मानकों का गंभीर उल्लंघन होगा।
इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस महकमे और नागरिक समाज के बीच चिंता का माहौल है। कई संगठनों ने दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और महिला कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत आंतरिक तंत्र की मांग की है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि दुष्कर्म के मामलों में पुलिस बल की नीति 'जीरो टॉलरेंस' की है। संस्था की गरिमा और विश्वसनीयता को कमजोर करने वाले किसी भी कृत्य से सख्ती से निपटा जाएगा। आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई जांच के नतीजों के आधार पर की जाएगी।