3 अगस्त 2026
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बोकारो नाबालिग लापता मामला: झारखंड हाईकोर्ट ने सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक को तलब किया

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बोकारो नाबालिग लापता मामला: झारखंड हाईकोर्ट ने सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक को तलब किया

सारांश

बोकारो से अक्टूबर 2020 में लापता नाबालिग का पाँच साल बाद भी कोई सुराग नहीं। झारखंड हाईकोर्ट ने जांच की सुस्त रफ्तार पर नाराज़गी जताते हुए सीआईडी एडीजी को सीधे तलब किया। अब सवाल यह है — जांच सीआईडी के पास रहेगी या सीबीआई को सौंपी जाएगी?

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 9 जून 2026 को सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक को बोकारो नाबालिग लापता मामले में तलब किया।
नाबालिग अक्टूबर 2020 से लापता है — पाँच साल से अधिक समय में कोई सुराग नहीं मिला।
जांच अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में सीआईडी को सौंपी गई; 5 मई 2026 को औपचारिक मामला दर्ज हुआ।
लड़की की माँ उषा झा ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की है।
राज्य सरकार मामला सीबीआई को सौंपने की संभावना पर परामर्श करना चाहती है।
अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित।

झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो जिले से अक्टूबर 2020 से लापता नाबालिग के मामले में जांच की सुस्त रफ्तार पर कड़ा रुख अपनाते हुए मंगलवार, 9 जून 2026 को सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) मनोज कौशिक को सशरीर अदालत में तलब किया। पाँच साल से अधिक समय बीतने के बाद भी नाबालिग का कोई सुराग न मिलने पर अदालत ने जांच एजेंसी से सीधे जवाब माँगा।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान एडीजी मनोज कौशिक से पूछा कि अब तक की जांच में क्या ठोस परिणाम सामने आए हैं। एडीजी ने अदालत को बताया कि वे स्वयं मामले की निगरानी कर रहे हैं और सीआईडी की टीम जांच को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पड़ताल जारी है।

याचिका और पृष्ठभूमि

लापता नाबालिग की माँ उषा झा ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विन्सेंट मार्की ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में इस मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई और 5 मई 2026 को औपचारिक रूप से मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। इससे पहले यह मामला पिंड्राजोड़ा थाने में दर्ज था।

सोमवार की सुनवाई और सीबीआई का सवाल

सोमवार को हुई सुनवाई में सीआईडी और पिंड्राजोड़ा थाने के अनुसंधानकर्ता अदालत में उपस्थित हुए थे। अदालत ने उपस्थित सीआईडी इंस्पेक्टर से जांच की स्थिति जाननी चाही थी। इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि सरकार मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपे जाने की संभावना पर आवश्यक परामर्श करना चाहती है। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीबीआई जांच पर कोई निर्णय लेने से पहले सीआईडी के शीर्ष अधिकारी को तलब करना उचित समझा।

अदालत का रुख और अगली सुनवाई

अदालत ने जांच की प्रगति पर खुला असंतोष जताया है। यह ऐसे समय में आया है जब मामले को पाँच वर्ष से अधिक हो चुके हैं और नाबालिग का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। गौरतलब है कि जांच केवल अप्रैल 2026 में सीआईडी को सौंपी गई — यानी लापता होने के करीब साढ़े पाँच साल बाद। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।

आगे क्या होगा

अदालत की सख्ती के बाद अब सवाल यह है कि क्या जांच सीआईडी के पास रहेगी या सीबीआई को सौंपी जाएगी। राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले इस पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा। परिजनों को उम्मीद है कि न्यायिक दबाव से जांच में तेज़ी आएगी और नाबालिग का पता चलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और औपचारिक मामला दर्ज होने में और महीने लगे। अदालत का हस्तक्षेप ज़रूरी था, लेकिन सवाल यह है कि न्यायिक दबाव के बिना क्या यह जांच कभी गंभीरता से होती? सीबीआई को सौंपने की 'संभावना' पर परामर्श की बात भी देरी की एक और परत जोड़ती है। जब तक जांच एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, ऐसे मामलों में न्याय केवल अदालती सक्रियता पर निर्भर रहेगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बोकारो नाबालिग लापता मामला क्या है?
बोकारो जिले से एक नाबालिग अक्टूबर 2020 से लापता है और अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। लड़की की माँ उषा झा ने झारखंड हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की है।
झारखंड हाईकोर्ट ने सीआईडी एडीजी को क्यों तलब किया?
अदालत ने जांच की धीमी प्रगति पर असंतोष जताते हुए सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक को तलब किया। पाँच साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई ठोस परिणाम न मिलने पर न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सीधे जवाब माँगा।
इस मामले की जांच सीआईडी को कब सौंपी गई?
राज्य सरकार के अनुसार, अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में जांच सीआईडी को सौंपी गई और 5 मई 2026 को औपचारिक रूप से मामला दर्ज कर जांच शुरू हुई। इससे पहले मामला पिंड्राजोड़ा थाने में दर्ज था।
क्या यह मामला सीबीआई को सौंपा जाएगा?
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकार मामला सीबीआई को सौंपे जाने की संभावना पर परामर्श करना चाहती है। अदालत ने इस पर अंतिम निर्णय से पहले सीआईडी के शीर्ष अधिकारी से स्थिति जानना उचित समझा।
मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
झारखंड हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है। तब तक राज्य सरकार को सीबीआई जांच पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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