बोकारो नाबालिग लापता मामला: झारखंड हाईकोर्ट ने सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक को तलब किया
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो जिले से अक्टूबर 2020 से लापता नाबालिग के मामले में जांच की सुस्त रफ्तार पर कड़ा रुख अपनाते हुए मंगलवार, 9 जून 2026 को सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) मनोज कौशिक को सशरीर अदालत में तलब किया। पाँच साल से अधिक समय बीतने के बाद भी नाबालिग का कोई सुराग न मिलने पर अदालत ने जांच एजेंसी से सीधे जवाब माँगा।
मुख्य घटनाक्रम
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान एडीजी मनोज कौशिक से पूछा कि अब तक की जांच में क्या ठोस परिणाम सामने आए हैं। एडीजी ने अदालत को बताया कि वे स्वयं मामले की निगरानी कर रहे हैं और सीआईडी की टीम जांच को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पड़ताल जारी है।
याचिका और पृष्ठभूमि
लापता नाबालिग की माँ उषा झा ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विन्सेंट मार्की ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में इस मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई और 5 मई 2026 को औपचारिक रूप से मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। इससे पहले यह मामला पिंड्राजोड़ा थाने में दर्ज था।
सोमवार की सुनवाई और सीबीआई का सवाल
सोमवार को हुई सुनवाई में सीआईडी और पिंड्राजोड़ा थाने के अनुसंधानकर्ता अदालत में उपस्थित हुए थे। अदालत ने उपस्थित सीआईडी इंस्पेक्टर से जांच की स्थिति जाननी चाही थी। इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि सरकार मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपे जाने की संभावना पर आवश्यक परामर्श करना चाहती है। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीबीआई जांच पर कोई निर्णय लेने से पहले सीआईडी के शीर्ष अधिकारी को तलब करना उचित समझा।
अदालत का रुख और अगली सुनवाई
अदालत ने जांच की प्रगति पर खुला असंतोष जताया है। यह ऐसे समय में आया है जब मामले को पाँच वर्ष से अधिक हो चुके हैं और नाबालिग का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। गौरतलब है कि जांच केवल अप्रैल 2026 में सीआईडी को सौंपी गई — यानी लापता होने के करीब साढ़े पाँच साल बाद। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।
आगे क्या होगा
अदालत की सख्ती के बाद अब सवाल यह है कि क्या जांच सीआईडी के पास रहेगी या सीबीआई को सौंपी जाएगी। राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले इस पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा। परिजनों को उम्मीद है कि न्यायिक दबाव से जांच में तेज़ी आएगी और नाबालिग का पता चलेगा।