बोकारो से 6 साल पहले लापता 14 वर्षीय नाबालिग मामले में CBI जांच शुरू, झारखंड हाई कोर्ट का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र से 16 अक्टूबर 2020 को लापता हुई 14 वर्षीय नाबालिग लड़की के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अज्ञात अभियुक्तों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू कर दी है। झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर CBI की रांची इकाई ने यह कदम उठाया है। मामले में मानव तस्करी की आशंका और अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी जांच की जाएगी।
मामले का पूरा घटनाक्रम
लड़की 16 अक्टूबर 2020 को ट्यूशन पढ़ने के लिए घर से निकली थी और उसके बाद वापस नहीं लौटी। परिजनों की शिकायत पर उसी दिन पिंड्राजोरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। प्रारंभिक जांच बोकारो पुलिस ने की, लेकिन कई स्तरों पर तलाश के बावजूद कोई ठोस सुराग नहीं मिला। जांच के दौरान तीन संदिग्धों का नार्को टेस्ट भी कराया गया, जो निर्णायक साबित नहीं हुआ।
हाई कोर्ट में याचिका और जांच का हस्तांतरण
पुलिस जांच में सफलता न मिलने के बाद लड़की की माँ ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की जांच सीआईडी (CID) को सौंपी जा चुकी है। सीआईडी ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर जांच आगे बढ़ाई और अदालत को प्रगति रिपोर्ट भी सौंपी। उस रिपोर्ट में लापता होने की घटना के पीछे मानव तस्करी की आशंका जताई गई और मामले को अंतरराज्यीय बताया गया।
सीआईडी ने तकनीकी संसाधनों की सीमाओं और जांच से जुड़ी दिक्कतों का हवाला देते हुए आगे की जांच में असमर्थता जताई। इसके बाद हाई कोर्ट ने CBI और राज्य सरकार दोनों से जांच हस्तांतरण पर राय माँगी। CBI ने जांच की सहमति दी और राज्य सरकार ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई।
हाई कोर्ट का निर्देश और CBI की भूमिका
दोनों पक्षों की सहमति के बाद झारखंड हाई कोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया। अदालत ने सीआईडी के एडीजी को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड CBI के रांची स्थित ईस्टर्न जोन के संयुक्त निदेशक को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने CBI निदेशक को जांच की उचित निगरानी और नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के लिए 27 अक्टूबर तक हलफनामे के माध्यम से प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा है।
आगे क्या होगा जांच में
CBI अब बोकारो पुलिस और सीआईडी की पूर्व जांच से प्राप्त सभी रिकॉर्ड की समीक्षा करेगी और पुराने सुरागों की नए सिरे से पड़ताल करेगी। अंतरराज्यीय कनेक्शन, मानव तस्करी की आशंका और उपलब्ध डिजिटल एवं तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी। गौरतलब है कि यह मामला करीब छह वर्षों से अनसुलझा है और लड़की की माँ तब से न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं।
परिवार की उम्मीद
करीब छह साल से बेटी की तलाश कर रहे परिवार के लिए CBI जांच एक नई उम्मीद लेकर आई है। यह ऐसे समय में आया है जब मानव तस्करी के अंतरराज्यीय मामलों में केंद्रीय एजेंसी की भूमिका को अधिक प्रभावी माना जाता है। अब परिवार को उम्मीद है कि CBI की व्यापक जांच क्षमता और तकनीकी संसाधनों से मामले में ठोस सुराग मिलेंगे।