27 जुलाई 2026
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बोकारो की लापता किशोरी केस: झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई एसपी को किया तलब, 6 साल बाद भी सुराग नहीं

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बोकारो की लापता किशोरी केस: झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई एसपी को किया तलब, 6 साल बाद भी सुराग नहीं

सारांश

बोकारो की 14 वर्षीय किशोरी 2020 से लापता है — और 6 साल बाद भी कोई ठोस सुराग नहीं। झारखंड हाईकोर्ट ने जांच की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए सीबीआई एसपी को सीधे तलब किया है। ई-केवाईसी में 90% चेहरा मिलान हुआ, फिर भी पुष्टि नहीं — यही इस मामले की त्रासदी है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 27 जुलाई 2026 को सीबीआई एसपी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया।
बोकारो के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र की 14 वर्षीय किशोरी 16 अक्टूबर 2020 से लापता है।
घटनास्थल से किशोरी की साइकिल, चप्पल और किताबें बरामद हुई थीं; मामला अपहरण के रूप में दर्ज।
बिहार के गोपालगंज में ई-केवाईसी मिलान में एक बच्ची का चेहरा 90% मेल खाया, लेकिन अंगूठे के निशान न मिलने से पुष्टि नहीं हुई।
अगली सुनवाई मंगलवार दोपहर 2:15 बजे ; न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ करेगी सुनवाई।

झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो जिले की एक 14 वर्षीय किशोरी के 6 वर्षों से लापता होने के मामले में जांच की सुस्त रफ्तार पर कड़ा रुख अपनाते हुए सीबीआई के एसपी को 27 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने यह निर्देश उपलब्ध तथ्यों और जांच की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के बाद जारी किया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र का है। किशोरी 16 अक्टूबर 2020 से लापता है। घटनास्थल के निकट उसकी साइकिल, चप्पल और किताबें बरामद हुई थीं। प्राथमिकी की सुपरविजन रिपोर्ट में इसे अपहरण का मामला माना गया था। वर्षों तक कोई ठोस सुराग न मिलने पर परिजनों ने झारखंड हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की।

अदालत की सख्ती और सीबीआई की भूमिका

इससे पहले 2 जुलाई को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले में प्रतिवादी बनाते हुए जांच में शामिल होने का निर्देश दिया था। अदालत ने सीबीआई और सीआईडी को आपसी समन्वय से जांच आगे बढ़ाने और सीबीआई की तकनीकी विशेषज्ञता व संसाधनों का उपयोग करने को कहा था। खंडपीठ ने यह भी जानना चाहा कि 6 वर्ष बीत जाने के बावजूद किशोरी का पता क्यों नहीं चल सका और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

ई-केवाईसी मिलान का सुराग, पर पुष्टि नहीं

सुनवाई के दौरान सीआईडी ने अदालत को बताया कि ई-केवाईसी मिलान के दौरान बिहार के गोपालगंज में एक बच्ची का चेहरा लापता किशोरी से करीब 90 प्रतिशत तक मेल खाता मिला था। हालाँकि, अंगूठे के निशान और अन्य पहचान संबंधी विवरण मेल न खाने के कारण उसकी पुष्टि नहीं हो सकी। यह तथ्य जांच में एक अहम लेकिन अधूरे सुराग के रूप में सामने आया है।

अगली सुनवाई और आगे की राह

मामले की अगली सुनवाई मंगलवार दोपहर 2:15 बजे निर्धारित है, जिसमें सीबीआई एसपी को स्वयं उपस्थित होकर जांच की प्रगति और आगे की कार्ययोजना अदालत के समक्ष रखनी होगी। यह ऐसे समय में आया है जब हाईकोर्ट पहले भी जांच में हो रही देरी पर चिंता जता चुका है। अदालत की बढ़ती सख्ती यह संकेत देती है कि न्यायपालिका इस मामले में जांच एजेंसियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जांच एजेंसियों की कार्यक्षमता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। ई-केवाईसी में 90% चेहरा मिलान एक अहम तकनीकी सुराग था — लेकिन अंगूठे के निशान न मिलने पर मामला ठंडे बस्ते में चला गया, जो दर्शाता है कि एजेंसियाँ आंशिक साक्ष्यों पर आगे बढ़ने में असमर्थ रहीं। हाईकोर्ट का एसपी को सीधे तलब करना इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका को जांच की रिपोर्टों पर भरोसा नहीं रह गया। यह मामला उन तमाम लापता बच्चों के मामलों की प्रतीकात्मक तस्वीर है जहाँ परिजनों को न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बोकारो की लापता किशोरी का मामला क्या है?
बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र की एक 14 वर्षीय किशोरी 16 अक्टूबर 2020 से लापता है। घटनास्थल से उसकी साइकिल, चप्पल और किताबें बरामद हुई थीं और मामले को अपहरण के रूप में दर्ज किया गया था।
झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई एसपी को क्यों तलब किया?
हाईकोर्ट ने 6 वर्षों में जांच की धीमी प्रगति और ठोस नतीजे न मिलने पर गंभीर नाराजगी जताते हुए सीबीआई एसपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जांच की प्रगति और आगे की कार्ययोजना बताने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने यह निर्देश 27 जुलाई 2026 को दिया।
ई-केवाईसी मिलान से क्या सुराग मिला था?
सीआईडी ने अदालत को बताया कि बिहार के गोपालगंज में एक बच्ची का चेहरा लापता किशोरी से करीब 90 प्रतिशत तक मेल खाता मिला था। हालाँकि, अंगूठे के निशान और अन्य पहचान संबंधी विवरण मेल न खाने के कारण उसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
इस मामले में सीबीआई कब से शामिल हुई?
2 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले में प्रतिवादी बनाते हुए जांच में शामिल होने का निर्देश दिया था। अदालत ने सीबीआई और सीआईडी को आपसी समन्वय से जांच आगे बढ़ाने को कहा था।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई मंगलवार दोपहर 2:15 बजे निर्धारित है, जिसमें सीबीआई एसपी को स्वयं उपस्थित होकर जांच की ताज़ा स्थिति और आगे की कार्ययोजना अदालत के सामने रखनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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