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झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो की लापता किशोरी मामले में सीबीआई को पक्षकार बनाया, सीआईडी संग समन्वित जांच का आदेश

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झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो की लापता किशोरी मामले में सीबीआई को पक्षकार बनाया, सीआईडी संग समन्वित जांच का आदेश

सारांश

बोकारो से 2020 में लापता हुई किशोरी का मामला अब केंद्र और राज्य दोनों एजेंसियों की संयुक्त जांच के दायरे में आ गया है। झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई को पक्षकार बनाया और जीएआईटी सॉफ्टवेयर से पहचान की पुष्टि का निर्देश दिया — गोपालगंज में 90% चेहरा मिलान एकमात्र अहम सुराग है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 2 जुलाई को सीबीआई को बोकारो की लापता किशोरी मामले में औपचारिक पक्षकार बनाया।
किशोरी 16 अक्टूबर 2020 से लापता है; घटनास्थल पर उसकी साइकिल, चप्पल और किताबें मिली थीं।
बिहार के गोपालगंज में ई-केवाईसी मिलान में एक बच्ची का चेहरा लापता किशोरी से 90% तक मेल खाया, लेकिन अंगूठे के निशान मेल नहीं खाए।
अदालत ने जांच में जीएआईटी सॉफ्टवेयर के उपयोग का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित है।

झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो जिले से 6 वर्षों से लापता एक नाबालिग लड़की के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को औपचारिक रूप से पक्षकार (प्रतिवादी) बनाते हुए उसे जांच में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया है। गुरुवार, 2 जुलाई को हुई सुनवाई में अदालत ने सीबीआई और राज्य की अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) को आपसी समन्वय के साथ जांच आगे बढ़ाने को कहा। किशोरी 16 अक्टूबर 2020 से लापता है और अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र का है। तब 14 वर्षीया किशोरी 16 अक्टूबर 2020 को अचानक गायब हो गई थी। घटनास्थल के निकट उसकी साइकिल, चप्पल और किताबें बरामद हुई थीं। प्राथमिकी की सुपरविजन रिपोर्ट में इसे अपहरण का मामला माना गया था। लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिलने पर किशोरी की माँ उषा झा ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दायर की।

अदालत का आदेश और खंडपीठ की टिप्पणी

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल प्रशांत पल्लव को सूचित करते हुए सीबीआई को मामले में पक्षकार बनाया। अदालत ने सीबीआई को अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधनों के माध्यम से सीआईडी की जांच में सहयोग देने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि सीआईडी को जांच सौंपे जाने के बावजूद अब तक की जांच काफी हद तक राज्य पुलिस के पहले किए गए अनुसंधान तक ही सीमित रही है।

गोपालगंज में मिला 90% मिलान का सुराग

सुनवाई के दौरान सीआईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि ई-केवाईसी मिलान के क्रम में बिहार के गोपालगंज में एक बच्ची का चेहरा लापता किशोरी से लगभग 90 प्रतिशत तक मेल खाता पाया गया है। हालांकि, अंगूठे के निशान और अन्य पहचान संबंधी विवरण मेल नहीं खाने के कारण उसकी पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी। इस पर अदालत ने वैज्ञानिक तकनीक के अधिक प्रभावी उपयोग पर ज़ोर देते हुए जांच में जीएआईटी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का निर्देश दिया और पुणे के एक मामले का संदर्भ भी दिया।

सुनवाई में उपस्थित पक्ष

गुरुवार की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य राय उपस्थित हुए, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विसेंट रोहित मार्की और रितु नंदा ने पक्ष रखा। अदालत में सीआईडी के एडीजी समेत विशेष जांच दल (एसआईटी) के अधिकारी भी मौजूद थे।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित है। अदालत के निर्देश के अनुसार सीबीआई और सीआईडी को मिलकर जांच को नई दिशा देनी होगी। जीएआईटी सॉफ्टवेयर और अन्य उन्नत तकनीकी माध्यमों के उपयोग से गोपालगंज में मिले सुराग की पड़ताल की जाएगी, ताकि 6 साल से लापता किशोरी का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सवाल उठता है कि क्या एजेंसी बदलने मात्र से परिणाम बदलेंगे। गोपालगंज में 90% चेहरा मिलान एक उम्मीद की किरण है, लेकिन बायोमेट्रिक असंगति दर्शाती है कि तकनीकी जांच अभी भी अधूरी और असंगठित रही है। जीएआईटी सॉफ्टवेयर और सीबीआई की विशेषज्ञता का समन्वय तब ही सार्थक होगा जब जवाबदेही तय हो और 27 जुलाई की सुनवाई में ठोस प्रगति रिपोर्ट पेश की जाए।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई को इस मामले में क्यों शामिल किया?
अदालत ने पाया कि सीआईडी की जांच काफी हद तक राज्य पुलिस के पुराने अनुसंधान तक सीमित रही है। इसलिए खंडपीठ ने सीबीआई की तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधनों का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए उसे पक्षकार बनाया।
बोकारो की लापता किशोरी कब से गायब है और मामले में क्या सुराग मिले हैं?
किशोरी 16 अक्टूबर 2020 से लापता है। घटनास्थल के पास उसकी साइकिल, चप्पल और किताबें बरामद हुई थीं। हाल ही में बिहार के गोपालगंज में ई-केवाईसी मिलान में एक बच्ची का चेहरा लापता किशोरी से लगभग 90% तक मेल खाया, लेकिन अंगूठे के निशान मेल न खाने से पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी।
जीएआईटी सॉफ्टवेयर क्या है और इसे जांच में क्यों शामिल किया गया?
जीएआईटी (GAIT) एक वैज्ञानिक तकनीक आधारित सॉफ्टवेयर है जो चाल-ढाल और शारीरिक पहचान के विश्लेषण में उपयोग होता है। अदालत ने पुणे के एक मामले का हवाला देते हुए इसे इस जांच में शामिल करने का निर्देश दिया, ताकि बायोमेट्रिक असंगति के बावजूद पहचान की पुष्टि की जा सके।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
झारखंड हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित है। तब तक सीबीआई और सीआईडी को समन्वित जांच की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
इस मामले में याचिका किसने और किस आधार पर दायर की थी?
लापता किशोरी की माँ उषा झा ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दायर की थी। लंबे समय तक कोई ठोस सुराग न मिलने और जांच में प्रगति न होने के कारण परिजनों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
राष्ट्र प्रेस
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