झारखंड हाईकोर्ट की बोकारो पुलिस को कड़ी चेतावनी: 14 वर्षीय लापता बच्ची मामले में सीबीआई जांच का विकल्प खुला

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झारखंड हाईकोर्ट की बोकारो पुलिस को कड़ी चेतावनी: 14 वर्षीय लापता बच्ची मामले में सीबीआई जांच का विकल्प खुला

सारांश

पाँच साल बाद भी बोकारो की 14 वर्षीय लापता बच्ची का कोई सुराग नहीं — और झारखंड हाईकोर्ट का धैर्य अब चुक गया है। अदालत ने सीआईडी को तीन सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है; नाकामी पर सीबीआई जांच का रास्ता खुला है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 15 मई 2025 को बोकारो पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराज़गी जताई।
14 वर्षीय नाबालिग वर्ष 2020 से लापता है; कांड संख्या 161/20 , पिंडराजोड़ा थाना में दर्ज।
सीआईडी को तीन सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया।
सुधार न होने पर सीबीआई और राज्य एजेंसियों को संयुक्त जांच सौंपने की चेतावनी।
अगली सुनवाई 8 जून को; उसी दिन बोकारो की 18 वर्षीय युवती की गुमशुदगी याचिका पर भी सुनवाई।

झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो से वर्ष 2020 में लापता हुई एक 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची के मामले में पुलिस की निष्क्रियता पर गहरी नाराज़गी जताई है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने शुक्रवार, 15 मई को सुनवाई के दौरान साफ़ कहा कि यदि जांच में सुधार नहीं हुआ, तो अदालत मामला सीबीआई को सौंपने पर विचार करेगी।

मुख्य घटनाक्रम

बोकारो के पिंडराजोड़ा थाने में वर्ष 2020 में कांड संख्या 161/20 दर्ज किया गया था। पुलिस ने चार संदिग्धों को गिरफ़्तार किया, लेकिन बाद में उन्हें रिहा कर दिया। तीन संदिग्धों का नार्को टेस्ट कराने की बात भी कही गई, मगर एक को खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर छोड़ दिया गया। पाँच वर्ष बीत जाने के बाद भी नाबालिग का कोई सुराग नहीं मिला।

अदालत की तल्ख टिप्पणी

खंडपीठ ने मौखिक रूप से कड़े सवाल उठाते हुए पूछा कि जब भी बोकारो में किसी बच्ची या युवती के लापता होने का मामला आता है, पुलिस के हाथ खाली क्यों रह जाते हैं। अदालत ने बोकारो के पूर्व और वर्तमान एसपी तथा संबंधित डीएसपी की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस स्वयं इसे अपहरण का मामला मान रही थी, फिर भी उस दिशा में ठोस अनुसंधान नहीं किया गया।

सीआईडी को तीन सप्ताह का समय

अदालत ने जांच को असंतोषजनक पाते हुए सीआईडी को तीन सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट के अनुसार, बोकारो पुलिस ने अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अप्रैल 2026 में जल्दबाज़ी में मामला सीआईडी को स्थानांतरित कर दिया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि सीआईडी की जांच में भी सुधार नहीं दिखा, तो राज्य की जांच एजेंसियों और सीबीआई को संयुक्त रूप से जांच सौंपी जा सकती है।

पीड़ित परिवार की पीड़ा

नाबालिग की माँ ने पाँच साल की थका देने वाली प्रतीक्षा के बाद झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की। प्रार्थी के अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की ने अदालत को बताया कि इतने वर्षों बाद भी बच्ची का कोई पता नहीं चला है।

आगे क्या होगा

इस मामले की अगली सुनवाई 8 जून को निर्धारित है। उसी दिन बोकारो की एक अन्य 18 वर्षीय युवती के लापता होने से संबंधित याचिका पर भी सुनवाई होनी है, जो यह दर्शाता है कि बोकारो में नाबालिगों की गुमशुदगी एक व्यापक और गंभीर समस्या बनती जा रही है। अदालत का सख्त रुख इस मामले में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संरचनागत विफलता का संकेत है। अदालत की सीबीआई चेतावनी तब तक प्रभावी नहीं होगी जब तक राज्य सरकार पुलिस में जवाबदेही का ढाँचा नहीं बनाती — केवल जांच एजेंसी बदलने से नतीजे नहीं बदलते।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो पुलिस पर क्यों नाराज़गी जताई?
वर्ष 2020 से लापता 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची के मामले में पाँच साल बाद भी कोई ठोस नतीजा न निकलने पर हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि पुलिस ने स्वयं इसे अपहरण माना, फिर भी उस दिशा में अनुसंधान नहीं किया।
सीआईडी को क्या निर्देश दिया गया है?
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने सीआईडी को तीन सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। संतोषजनक रिपोर्ट न मिलने पर सीबीआई जांच का विकल्प खुला रखा गया है।
बोकारो की लापता नाबालिग का मामला क्या है?
वर्ष 2020 में बोकारो के पिंडराजोड़ा थाने में कांड संख्या 161/20 दर्ज हुई थी। पुलिस ने चार संदिग्धों को पकड़ा, लेकिन बाद में सभी को छोड़ दिया गया। नाबालिग की माँ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
क्या इस मामले में सीबीआई जांच तय हो गई है?
अभी सीबीआई जांच तय नहीं हुई है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि सीआईडी की जांच में सुधार नहीं दिखा, तो राज्य एजेंसियों और सीबीआई को संयुक्त रूप से जांच सौंपी जा सकती है। अगली सुनवाई 8 जून को होगी।
इस मामले की अगली सुनवाई कब है?
अगली सुनवाई 8 जून को निर्धारित है। उसी दिन बोकारो की एक अन्य 18 वर्षीय युवती की गुमशुदगी से संबंधित याचिका पर भी सुनवाई होनी है।
राष्ट्र प्रेस
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