बोकारो की युवती की गुमशुदगी: मुख्य आरोपी का होगा नार्को टेस्ट, झारखंड हाई कोर्ट ने दिया आदेश

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बोकारो की युवती की गुमशुदगी: मुख्य आरोपी का होगा नार्को टेस्ट, झारखंड हाई कोर्ट ने दिया आदेश

सारांश

झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो में लापता 18 वर्षीय युवती के मामले में सख्त रुख अपनाया है। मुख्य आरोपी दिनेश महतो का नार्को टेस्ट कराने का आदेश दिया गया है, जिससे मामले की जटिलता बढ़ गई है।

Key Takeaways

  • बोकारो की युवती की गुमशुदगी का मामला गंभीर है।
  • मुख्य आरोपी का नार्को टेस्ट होगा।
  • पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं।
  • अदालत ने देरी को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है।
  • यह मामला न्याय प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को उजागर करता है।

रांची, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो की एक 18 वर्षीय युवती के पिछले आठ महीनों से लापता होने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य आरोपी दिनेश महतो का दो सप्ताह के भीतर 'नार्को टेस्ट' कराने का आदेश दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई में नार्को टेस्ट की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत की जाए। सुनवाई के दौरान बोकारो एसपी केस डायरी और लोअर कोर्ट रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहे, जिन्हें जांच में सुस्ती और प्रक्रियात्मक खामियों को लेकर हाई कोर्ट की कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा।

अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने में हुई 10 दिनों की देरी पर नाराजगी जाहिर की। रिकॉर्ड के अनुसार, युवती 27 जुलाई 2025 को लापता हुई थी और उसी दिन सनहा दर्ज कराया गया था, लेकिन पुलिस ने 4 अगस्त 2025 को प्राथमिकी दर्ज की। इस 'ढुलमुल' रवैये पर सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो एसपी ने अदालत को बताया कि इस लापरवाही के लिए पिंडराजोड़ा थाना प्रभारी को 'कारण बताओ' (शो कॉज) नोटिस जारी कर दिया गया है। प्रार्थी लापता युवती की मां की ओर से अधिवक्ता विंसेंट रोहित मार्की, शांतनु गुप्ता और ऋतुल नंदा ने पक्ष रखते हुए पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

यह मामला तब और पेचीदा हो गया जब अदालत को बताया गया कि दिसंबर 2025 में युवती के पुणे में होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने एक संदिग्ध लोकनाथ महतो को पकड़ा था, जो पुलिस टीम को चकमा देकर ट्रेन से फरार हो गया।

खंडपीठ ने वर्ष 2020 के एक पुराने मामले का हवाला देते हुए पुलिस को चेताया कि पहले भी बोकारो में गुमशुदगी के साल भर बाद युवती की हत्या की बात सामने आई थी, इसलिए ऐसी संवेदनशीलता की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने पूर्व में इस केस को सीबीआई को सौंपने तक की चेतावनी दी थी।

Point of View

बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्याय प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। कोर्ट के सख्त रुख से यह स्पष्ट होता है कि कानून को सख्ती से लागू करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में लापरवाही न हो।
NationPress
24/03/2026

Frequently Asked Questions

बोकारो की युवती कब लापता हुई थी?
युवती 27 जुलाई 2025 को लापता हुई थी।
नार्को टेस्ट क्या होता है?
नार्को टेस्ट एक वैज्ञानिक परीक्षण है, जिसमें आरोपी को सच बोलने के लिए दवा का उपयोग किया जाता है।
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर क्या सवाल उठाए गए हैं?
पुलिस की कार्यप्रणाली में देरी और सुस्ती को लेकर अदालत ने कड़ी फटकार लगाई है।
क्या उच्च न्यायालय ने पहले भी ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई की है?
हाँ, उच्च न्यायालय ने पहले भी गुमशुदगी के मामलों में सख्त रुख अपनाया है और सीबीआई जांच की चेतावनी दी है।
इस मामले में अगला कदम क्या होगा?
अगली सुनवाई में नार्को टेस्ट की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
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