झारखंड हाईकोर्ट ने पुष्पा महतो मामले में नरकंकाल DNA जांच की देरी पर सरकार से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाईकोर्ट ने 8 जून 2026 को बोकारो जिले की लापता 18 वर्षीय छात्रा पुष्पा कुमारी महतो के मामले में बरामद नरकंकाल की DNA जांच में हो रही अनावश्यक देरी पर गहरी चिंता जताते हुए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण माँगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया में किसी भी विलंब का ठोस और दस्तावेज़ी कारण रिकॉर्ड पर लाया जाना अनिवार्य है।
अदालत में क्या हुआ
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की। केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने खंडपीठ को बताया कि पुलिस द्वारा बरामद और पुष्पा महतो का कथित नरकंकाल अब तक DNA परीक्षण से नहीं गुज़रा है। अधिवक्ता के अनुसार, कंकाल को रांची स्थित रिम्स (RIMS) भेजे जाने की प्रक्रिया में एक रासायनिक पदार्थ का उपयोग किया गया था, जिसके कारण वैज्ञानिक परीक्षण बाधित हो गया।
रासायनिक पदार्थ पर अदालत का सवाल
खंडपीठ ने इस खुलासे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जानना चाहा कि कंकाल में वह रासायनिक पदार्थ किन परिस्थितियों में और किस उद्देश्य से मिलाया गया। यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मृतका के परिजन और याचिकाकर्ता पक्ष पहले ही आशंका जता चुके हैं कि बरामद कंकाल पुष्पा का नहीं हो सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि देरी का हर कारण अभिलेख पर दर्ज होना चाहिए।
अधिकारियों की उपस्थिति और अगले कदम
सुनवाई के दौरान बोकारो प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी), बोकारो के पुलिस अधीक्षक (एसपी) तथा मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के प्रमुख अदालत में उपस्थित रहे। खंडपीठ ने आईजी और एसपी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी, परंतु SIT प्रमुख को अगली तारीख पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित है।
मामले की पृष्ठभूमि
बोकारो जिले की निवासी पुष्पा कुमारी महतो अगस्त 2025 से लापता है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर एक नरकंकाल बरामद किया था। परिजनों और याचिकाकर्ताओं ने शुरू से ही इस कंकाल की पहचान पर सवाल उठाए हैं। इसी वर्ष अप्रैल में हाईकोर्ट ने DNA परीक्षण का आदेश दिया था और तब से जांच की प्रगति पर नियमित निगरानी रखी जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में लापता महिलाओं के मामलों में जांच की धीमी गति पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। आगे अदालत की सख्त निगरानी में DNA रिपोर्ट प्रस्तुत होना इस मामले की दिशा तय करेगा।