वित्त मंत्रालय का अनुमान: Q2 FY27 में GDP ग्रोथ 7.35%, खपत और औद्योगिक उत्पादन मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्रालय ने 29 अक्टूबर 2026 को जारी अक्टूबर मासिक आर्थिक समीक्षा में अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.35 प्रतिशत रहेगी। मजबूत औद्योगिक उत्पादन, ऊर्जा खपत, पोर्ट ट्रैफिक, GST संग्रह और ऑटोमोबाइल बिक्री इस वृद्धि के मुख्य आधार बताए गए हैं।
नाउकास्टिंग मॉडल क्या कहता है
मंत्रालय की समीक्षा के अनुसार, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में पेश किए गए विभाग के 'नाउकास्टिंग मॉडल' के आधार पर यह अनुमान तैयार किया गया है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में वास्तविक GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी, और दूसरी तिमाही में इसके 7.35 प्रतिशत पर आने का अनुमान एक सौम्य लेकिन टिकाऊ गति का संकेत देता है।
गौरतलब है कि यह अनुमान आधिकारिक GDP आँकड़ा नहीं है — यह एक प्रारंभिक मॉडल-आधारित पूर्वानुमान है जिसे बाद में सांख्यिकी मंत्रालय के आधिकारिक आँकड़ों से सत्यापित किया जाएगा।
औद्योगिक गतिविधि का प्रदर्शन
अगस्त 2026 में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र ने 9 प्रतिशत की बढ़त के साथ अहम भूमिका निभाई। सितंबर 2026 में इंडेक्स ऑफ कोर इंडस्ट्रीज (ICI) में सालाना आधार पर 7.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI सितंबर में 55.1 पर पहुँच गया, जो अगस्त के 52.8 से अधिक है — 50 से ऊपर का स्तर विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार का संकेत देता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर मंदी की आशंकाएँ बनी हुई हैं।
बाह्य क्षेत्र और विदेशी मुद्रा भंडार
सितंबर 2026 में भारत के वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वस्तुओं के निर्यात में विशेष रूप से 23.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग उत्पादों का बड़ा योगदान रहा।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 16 अक्टूबर 2026 तक $721 अरब डॉलर के स्तर पर था, जो बाह्य क्षेत्र की मज़बूत स्थिति को रेखांकित करता है।
वित्तीय क्षेत्र और बैंक ऋण
वैश्विक स्तर पर सॉवरेन बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और इक्विटी बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत के वित्तीय क्षेत्र पर इसका सीमित असर पड़ा। मनी मार्केट में कामकाज सुचारू रहा और बाजार दरें पॉलिसी रेपो रेट के करीब बनी रहीं। ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के जरिए अतिरिक्त नकदी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया गया।
कुल बैंक क्रेडिट ग्रोथ सालाना आधार पर 21.6 प्रतिशत तक पहुँच गई, जो घरेलू माँग में मज़बूती का संकेत है।
आगे की राह: विनिर्माण और महंगाई की चुनौती
समीक्षा में जोर दिया गया कि विनिर्माण आधार को व्यापक बनाने के लिए पैमाने में वृद्धि, घरेलू मूल्य संवर्धन, सप्लाई चेन को मज़बूत करना और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखना अहम होगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि महंगाई के दूसरे दौर के असर को रोकने के लिए हाल में बढ़ाई गई ब्याज दरों का प्रभाव, केंद्रीय बैंक द्वारा नकदी के सक्रिय प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वैश्विक व्यापार अनिश्चितताएँ बनी रहीं, तो निर्यात वृद्धि की यह रफ्तार टिकाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है — लेकिन घरेलू खपत का मज़बूत आधार भारत को एक बफर प्रदान करता है।