वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की GDP वृद्धि दर 7% पर स्थिर, IMF ने अनुमान बढ़ाया
सारांश
मुख्य बातें
वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंकाओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने अपनी रफ्तार बरकरार रखी है। 24 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाज़ारों में अस्थिरता, व्यापारिक अनिश्चितताओं और सख्त वित्तीय परिस्थितियों के बावजूद भारत प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज करने वाला देश बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2026 और 2027 दोनों वर्षों के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है।
वैश्विक संस्थानों का बढ़ता भरोसा
रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख वैश्विक संस्थानों द्वारा भारत की GDP वृद्धि दर के अनुमानों में लगातार ऊपर की ओर संशोधन किया जाना इस बात का संकेत है कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन बन चुका है। IMF के ताज़ा अनुमान से भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति और मज़बूत करता दिखाई दे रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, यूरोप और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि दर के अनुमानों में कटौती की जा रही है। आलोचकों का कहना है कि भारत की यह सापेक्षिक मज़बूती आंशिक रूप से तुलनात्मक आधार प्रभाव का परिणाम है, लेकिन संरचनात्मक सुधारों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।
घरेलू माँग और डिजिटल परिवर्तन की भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत उसका विशाल और विविधतापूर्ण घरेलू बाज़ार है। घरेलू उपभोग, निजी निवेश और बुनियादी ढाँचे पर सार्वजनिक खर्च मिलकर आर्थिक गतिविधियों का व्यापक आधार तैयार करते हैं। यही कारण है कि जब वैश्विक माँग कमज़ोर होती है, तब भी भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर बनी रहती है।
निजी उपभोग ऑटोमोबाइल, आवास, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय सेवाओं जैसे कई क्षेत्रों को गति दे रहा है। बढ़ती आय, शहरीकरण, डिजिटल पहुँच और बेहतर कनेक्टिविटी माँग बढ़ाने के साथ-साथ निवेश एवं नवाचार को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और प्रौद्योगिकी-आधारित सरकारी सेवाओं ने लेन-देन की लागत घटाई है और बाज़ार तक पहुँच को सुलभ बनाया है। इससे छोटे व्यवसायों को भी अपने पारंपरिक भौगोलिक दायरे से बाहर ग्राहकों तक पहुँचने का अवसर मिला है।
बुनियादी ढाँचे और निर्यात का बढ़ता दायरा
परिवहन, लॉजिस्टिक्स, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े बुनियादी ढाँचे में निवेश भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को और बढ़ा रहा है। इससे लागत कम हो रही है, बाज़ारों तक पहुँच का विस्तार हो रहा है और वस्तुओं तथा सेवाओं की आवाजाही अधिक कुशल बन रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026-27 में भारत का निर्यात 1 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच सकता है और 2030 तक इसे 2 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। विनिर्माण क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 9.2 प्रतिशत की मज़बूत वृद्धि दर्ज की है।
प्रतिस्पर्धात्मकता के स्तंभ
रिपोर्ट में निर्यात विविधीकरण, डिजिटल परिवर्तन, राजकोषीय अनुशासन और ऊर्जा सुरक्षा को भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता के प्रमुख स्तंभों के रूप में रेखांकित किया गया है। गौरतलब है कि ये वही क्षेत्र हैं जिनमें नीतिगत सुधारों की गति पिछले कुछ वर्षों में तेज़ हुई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने अपनी मज़बूत घरेलू आर्थिक बुनियाद और सक्रिय नीतिगत प्रबंधन के दम पर वैश्विक अस्थिरता का सफलतापूर्वक सामना किया है। यही अनुकूलन क्षमता और संरचनात्मक मज़बूती आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक विकास की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।