वीबी-जी राम जी योजना में 10.88 करोड़ सक्रिय श्रमिक पंजीकृत, 2026-27 में 2.83 लाख संपत्तियाँ बनीं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार के आँकड़ों के अनुसार, विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) — जिसे वीबी-जी राम जी के नाम से जाना जाता है — ने वित्त वर्ष 2026-27 में कार्यान्वयन के प्रमुख मापदंडों पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इस अवधि में 10.88 करोड़ सक्रिय श्रमिकों का पंजीकरण हुआ और कुल 2.83 लाख ग्रामीण संपत्तियों का सृजन किया गया। यह योजना मनरेगा के स्थान पर वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत लागू की गई है।
मुख्य आँकड़े और उपलब्धियाँ
सरकारी बयान के अनुसार, इस वित्त वर्ष में 31.69 करोड़ से अधिक व्यक्ति-दिवसों का सृजन हुआ। महिलाओं की भागीदारी 61.65 प्रतिशत रही, जो ग्रामीण महिला श्रमशक्ति की सक्रिय भूमिका को दर्शाती है। लगभग 2.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों के 2.81 करोड़ से अधिक श्रमिकों को माँग के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया गया।
वर्तमान में लगभग 97.17 लाख श्रमिकों पर कार्य जारी है। देशभर में 20.16 लाख सक्रिय कार्यस्थल कार्यरत हैं और 73.24 लाख स्वीकृत परियोजनाएँ भविष्य की रोजगार माँग को पूरा करने के लिए उपलब्ध हैं।
ग्राम पंचायतों की भूमिका और डिजिटल ढाँचा
सरकारी बयान में कहा गया है, 'वीबी-जी राम जी रोजगार, सहभागी योजना और ग्रामीण विकास को एक साथ लाता है। वीजीपीपी के माध्यम से, ग्राम पंचायतें स्थानीय जरूरतों की पहचान करती हैं, मौजूदा संपत्तियों का मानचित्रण करती हैं और विकास कार्यों को प्राथमिकता देती हैं।' देशभर में लगभग 2.31 लाख ग्राम पंचायतें सक्रिय रूप से कार्य संपन्न कर रही हैं।
प्रौद्योगिकी और डिजिटल प्रणालियाँ कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कर रही हैं। बयान में यह भी बताया गया कि मनरेगा से वीबी-जी राम जी में परिवर्तन सुचारू और निर्बाध रहा, तथा डिजिटल प्रणालियाँ नए ढाँचे के प्रारंभ से ही कार्यरत थीं।
मजदूरी दरें और लाभ हस्तांतरण
योजना के अंतर्गत मजदूरी दरें ₹300 से ₹450 प्रति दिन के बीच निर्धारित हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में 3.76 करोड़ प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) लेनदेन दर्ज किए गए हैं। अब तक 15.17 करोड़ ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी किए जा चुके हैं।
वैधानिक गारंटी और व्यापक लक्ष्य
वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान करता है — जो मनरेगा के 100 दिनों से अधिक है। यह गारंटी उन सभी ग्रामीण परिवारों को उपलब्ध है जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं। गौरतलब है कि यह ढाँचा रोजगार को सतत परिसंपत्ति सृजन से जोड़ता है, जिससे ग्रामीण आजीविका को दीर्घकालिक आधार मिलता है।
आँकड़ों के अनुसार यह योजना सशक्तिकरण, विकास, अभिसरण और संतृप्ति के चार स्तंभों पर आधारित है। क्रियान्वयन की गति और पारदर्शिता तंत्र की वास्तविक परीक्षा आने वाली तिमाहियों में होगी, जब स्वतंत्र मूल्यांकन रिपोर्टें सामने आएँगी।