वीबी-जी राम जी योजना: ग्रामीण रोजगार 125 दिन, AI निगरानी और साप्ताहिक मजदूरी — भजनलाल शर्मा
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 2 जुलाई 2026 को जयपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) — जिसे संक्षेप में वीबी-जी राम जी कहा जा रहा है — के राज्य स्तरीय शुभारंभ में भाग लिया। शर्मा ने कहा कि यह योजना ग्रामीण विकास में एक नया अध्याय जोड़ेगी और इसमें प्रत्येक पात्र परिवार को सालाना 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी।
राष्ट्रीय शुभारंभ और राज्य स्तरीय कार्यक्रम
योजना का राष्ट्रीय शुभारंभ केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति से किया। राजस्थान में राज्य स्तरीय कार्यक्रम ब्यावर जिले के मसूदा कृषि उपज मंडी से आयोजित हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जनसभा को संबोधित किया।
शर्मा ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप है और भारत का समग्र विकास उसके गाँवों की समृद्धि पर निर्भर है।
मनरेगा की खामियों पर आरोप
मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) पर आरोप लगाया कि खराब योजना और कमज़ोर निगरानी तंत्र के चलते यह योजना अपने निर्धारित लक्ष्य हासिल करने में विफल रही। उन्होंने दावा किया कि पिछली योजना के तहत कई परियोजनाओं से केवल अस्थायी सड़कें, अधूरी जल संरचनाएँ और अनियोजित मिट्टी के काम हुए, जिनका दीर्घकालिक लाभ नगण्य रहा।
शर्मा ने फर्ज़ी नौकरी कार्ड, नकली लाभार्थियों, हेरफेर किए गए उपस्थिति रिकॉर्ड और विलंबित मजदूरी भुगतान जैसी अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक लेखापरीक्षाएँ अक्सर अप्रभावी या महज औपचारिकता बनकर रह जाती थीं।
वीबी-जी राम जी की प्रमुख विशेषताएँ
नई योजना में वार्षिक गारंटीकृत रोजगार को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। कृषि में श्रम की कमी रोकने के लिए राज्य सरकारें बुवाई और कटाई के मौसम में 60 दिनों का कार्य विराम घोषित कर सकती हैं।
योजना जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका सृजन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टिकाऊ संपत्तियों के निर्माण पर केंद्रित होगी। शर्मा ने इसे महज एक रोजगार कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक ग्रामीण विकास पहल बताया।
तकनीकी पारदर्शिता और शिकायत निवारण
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल एप्लिकेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक छह महीने में डिजिटल सामाजिक लेखापरीक्षा अनिवार्य होगी।
एक बहुस्तरीय डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली भी शुरू की गई है, जिसमें निश्चित समयसीमा और जिला लोकपालों की भूमिका तय की गई है। साप्ताहिक मजदूरी भुगतान अनिवार्य होगा और दो सप्ताह से अधिक की देरी पर स्वतः मुआवज़े का प्रावधान रखा गया है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण रोजगार और प्रवासी मजदूरी को लेकर देशभर में बहस तेज़ है। वीबी-जी राम जी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि AI-आधारित निगरानी और डिजिटल लेखापरीक्षा ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है।