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वीबी-जी राम जी योजना: ग्रामीण रोजगार 125 दिन, AI निगरानी और साप्ताहिक मजदूरी — भजनलाल शर्मा

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वीबी-जी राम जी योजना: ग्रामीण रोजगार 125 दिन, AI निगरानी और साप्ताहिक मजदूरी — भजनलाल शर्मा

सारांश

मनरेगा की कथित खामियों को दूर करने का दावा करते हुए वीबी-जी राम जी योजना लॉन्च हुई है — 125 दिन रोजगार, AI निगरानी और साप्ताहिक मजदूरी के साथ। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे 'विकसित भारत' के विज़न से जोड़ा।

मुख्य बातें

वीबी-जी राम जी योजना का राज्य स्तरीय शुभारंभ 2 जुलाई 2026 को हुआ; राष्ट्रीय शुभारंभ शिवराज सिंह चौहान ने तिरुपति से किया।
ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी, जो पहले 100 दिन थी।
बुवाई-कटाई के मौसम में राज्य सरकारें 60 दिनों का कार्य विराम घोषित कर सकती हैं।
AI, जियो-टैगिंग और सैटेलाइट इमेजरी से पारदर्शिता; हर 6 महीने में डिजिटल सामाजिक लेखापरीक्षा।
साप्ताहिक मजदूरी अनिवार्य; दो सप्ताह से अधिक देरी पर स्वतः मुआवज़े का प्रावधान।
मुख्यमंत्री शर्मा ने मनरेगा पर फर्ज़ी कार्ड, नकली लाभार्थियों और कमज़ोर निगरानी के आरोप लगाए।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 2 जुलाई 2026 को जयपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) — जिसे संक्षेप में वीबी-जी राम जी कहा जा रहा है — के राज्य स्तरीय शुभारंभ में भाग लिया। शर्मा ने कहा कि यह योजना ग्रामीण विकास में एक नया अध्याय जोड़ेगी और इसमें प्रत्येक पात्र परिवार को सालाना 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी।

राष्ट्रीय शुभारंभ और राज्य स्तरीय कार्यक्रम

योजना का राष्ट्रीय शुभारंभ केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति से किया। राजस्थान में राज्य स्तरीय कार्यक्रम ब्यावर जिले के मसूदा कृषि उपज मंडी से आयोजित हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जनसभा को संबोधित किया।

शर्मा ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप है और भारत का समग्र विकास उसके गाँवों की समृद्धि पर निर्भर है।

मनरेगा की खामियों पर आरोप

मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) पर आरोप लगाया कि खराब योजना और कमज़ोर निगरानी तंत्र के चलते यह योजना अपने निर्धारित लक्ष्य हासिल करने में विफल रही। उन्होंने दावा किया कि पिछली योजना के तहत कई परियोजनाओं से केवल अस्थायी सड़कें, अधूरी जल संरचनाएँ और अनियोजित मिट्टी के काम हुए, जिनका दीर्घकालिक लाभ नगण्य रहा।

शर्मा ने फर्ज़ी नौकरी कार्ड, नकली लाभार्थियों, हेरफेर किए गए उपस्थिति रिकॉर्ड और विलंबित मजदूरी भुगतान जैसी अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक लेखापरीक्षाएँ अक्सर अप्रभावी या महज औपचारिकता बनकर रह जाती थीं।

वीबी-जी राम जी की प्रमुख विशेषताएँ

नई योजना में वार्षिक गारंटीकृत रोजगार को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। कृषि में श्रम की कमी रोकने के लिए राज्य सरकारें बुवाई और कटाई के मौसम में 60 दिनों का कार्य विराम घोषित कर सकती हैं।

योजना जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका सृजन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टिकाऊ संपत्तियों के निर्माण पर केंद्रित होगी। शर्मा ने इसे महज एक रोजगार कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक ग्रामीण विकास पहल बताया।

तकनीकी पारदर्शिता और शिकायत निवारण

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल एप्लिकेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक छह महीने में डिजिटल सामाजिक लेखापरीक्षा अनिवार्य होगी।

एक बहुस्तरीय डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली भी शुरू की गई है, जिसमें निश्चित समयसीमा और जिला लोकपालों की भूमिका तय की गई है। साप्ताहिक मजदूरी भुगतान अनिवार्य होगा और दो सप्ताह से अधिक की देरी पर स्वतः मुआवज़े का प्रावधान रखा गया है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण रोजगार और प्रवासी मजदूरी को लेकर देशभर में बहस तेज़ है। वीबी-जी राम जी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि AI-आधारित निगरानी और डिजिटल लेखापरीक्षा ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि AI और डिजिटल लेखापरीक्षा जैसे तकनीकी उपाय उन ज़िलों में कितने कारगर होंगे जहाँ इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता अभी भी सीमित है। मनरेगा की विफलताओं के लिए खराब निगरानी को ज़िम्मेदार ठहराना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन यह उन संरचनात्मक कारणों को नज़रअंदाज़ करता है जैसे अपर्याप्त फंडिंग और प्रशासनिक क्षमता की कमी। 25 दिनों की अतिरिक्त गारंटी और साप्ताहिक भुगतान का प्रावधान स्वागत-योग्य है, परंतु बिना स्वतंत्र सत्यापन तंत्र के ये वादे भी पिछली घोषणाओं की तरह कागज़ों तक सिमटने का जोखिम रखते हैं।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीबी-जी राम जी योजना क्या है?
वीबी-जी राम जी यानी विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक केंद्र सरकार समर्थित ग्रामीण विकास पहल है, जिसे 2 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय स्तर पर लॉन्च किया गया। यह योजना मनरेगा की जगह नहीं लेती, बल्कि ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी के साथ जल संरक्षण, अवसंरचना और आजीविका पर ध्यान केंद्रित करती है।
वीबी-जी राम जी में मनरेगा से क्या अलग है?
इस योजना में रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन की गई है। इसके अलावा AI, जियो-टैगिंग और सैटेलाइट इमेजरी से निगरानी, साप्ताहिक मजदूरी भुगतान और देरी पर स्वतः मुआवज़े जैसे प्रावधान जोड़े गए हैं, जो मनरेगा में नहीं थे।
राजस्थान में इस योजना का शुभारंभ कहाँ और कैसे हुआ?
राजस्थान में राज्य स्तरीय शुभारंभ ब्यावर जिले के मसूदा कृषि उपज मंडी से हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए जनसभा को संबोधित किया।
बुवाई-कटाई के मौसम में काम बंद क्यों रहेगा?
कृषि में श्रम की कमी रोकने के लिए राज्य सरकारों को बुवाई और कटाई के मौसम में 60 दिनों का कार्य विराम घोषित करने का अधिकार दिया गया है। इससे ग्रामीण मजदूर खेती के काम में उपलब्ध रह सकेंगे।
मजदूरी भुगतान में देरी पर क्या होगा?
योजना के तहत साप्ताहिक मजदूरी भुगतान अनिवार्य है। यदि भुगतान में दो सप्ताह से अधिक की देरी होती है, तो लाभार्थी को स्वतः मुआवज़ा मिलेगा — यह प्रावधान मनरेगा में प्रभावी ढंग से लागू नहीं था।
राष्ट्र प्रेस
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