मनरेगा की जगह विकसित भारत जी राम जी योजना, प्रतुल शाह देव ने बताया महत्वपूर्ण कारण
सारांश
Key Takeaways
- मनरेगा को विकसित भारत जी राम जी योजना में बदलने का निर्णय श्रमिकों के हितों को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया है।
- इस योजना में श्रमिकों को 125 से 185 दिनों का रोजगार मिलेगा।
- ऑनलाइन निगरानी प्रणाली जल्द ही लागू की जाएगी।
- ग्रामीण विकास पर जोर देने के लिए नई रूपरेखा तैयार की गई है।
- राजनीतिक माहौल पश्चिम बंगाल में बदल रहा है।
रांची, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने मनरेगा कानून को 'विकसित भारत जी राम जी योजना' में परिवर्तित करने के महत्व पर रोशनी डाली। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जिनमें से सबसे बड़ा कारण श्रमिकों के हितों को प्राथमिकता देना है। हमने जी राम जी योजना में ऐसे कई प्रावधान किए हैं, जिनका सीधा प्रभाव आने वाले दिनों में श्रमिकों पर पड़ेगा।
उन्होंने गुरुवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि पहले मनरेगा के तहत श्रमिकों को 100 की जगह 125 दिनों का रोजगार देने का नया प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने श्रमिकों के लिए 185 दिनों तक रोजगार देने की व्यवस्था की है। इस पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन निगरानी करने की व्यवस्था भी की गई है, जिसे जल्द ही लागू किया जाएगा।
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने दावा किया कि पहले मनरेगा योजना इतनी केंद्रित नहीं थी, लेकिन अब हमने विकसित भारत जी राम जी योजना को बहुत अधिक केंद्रित किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के हितों को बढ़ावा देना है और इस दिशा में हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य सीमित कार्यों तक ही था, लेकिन विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी कार्यों को कैसे मजबूत किया जा सकता है। इस दिशा में हमने एक विस्तृत योजना तैयार कर ली है, जिसे जल्द ही लागू किया जाएगा। हम इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं कर सकते।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हमें पूरा यकीन है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में विकसित भारत जी राम जी योजना महत्वपूर्ण साबित होगी। हमें विश्वास है कि आने वाले दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे, जिससे राज्य के विकास को भी नई गति मिलेगी।
इसके अतिरिक्त, भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने जम्मू-कश्मीर से हटाए गए अनुच्छेद 370 का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर से हटाया गया है। इस तरह से इसे देखना एक केंद्रीय विषय है। लेकिन इस संबंध में झारखंड सरकार की ओर से एक रेज्यूलेशन पेश किया जा रहा है। यह मुद्दा वास्तव में समझ से परे लगता है।
भाजपा प्रवक्ता ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को इस बात का एहसास हो चुका है कि उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि इस संदर्भ में उन्होंने राज्य में एक सर्वे भी कराया है, जिसमें यह बात स्पष्ट है कि प्रदेश में उनकी हार निश्चित है। इसी कारण से उन्होंने अपनी पार्टी के कई नेताओं का टिकट काट दिया है।
उन्होंने कहा कि टीएमसी के नेताओं का टिकट कटने के बाद ममता बनर्जी के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि हम इस स्थिति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते। पार्टी के अंदर विवाद अब सार्वजनिक हो चुका है। ऐसी स्थिति में ममता बनर्जी के लिए यह बेहतर होगा कि वह भाजपा से मुकाबला करने से पहले अपनी पार्टी के असंतोष का समाधान करें। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल किस दिशा में जा रहा है।