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विकसित भारत-जी राम जी योजना लॉन्च: 125 दिन रोजगार गारंटी, 5 साल में ₹7.5 लाख करोड़ खर्च का लक्ष्य

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विकसित भारत-जी राम जी योजना लॉन्च: 125 दिन रोजगार गारंटी, 5 साल में ₹7.5 लाख करोड़ खर्च का लक्ष्य

सारांश

मनरेगा की जगह आई 'विकसित भारत–जी राम जी योजना' — 125 दिन रोजगार, ₹7.5 लाख करोड़ का 5 साल का बजट, और ग्राम सभा को काम चुनने का अधिकार। तिरुपति के एक गांव से हुई इस लॉन्चिंग में शिवराज, नायडू और पवन कल्याण एक मंच पर थे।

मुख्य बातें

विकसित भारत–जी राम जी योजना का राष्ट्रीय शुभारंभ 2 जुलाई 2025 को तिरुपति, आंध्र प्रदेश के मुक्कावरिपल्ली गांव से हुआ।
मनरेगा की 100 दिन की सीमा बढ़ाकर अब 125 दिन रोजगार की गारंटी दी जाएगी; मजदूरी ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं होगी।
पहले वर्ष केंद्र की हिस्सेदारी ₹95,000 करोड़ से अधिक ; राज्यों की 40% हिस्सेदारी के साथ कुल वार्षिक व्यय ₹1.51 लाख करोड़ ।
अगले 5 वर्षों में कुल ₹7.5 लाख करोड़ खर्च का लक्ष्य; 2.86 लाख पंचायतों को प्रति वर्ष औसतन ₹2 करोड़ से अधिक ।
आंध्र प्रदेश को 9 महीनों के लिए ₹7,707 करोड़ की विशेष राशि; 74,212 नए पक्के मकान और 146 सड़कें व 19 पुल स्वीकृत।
काम मांगने पर 15 दिन में रोजगार अनिवार्य; न मिले तो बेरोजगारी भत्ता ; देरी पर ब्याज सहित मजदूरी का प्रावधान।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2 जुलाई 2025 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के मुक्कावरिपल्ली गांव से 'विकसित भारत–जी राम जी योजना' का राष्ट्रीय शुभारंभ किया, जो मनरेगा की जगह लेने वाली नई ग्रामीण रोजगार योजना है। इस योजना के तहत देश के ग्रामीण मजदूरों को अब 125 दिन तक काम की पक्की गारंटी दी जाएगी — जो पहले की 100 दिन की सीमा से 25 दिन अधिक है। इस ऐतिहासिक शुभारंभ कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और कमलेश पासवान सहित हजारों की संख्या में जनसमुदाय उपस्थित रहा।

योजना की मुख्य विशेषताएं

विकसित भारत–जी राम जी योजना (वीबी-जी राम जी) में मजदूरों के अधिकारों को कानूनी आधार दिया गया है। काम मांगने पर 15 दिन के भीतर रोजगार देना अनिवार्य होगा और निर्धारित समय में काम न मिलने पर संबंधित मजदूर को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। इसके अलावा मजदूरी भुगतान में देरी होने पर ब्याज सहित विलंबित मजदूरी का प्रावधान भी किया गया है।

चौहान ने यह भी घोषणा की कि देशभर में किसी भी राज्य में मजदूरी ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं होगी। आंध्र प्रदेश में यह दर ₹312–₹315 प्रतिदिन के बीच रखी गई है। योजना में 300 से अधिक प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है जो ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करेंगे।

वित्तीय आवंटन और पंचायतों तक पहुंच

चौहान ने बताया कि पहले ही वर्ष में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी ₹95,000 करोड़ से अधिक रहेगी। राज्यों की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी जोड़ने पर वार्षिक कुल व्यय ₹1.51 लाख करोड़ के करीब पहुंचता है। अगले 5 वर्षों में इस योजना के तहत ₹7.5 लाख करोड़ खर्च करने का लक्ष्य है।

यह राशि देश की 2.86 लाख पंचायतों तक पहुंचेगी, जिससे प्रत्येक पंचायत को प्रति वर्ष औसतन ₹2 करोड़ से अधिक मिलेंगे। इससे गांवों में रोजगार के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियां भी बनेंगी। प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, जिसके तहत ₹13,000 करोड़ से अधिक की राशि ग्राम रोजगार सहायकों और जमीनी कर्मचारियों के वेतन के लिए रखी गई है।

ग्राम सभा को निर्णय का अधिकार

चौहान ने स्पष्ट किया कि किस गांव में कौन-सा काम होगा, यह दिल्ली या राज्य की राजधानी से नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत और ग्राम सभा द्वारा तय किया जाएगा। आंगनवाड़ी, स्कूल, अस्पताल, सड़क, तालाब, बांध या सुरक्षा दीवार — इन सभी कार्यों का निर्णय गांव की जनता खुद करेगी। उन्होंने कहा, 'गांव का फैसला गांव में होगा, यही जी-राम जी योजना की आत्मा है।'

राज्यों को यह भी अधिकार दिया गया है कि वे पंचायतों को ए, बी और सी श्रेणियों में वर्गीकृत कर पिछड़ी पंचायतों को अधिक राशि आवंटित करें, जिससे इंटीरियर और पिछड़े इलाकों में विकास की गति तेज हो।

आंध्र प्रदेश को विशेष पैकेज

चौहान ने बताया कि 9 महीने की अवधि के लिए आंध्र प्रदेश को इस योजना के तहत केंद्र से ₹7,707 करोड़ की विशेष राशि दी जा रही है। इसके अतिरिक्त राज्य में 74,212 नए पक्के मकान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत स्वीकृत किए गए हैं। 146 नई सड़कें और 19 पुलों के निर्माण के लिए ₹422 करोड़ से अधिक की राशि भी स्वीकृत की गई है। चौहान ने मंच से ही इन स्वीकृतियों के पत्र मुख्यमंत्री नायडू और उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण को सौंपे।

तकनीक से पारदर्शिता और किसानों को राहत

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि नई योजना में डिजिटल मास्टर रोल, आधार-आधारित भुगतान, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और जियो-टैगिंग जैसी तकनीकों से कार्यों की निगरानी होगी, जिससे कागजी हेराफेरी पर रोक लगेगी। नायडू ने रायलसीमा क्षेत्र को हॉर्टिकल्चर हब बनाने के विजन के तहत पूर्वोदय कार्यक्रम के अंतर्गत ₹40,000 करोड़ के सार्वजनिक और ₹60,000 करोड़ के निजी निवेश का लक्ष्य भी साझा किया।

चौहान ने तोता परी आम उत्पादक किसानों की समस्या का भी उल्लेख किया और बताया कि दाम गिरने से हो रहे नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत बड़ी मात्रा में इस आम की खरीद का फैसला किया है। साथ ही आईसीआर की वैज्ञानिक टीम राज्य सरकार के साथ मिलकर उत्पादकता और बेहतर वैरायटी पर काम करेगी।

यह योजना मनरेगा के दो दशक के अनुभव को आधार बनाकर, उसे तकनीक, पारदर्शिता और अधिक वित्तीय शक्ति के साथ नए स्वरूप में लागू करने का प्रयास है — अब देखना यह होगा कि जमीनी क्रियान्वयन में यह वादे कितने खरे उतरते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

कार्यदिवस और तकनीकी ढांचे में कई बार बदलाव हो चुके हैं, फिर भी जमीनी स्तर पर मजदूरी भुगतान में देरी और फर्जी मस्टर रोल की समस्याएं बनी रही हैं। 125 दिन की गारंटी और बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान कागज पर मजबूत दिखता है, लेकिन असली सवाल यह है कि 2.86 लाख पंचायतों में से कितनी में प्रशासनिक क्षमता इतनी है कि 15 दिन में रोजगार सुनिश्चित कर सकें। ₹7.5 लाख करोड़ का पांच साल का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता तभी बनेगी जब रियल-टाइम मॉनिटरिंग और जियो-टैगिंग के दावे स्वतंत्र ऑडिट से परखे जाएं।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकसित भारत–जी राम जी योजना क्या है?
यह मनरेगा की जगह लागू की गई नई केंद्रीय ग्रामीण रोजगार योजना है, जिसमें मजदूरों को 125 दिन काम की कानूनी गारंटी दी जाती है। इसका राष्ट्रीय शुभारंभ 2 जुलाई 2025 को तिरुपति, आंध्र प्रदेश से हुआ।
मनरेगा और वीबी-जी राम जी योजना में क्या फर्क है?
मनरेगा में 100 दिन रोजगार की गारंटी थी, जबकि नई योजना में यह सीमा बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। इसके अलावा 15 दिन में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता, देरी पर ब्याज सहित मजदूरी, और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे नए प्रावधान जोड़े गए हैं।
इस योजना में कितना बजट रखा गया है?
पहले वर्ष केंद्र की हिस्सेदारी ₹95,000 करोड़ से अधिक है और राज्यों की 40% हिस्सेदारी के साथ वार्षिक व्यय ₹1.51 लाख करोड़ के करीब पहुंचता है। अगले 5 वर्षों में कुल ₹7.5 लाख करोड़ खर्च का लक्ष्य है।
आंध्र प्रदेश को इस योजना से क्या मिलेगा?
आंध्र प्रदेश को 9 महीनों के लिए ₹7,707 करोड़ की विशेष केंद्रीय राशि दी जाएगी। इसके अलावा 74,212 नए पक्के मकान, 146 सड़कें और 19 पुलों के निर्माण के लिए ₹422 करोड़ से अधिक की स्वीकृति भी दी गई है।
ग्राम सभा को इस योजना में क्या अधिकार दिए गए हैं?
गांव में कौन-सा काम होगा — आंगनवाड़ी, सड़क, तालाब, बांध या स्कूल — यह निर्णय अब ग्राम पंचायत और ग्राम सभा लेगी, न कि केंद्र या राज्य सरकार। राज्य पंचायतों को ए, बी, सी श्रेणियों में बांटकर पिछड़ी पंचायतों को अधिक राशि दे सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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