वीबी-जी रामजी योजना: ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त जारी, मजदूरी अब ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 6 जुलाई 2025 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण), जिसे वीबी-जी रामजी योजना के नाम से जाना जाता है, के अंतर्गत ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त राज्यों को जारी की। उन्होंने इस अवसर पर घोषणा की कि योजना पूरे देश में 1 जुलाई 2025 से सुचारु रूप से लागू हो चुकी है और अब तक किसी भी तकनीकी या संचालन संबंधी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
मनरेगा से वीबी-जी रामजी में बदलाव
चौहान ने कहा कि मनरेगा को पूरे देश में लागू होने में लगभग तीन वर्ष का समय लगा था, जबकि वीबी-जी रामजी योजना एक ही दिन में पूरे देश में प्रभावी हो गई। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, राज्यों के सहयोग और देश की प्रशासनिक क्षमता की बड़ी उपलब्धि बताया। मंत्री के अनुसार, मनरेगा से इस नई योजना में परिवर्तन पूरी तरह सहज और निर्बाध रहा।
मजदूरी दरों में वृद्धि और श्रमिकों को लाभ
वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत मजदूरी दरों में औसतन लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अब देश के किसी भी राज्य में दैनिक मजदूरी ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं होगी। ₹25,863 करोड़ की यह पहली किस्त इसलिए जारी की गई है ताकि राज्य सरकारें श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित कर सकें। चौहान ने स्पष्ट किया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
राज्यों का प्रदर्शन और आगे की अपेक्षाएँ
मंत्री ने प्रारंभिक प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया कि पहले सप्ताह में बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों में कार्य शुरू हुए और लाखों ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। उन्होंने आंध्र प्रदेश, केरल और राजस्थान की विशेष सराहना की, जिन्होंने पहले दिन ही बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराया। वहीं, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से शेष ग्राम पंचायतों में शीघ्र कार्य शुरू करने का आग्रह किया गया।
झारखंड और लंबित प्रक्रियाएँ
झारखंड से योजना को अधिसूचित कर आवश्यक बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया। जिन राज्यों में RBI खाते खोलने अथवा अन्य प्रक्रियाएँ लंबित हैं, उन्हें समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए गए। चौहान ने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे अपनी हिस्सेदारी की राशि भी समय पर जारी करें ताकि मजदूरी भुगतान में कोई विलंब न हो।
ग्राम सभाओं की भूमिका और आगे की राह
चौहान ने कहा कि ग्राम सभाएँ और ग्राम पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों का चयन करें, ताकि गाँवों का समग्र और सहभागी विकास सुनिश्चित हो सके। गौरतलब है कि यह योजना ग्रामीण श्रमिकों को सम्मानजनक रोजगार, समय पर मजदूरी और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण का लक्ष्य लेकर चलती है। भविष्य में भी राज्यों की आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त धन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।