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वीबी-जी रामजी योजना: ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त जारी, मजदूरी अब ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं

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वीबी-जी रामजी योजना: ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त जारी, मजदूरी अब ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं

सारांश

मनरेगा की जगह लेने वाली वीबी-जी रामजी योजना ने एक ही दिन में पूरे देश में दस्तक दी — जो मनरेगा के तीन साल के विस्तार से कहीं तेज़ है। ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त और ₹300 न्यूनतम दैनिक मजदूरी के साथ, यह ग्रामीण रोजगार नीति में बड़े बदलाव का संकेत है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त वीबी-जी रामजी योजना के तहत राज्यों को जारी की।
योजना 1 जुलाई 2025 से पूरे देश में एक ही दिन में लागू हुई; अब तक कोई तकनीकी या संचालन शिकायत नहीं।
मजदूरी दरों में औसतन 10% की वृद्धि; अब किसी भी राज्य में दैनिक मजदूरी ₹300 से कम नहीं होगी।
आंध्र प्रदेश , केरल और राजस्थान की सराहना; ओडिशा , पश्चिम बंगाल और झारखंड से शीघ्र कार्यान्वयन का आग्रह।
श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने का लक्ष्य।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 6 जुलाई 2025 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण), जिसे वीबी-जी रामजी योजना के नाम से जाना जाता है, के अंतर्गत ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त राज्यों को जारी की। उन्होंने इस अवसर पर घोषणा की कि योजना पूरे देश में 1 जुलाई 2025 से सुचारु रूप से लागू हो चुकी है और अब तक किसी भी तकनीकी या संचालन संबंधी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

मनरेगा से वीबी-जी रामजी में बदलाव

चौहान ने कहा कि मनरेगा को पूरे देश में लागू होने में लगभग तीन वर्ष का समय लगा था, जबकि वीबी-जी रामजी योजना एक ही दिन में पूरे देश में प्रभावी हो गई। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, राज्यों के सहयोग और देश की प्रशासनिक क्षमता की बड़ी उपलब्धि बताया। मंत्री के अनुसार, मनरेगा से इस नई योजना में परिवर्तन पूरी तरह सहज और निर्बाध रहा।

मजदूरी दरों में वृद्धि और श्रमिकों को लाभ

वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत मजदूरी दरों में औसतन लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अब देश के किसी भी राज्य में दैनिक मजदूरी ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं होगी। ₹25,863 करोड़ की यह पहली किस्त इसलिए जारी की गई है ताकि राज्य सरकारें श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित कर सकें। चौहान ने स्पष्ट किया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

राज्यों का प्रदर्शन और आगे की अपेक्षाएँ

मंत्री ने प्रारंभिक प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया कि पहले सप्ताह में बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों में कार्य शुरू हुए और लाखों ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। उन्होंने आंध्र प्रदेश, केरल और राजस्थान की विशेष सराहना की, जिन्होंने पहले दिन ही बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराया। वहीं, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से शेष ग्राम पंचायतों में शीघ्र कार्य शुरू करने का आग्रह किया गया।

झारखंड और लंबित प्रक्रियाएँ

झारखंड से योजना को अधिसूचित कर आवश्यक बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया। जिन राज्यों में RBI खाते खोलने अथवा अन्य प्रक्रियाएँ लंबित हैं, उन्हें समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए गए। चौहान ने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे अपनी हिस्सेदारी की राशि भी समय पर जारी करें ताकि मजदूरी भुगतान में कोई विलंब न हो।

ग्राम सभाओं की भूमिका और आगे की राह

चौहान ने कहा कि ग्राम सभाएँ और ग्राम पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों का चयन करें, ताकि गाँवों का समग्र और सहभागी विकास सुनिश्चित हो सके। गौरतलब है कि यह योजना ग्रामीण श्रमिकों को सम्मानजनक रोजगार, समय पर मजदूरी और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण का लक्ष्य लेकर चलती है। भविष्य में भी राज्यों की आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त धन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गुणवत्ता होगी। मनरेगा पर दशकों से उठते रहे सवाल — समय पर मजदूरी न मिलना, फर्जी जॉब कार्ड, भ्रष्टाचार — नई योजना में भी तब तक बने रह सकते हैं जब तक निगरानी तंत्र मजबूत नहीं होता। ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों में अभी भी पूर्ण कार्यान्वयन बाकी है, जो दर्शाता है कि 'एक दिन में लागू' का दावा अभी पूरी तरह सटीक नहीं है। ₹300 न्यूनतम मजदूरी की गारंटी स्वागतयोग्य है, पर इसका लाभ तभी मिलेगा जब भुगतान वास्तव में 15 दिनों में हो — जो मनरेगा के इतिहास में अपवाद रहा है, नियम नहीं।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीबी-जी रामजी योजना क्या है और यह मनरेगा से कैसे अलग है?
वीबी-जी रामजी यानी विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) मनरेगा की जगह लेने वाली केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना है, जो 1 जुलाई 2025 से लागू हुई। इसमें न्यूनतम दैनिक मजदूरी ₹300 तय की गई है और 15 दिनों के भीतर भुगतान का लक्ष्य है।
₹25,863 करोड़ की पहली किस्त किसे और क्यों जारी की गई?
यह राशि राज्य सरकारों को जारी की गई है ताकि वे ग्रामीण श्रमिकों को समय पर मजदूरी का भुगतान कर सकें। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि यह किस्त राज्यों की माँग के आधार पर दी गई है और भविष्य में भी आवश्यकतानुसार धन उपलब्ध कराया जाएगा।
वीबी-जी रामजी योजना के तहत मजदूरी दरों में क्या बदलाव हुआ है?
योजना के अंतर्गत मजदूरी दरों में औसतन लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अब देश के किसी भी राज्य में दैनिक मजदूरी ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं होगी।
कौन से राज्य अभी भी योजना को पूरी तरह लागू नहीं कर पाए हैं?
ओडिशा और पश्चिम बंगाल में शेष ग्राम पंचायतों में अभी काम शुरू होना बाकी है। झारखंड से योजना को अधिसूचित कर बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।
इस योजना में ग्राम पंचायतों की क्या भूमिका है?
ग्राम सभाएँ और ग्राम पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों का चयन करेंगी। इसका उद्देश्य गाँवों में सहभागी और समग्र विकास सुनिश्चित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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