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वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 लागू: ग्रामीण रोजगार गारंटी 100 से बढ़कर 125 दिन, ₹95,692 करोड़ जारी

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वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 लागू: ग्रामीण रोजगार गारंटी 100 से बढ़कर 125 दिन, ₹95,692 करोड़ जारी

सारांश

1 जुलाई 2025 से लागू वीबी-जी राम जी अधिनियम ने ग्रामीण रोजगार की कानूनी गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी है। केंद्र ने ₹95,692.31 करोड़ जारी किए, 29 राज्यों ने बजट प्रावधान किए और 24 ने राज्य योजना अधिसूचित की — यह 'विकसित भारत 2047' की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम है।

मुख्य बातें

वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 आज 1 जुलाई 2025 से पूरे देश में लागू हो गया।
पात्र ग्रामीण परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई।
केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि जारी की।
29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने बजट में आवश्यक प्रावधान किए; 24 राज्यों ने राज्य योजना अधिसूचित की।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रशासनिक, वित्तीय और तकनीकी स्तर पर सभी तैयारियाँ पूरी हैं।
कानून का लक्ष्य टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियाँ बनाना और 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण को गति देना है।

विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 — जिसे वीबी-जी राम जी अधिनियम के नाम से जाना जाता है — 1 जुलाई 2025 से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी हो गया है। इस कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। केंद्र सरकार ने योजना के निर्बाध क्रियान्वयन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि पहले ही जारी कर दी है।

नए कानून में क्या बदला

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, वीबी-जी राम जी अधिनियम का उद्देश्य केवल रोजगार के दिन बढ़ाना नहीं है। इसके तहत गांवों में टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण, ग्रामीण बुनियादी ढाँचे का सुदृढ़ीकरण और आजीविका को दीर्घकालिक स्थिरता देना भी प्रमुख लक्ष्य हैं। मंत्रालय ने इसे 'विकसित भारत 2047' के व्यापक दृष्टिकोण की एक अहम कड़ी बताया है।

शिवराज सिंह चौहान की तैयारी की घोषणा

कानून लागू होने से एक दिन पहले, मंगलवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रशासनिक, वित्तीय और तकनीकी — तीनों स्तरों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

चौहान ने कहा, 'हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र ग्रामीण मजदूर एक भी दिन काम से वंचित न रहे। रोजगार की 125 दिनों की बढ़ी हुई गारंटी ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत करेगी, टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियाँ बनाएगी और विकसित भारत के लक्ष्य को गति देगी।'

वित्तीय आवंटन और राज्यों की तैयारी

केंद्र सरकार द्वारा जारी ₹95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि इस बात का संकेत है कि किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में कानून के क्रियान्वयन के दौरान वित्तीय बाधा नहीं आने दी जाएगी। मंत्रालय के अनुसार, इससे मजदूरों को समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित होगा।

हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन (आरजीवीएस) में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों ने चौहान को भरोसा दिलाया था कि वे 1 जुलाई से इस कानून को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने बजट में आवश्यक प्रावधान कर लिए हैं, जबकि 24 राज्यों ने वीबी-जी राम जी राज्य योजना की अधिसूचना भी जारी कर दी है।

आम ग्रामीण परिवारों पर असर

रोजगार के दिनों में 25 दिनों की बढ़ोतरी से ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय में उल्लेखनीय स्थिरता आने की उम्मीद है। मंत्रालय का कहना है कि गाँवों में बनने वाली स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियाँ — जैसे जल संरक्षण संरचनाएँ, ग्रामीण सड़कें और सामुदायिक भवन — दीर्घकाल में ग्रामीण विकास को और गति देंगी। गौरतलब है कि यह कानून उस समय आया है जब ग्रामीण बेरोजगारी और प्रवासन की चुनौतियाँ नीति-निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

आगे की राह

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वीबी-जी राम जी अधिनियम को भारत के ग्रामीण विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि 29 में से शेष राज्य कब तक बजट प्रावधान पूरे करते हैं और 24 से अधिक राज्य राज्य योजना की अधिसूचना कब जारी करते हैं। कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और मजदूरी भुगतान की पारदर्शिता ही इस महत्वाकांक्षी योजना की असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन की गुणवत्ता का है। पिछले दशक में मनरेगा के तहत भी मजदूरी भुगतान में देरी और जॉब कार्ड फर्जीवाड़े जैसी समस्याएँ बार-बार सामने आई हैं। ₹95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि पर्याप्त लगती है, लेकिन 29 में से केवल 24 राज्यों का अधिसूचना जारी करना यह दर्शाता है कि जमीनी एकरूपता अभी पूरी नहीं है। बिना मजबूत डिजिटल ट्रैकिंग और स्वतंत्र सामाजिक ऑडिट के, 25 अतिरिक्त दिनों की गारंटी कागज पर ही सिमट सकती है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 क्या है?
यह 'विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025' है, जो 1 जुलाई 2025 से पूरे देश में लागू हुआ है। इसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है और इसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को मजबूत करते हुए 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।
नए कानून के तहत रोजगार गारंटी कितने दिन की हो गई है?
वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत अब पात्र ग्रामीण परिवारों को 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी, जो पहले 100 दिन थी। यह 25 दिनों की बढ़ोतरी ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय में अधिक स्थिरता लाने के उद्देश्य से की गई है।
केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए कितनी राशि जारी की है?
केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि जारी की है। यह राशि इसलिए दी गई है ताकि पहले दिन से ही मजदूरों को समय पर मजदूरी मिले और कानून का क्रियान्वयन बिना किसी वित्तीय बाधा के हो सके।
कितने राज्यों ने वीबी-जी राम जी कानून लागू करने की तैयारी पूरी की है?
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने बजट में आवश्यक प्रावधान कर लिए हैं, जबकि 24 राज्यों ने वीबी-जी राम जी राज्य योजना की अधिसूचना भी जारी कर दी है। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में सभी राज्यों के मंत्रियों ने 1 जुलाई से तैयारी का भरोसा दिलाया था।
इस कानून से ग्रामीण परिवारों को क्या फायदा होगा?
125 दिनों की बढ़ी हुई रोजगार गारंटी से ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय में अधिक स्थिरता आएगी। इसके अलावा, गाँवों में बनने वाली टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियाँ — जैसे जल संरक्षण संरचनाएँ और ग्रामीण सड़कें — दीर्घकाल में ग्रामीण विकास और बुनियादी ढाँचे को मजबूत करेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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