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IMF की भारत को सराहना: 7% विकास दर का अनुमान, वैश्विक झटकों के बीच भी मजबूत अर्थव्यवस्था

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IMF की भारत को सराहना: 7% विकास दर का अनुमान, वैश्विक झटकों के बीच भी मजबूत अर्थव्यवस्था

सारांश

वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय संकट के बीच भी भारत ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया — IMF ने 7% विकास दर का अनुमान जताया और संरचनात्मक सुधारों की खुलकर तारीफ की। एशिया में जब अधिकांश अर्थव्यवस्थाएँ लड़खड़ा रही हैं, भारत अपवाद बना हुआ है।

मुख्य बातें

IMF ने 15 अक्टूबर 2026 को भारत की आर्थिक मजबूती और वित्तीय अनुशासन की सराहना की।
IMF का अनुमान: चालू वर्ष और अगले वर्ष दोनों में भारत की विकास दर 7 प्रतिशत ; मध्यम अवधि में 6.9 प्रतिशत ।
अप्रैल-जून तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 7.8 प्रतिशत रही।
IMF के एशिया-प्रशांत निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने बैंकॉक में प्रेस ब्रीफिंग में रुपये की गिरावट को आर्थिक कमज़ोरी का संकेत मानने से इनकार किया।
IMF ने MoSPI द्वारा संशोधित जीडीपी गणना पद्धति को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बताते हुए समर्थन दिया।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 15 अक्टूबर 2026 को भारत की आर्थिक मजबूती और नीतिगत अनुशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय उथल-पुथल के बावजूद दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाए हुए है। IMF ने चालू वित्त वर्ष और अगले वर्ष दोनों के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 7 प्रतिशत कर दिया है।

IMF का आकलन और विकास दर अनुमान

बैंकॉक में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान IMF के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने कहा कि हालिया ऊर्जा संकट के दौरान भारत मजबूत आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन की स्थिति में था तथा उसने बाहरी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया। उन्होंने बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन के बाद यह अनुमान संशोधित किया गया है।

IMF की ताज़ा 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' रिपोर्ट के अनुसार, मध्यम अवधि में भारत की विकास दर लगभग 6.9 प्रतिशत बनी रहने का अनुमान है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

भारत की मजबूती के पीछे प्रमुख कारण

IMF की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारत की अलग पहचान के पीछे कई कारण हैं — मजबूत घरेलू माँग, सेवा क्षेत्र की सक्रियता, अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति, बड़ा और लगातार विस्तार करता घरेलू बाज़ार तथा जारी संरचनात्मक सुधार। गौरतलब है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एशिया की अनेक अर्थव्यवस्थाओं की विकास संभावनाएँ कमजोर हुई हैं, जबकि भारत ने सकारात्मक आश्चर्य दिया है।

रुपये की चाल पर IMF का स्पष्टीकरण

श्रीनिवासन ने स्पष्ट किया कि रुपये पर हाल में पड़ा दबाव आर्थिक कमज़ोरी का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार विनिमय दरें वैश्विक ब्याज दरों, निवेशकों की धारणा और कच्चे तेल की कीमतों जैसे अनेक कारकों से प्रभावित होती हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक बड़े तेल आयातक देश के रूप में भारत वैश्विक ऊर्जा झटकों से प्रभावित अवश्य हुआ है, लेकिन किसी अर्थव्यवस्था की सफलता का आकलन केवल मुद्रा की चाल से नहीं किया जाना चाहिए।

जीडीपी गणना पद्धति को IMF का समर्थन

IMF ने भारत की संशोधित जीडीपी गणना पद्धति का भी समर्थन किया। श्रीनिवासन ने कहा कि किए गए बदलाव अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं और IMF की पूर्व सिफारिशों के अनुरूप हैं। उन्होंने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी को बेहतर बनाने के प्रयासों की भी सराहना की। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की जीडीपी गणना पद्धति पर वैश्विक स्तर पर बहस जारी रही है।

आगे की राह

IMF की यह सराहना भारत के लिए वैश्विक निवेशकों के बीच विश्वसनीयता को और मज़बूत कर सकती है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के इस दौर में 7 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि दर भारत को निवेश के लिहाज़ से एक आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संरचनात्मक सुधारों की निरंतरता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना इस गति को आगे भी बरकरार रखने की कुंजी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 7% का अनुमान और अप्रैल-जून की 7.8% वास्तविक वृद्धि के बीच का अंतर यह भी बताता है कि वैश्विक संस्थाएँ भारत की रफ्तार को लेकर अभी भी सतर्क हैं। रुपये की कमज़ोरी को 'केवल बाहरी कारक' बताना राहत देता है, परंतु बड़े तेल आयात बिल और चालू खाते के घाटे पर ध्यान देना ज़रूरी है। संशोधित जीडीपी गणना पद्धति को IMF का समर्थन मिलना महत्वपूर्ण है, मगर यह भी ज़रूरी है कि इस पारदर्शिता को आगे भी बनाए रखा जाए। असली कसौटी यह होगी कि क्या 7% की विकास दर रोज़गार और आय में समान वृद्धि में तब्दील होती है — जो अब तक भारत की सबसे बड़ी चुनौती रही है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IMF ने भारत की विकास दर का अनुमान कितना रखा है?
IMF ने चालू वर्ष और अगले वर्ष दोनों के लिए भारत की विकास दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। मध्यम अवधि में यह दर लगभग 6.9 प्रतिशत बने रहने की उम्मीद है।
IMF ने भारत की तारीफ किन कारणों से की?
IMF ने मजबूत घरेलू माँग, सेवा क्षेत्र की सक्रियता, अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति, बड़े घरेलू बाज़ार और जारी संरचनात्मक सुधारों के लिए भारत की प्रशंसा की। साथ ही वित्तीय अनुशासन और वैश्विक झटकों से निपटने की क्षमता को भी सराहा गया।
रुपये की गिरावट को IMF ने कैसे देखा?
IMF के एशिया-प्रशांत निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने स्पष्ट किया कि रुपये पर पड़ा दबाव आर्थिक कमज़ोरी का संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि विनिमय दरें वैश्विक ब्याज दरों, निवेशकों की धारणा और कच्चे तेल की कीमतों जैसे अनेक कारकों से प्रभावित होती हैं।
भारत की संशोधित जीडीपी गणना पद्धति पर IMF का क्या रुख है?
IMF ने भारत की संशोधित जीडीपी गणना पद्धति का समर्थन किया है और इसे अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बताया है। MoSPI द्वारा राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी को बेहतर बनाने के प्रयासों को भी सराहना मिली।
अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर कितनी रही?
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जो अपेक्षाओं से बेहतर रही और IMF द्वारा विकास दर अनुमान संशोधित करने का एक प्रमुख कारण बना।
राष्ट्र प्रेस
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