भारत की 7% से अधिक GDP वृद्धि पाँच साल तक बरकरार, IMF-ADB-विश्व बैंक ने बढ़ाए अनुमान: अर्थशास्त्री क्युंघून किम
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), एशियाई विकास बैंक (ADB) और विश्व बैंक सहित तमाम प्रमुख वैश्विक संस्थानों ने हाल ही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान बढ़ाकर चालू वर्ष और अगले वर्ष दोनों के लिए 7 प्रतिशत से अधिक कर दिए हैं। प्रमुख अर्थशास्त्री क्युंघून किम ने 17 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिये यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह अनुमान-वृद्धि अपने आप में भारत के मज़बूत आर्थिक प्रदर्शन को रेखांकित करती है। उनके अनुसार, भारत ने 2021 से 2025 के बीच लगातार पाँच वर्षों तक 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल की है।
ऐतिहासिक संदर्भ: 2003-2007 से तुलना
किम ने बताया कि महामारी के दौरान 5.8 प्रतिशत की गिरावट झेलने के बाद भारत ने 2021 में 9.7 प्रतिशत की तीव्र रिकवरी दर्ज की। इसके बाद अगले चार लगातार वर्षों में भी वृद्धि 7 प्रतिशत से ऊपर बनी रही। उन्होंने इसकी तुलना 2003-2007 के उस दौर से की जब भारत ने BRIC अर्थव्यवस्थाओं में अपनी पहचान बनाई थी।
किम ने कहा, 'इस तरह भारत ने लगातार पाँच वर्षों तक 7 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। यह 2003-2007 के दौर के बराबर है। यदि मौजूदा अनुमान सही साबित होते हैं, तो भारत इस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा।'
औसत वृद्धि दर का रिकॉर्ड
2021-2025 की अवधि में भारत की औसत वार्षिक वृद्धि दर 7.83 प्रतिशत रही। किम के अनुसार, 1960 से उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर यह किसी भी पाँच वर्षीय अवधि की दूसरी सबसे ऊँची औसत वृद्धि दर है। इससे पहले केवल 2003-2007 में 7.89 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर्ज हुई थी।
गौरतलब है कि यह तुलनात्मक उपलब्धि उस समय आई है जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव, भू-राजनीतिक तनाव और उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में मंदी की आशंकाएँ बनी हुई हैं।
GDP का बढ़ता आकार: आज की 7% वृद्धि कहीं अधिक बड़ी
किम ने एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान दिलाया — आज की 7 प्रतिशत की वृद्धि और 2007 की 7 प्रतिशत की वृद्धि में ज़मीन-आसमान का फर्क है। उन्होंने कहा, '2007 में भारत की जीडीपी 1 लाख करोड़ डॉलर से थोड़ी अधिक थी, जबकि अब यह लगभग 4 लाख करोड़ डॉलर के करीब है। इस कारण 7 प्रतिशत की समान वृद्धि दर का मतलब आज अर्थव्यवस्था का कहीं अधिक बड़ा विस्तार है।'
यह ऐसे समय में आया है जब IMF ने अक्टूबर में अनुमान जताया था कि भारत 2027 में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, जब भारत की नॉमिनल जीडीपी लगभग 4.5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
चुनौतियाँ और आगे की राह
किम ने यह भी स्वीकार किया कि 1.4 अरब की आबादी वाले देश के सामने अभी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, 'कई चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन यह आर्थिक प्रदर्शन जश्न मनाने योग्य है।' उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली तिमाही के GDP आँकड़े आने पर संस्थागत अर्थशास्त्री अपने अनुमान और बढ़ाएँगे।
कई तिमाहियों तक GDP के वास्तविक आँकड़े अनुमानों से बेहतर रहे, जिसके चलते बार-बार ऊपरी संशोधन करना पड़ा — यह प्रवृत्ति भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित ताक़त को दर्शाती है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या घरेलू माँग, निर्यात और निजी निवेश यह गति बनाए रख सकते हैं।