भारतीय GDP वृद्धि दर Q2 में 7.3% रहने का अनुमान, Q1 में मौजूदा शृंखला का सर्वोच्च 7.8% दर्ज: वित्त मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्रालय ने 1 अक्टूबर 2026 को जारी सितंबर माह की 'मंथली इकोनॉमिक रिव्यू' में अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहेगी। वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया संघर्ष और ऊर्जा बाज़ारों में अस्थिरता के बीच यह अनुमान भारत की आर्थिक मज़बूती को रेखांकित करता है।
पहली तिमाही का प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून 2026) में भारत ने 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज की। मंत्रालय के अनुसार, यह मौजूदा शृंखला में किसी भी वित्त वर्ष की पहली तिमाही का सर्वोच्च स्तर है। विनिर्माण, निर्माण और सेवा क्षेत्रों ने व्यापक आधार पर मज़बूत प्रदर्शन किया, जबकि निवेश दर मौजूदा शृंखला के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई।
औद्योगिक क्षेत्र में वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (GVA) 7.7 प्रतिशत बढ़ा, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र ने 9.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे बड़ा योगदान दिया। समीक्षा रिपोर्ट में इसे घरेलू माँग और निवेश के दोहरे समर्थन का परिणाम बताया गया है।
दूसरी तिमाही के प्रमुख संकेतक
जुलाई 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। कोर सेक्टर इंडेक्स 4.8 प्रतिशत बढ़ा। अगस्त 2026 में मैन्युफैक्चरिंग PMI 52.8 पर रहा, जो विस्तार क्षेत्र को दर्शाता है। वहीं सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में नए कारोबार और रोज़गार वृद्धि के बल पर मज़बूती देखी गई।
गौरतलब है कि कुछ उच्च-आवृत्ति संकेतकों में थोड़ी नरमी भी रही — ई-वे बिल जनरेशन और मैन्युफैक्चरिंग PMI की वृद्धि दर पहले की तुलना में कुछ धीमी रही। मंत्रालय ने इसे दूसरी तिमाही में 'संतुलित गति' का संकेत बताया है।
महंगाई और ऊर्जा कीमतें
वित्त मंत्रालय ने स्वीकार किया कि वैश्विक तेल कीमतों में उछाल और मौसम-जनित अस्थिरता के कारण खुदरा, थोक और उत्पादक स्तर पर मूल्य दबाव बढ़ा है। बावजूद इसके, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की टोकरी में शामिल लगभग 69 प्रतिशत वस्तुओं की महंगाई दर अभी भी 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों का सीमित असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ने से आर्थिक गतिविधियाँ अप्रभावित रहीं।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाएँ बाधित हो रही हैं और कई उभरती अर्थव्यवस्थाएँ आयात लागत के दबाव से जूझ रही हैं।
निर्यात और मुक्त व्यापार समझौते
समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पाँच महीनों में भारत का कुल निर्यात मूल्य करीब 400 अरब डॉलर की वार्षिक रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। यदि यह गति बनी रही, तो पूरे वित्त वर्ष में भारत का कुल निर्यात एक ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुँच सकता है। वित्त मंत्रालय ने इसे भारत द्वारा हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का प्रत्यक्ष प्रभाव बताया, जो भारतीय उत्पादों के लिए नए वैश्विक बाज़ार खोल रहे हैं।
आगे की राह
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में घरेलू क्षमता बढ़ाने के लिए हालिया नीतिगत कदमों का सकारात्मक असर दिखना शुरू हुआ है। बैंक ऋण वितरण मज़बूत बना हुआ है और बिजली तथा ईंधन खपत में स्वस्थ वृद्धि जारी है। मंत्रालय का कहना है कि सरकार के समय पर हस्तक्षेप ने अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई है। नाउकास्टिंग मॉडल के अनुमान और उच्च-आवृत्ति संकेतकों के मिले-जुले संकेत यह दर्शाते हैं कि आने वाली तिमाहियों में वृद्धि की गुणवत्ता और टिकाऊपन ही असली परीक्षा होगी।