वैश्विक चुनौतियों के बावजूद वित्तीय वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8%25 से अधिक रहने की संभावना: एसबीआई रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8 से 8.1%25 के बीच रहने की संभावना।
- घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है।
- नया जीडीपी आधार वर्ष 2022-23 होगा।
- ग्रामीण खपत में सकारात्मक सुधार।
- महत्वपूर्ण पद्धतिगत बदलावों का अनुमान।
नई दिल्ली, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के शोध विभाग द्वारा मंगलवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष २०२५-२६ की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर ८ से ८.१ प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है। यह रिपोर्ट वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि को उजागर करती है।
उच्च आवृत्ति (हाई-फ्रीक्वेंसी) गतिविधियों के आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष २०२६ की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर २०२५) में आर्थिक गतिविधियां निरंतर मजबूत बनी रहीं।
एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने बताया, "ग्रामीण खपत में मजबूती बनी हुई है, जो कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों से सकारात्मक संकेत प्राप्त कर रही है। राजकोषीय प्रोत्साहन (फिस्कल स्टिम्युलस) के समर्थन से शहरी खपत में भी पिछले त्योहारी सीजन से सुधार देखा जा रहा है।"
पहले के अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्तीय वर्ष २०२६ में जीडीपी वृद्धि दर ७.४ प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें वृद्धि का मुख्य आधार घरेलू मांग है।
भारत अपनी जीडीपी के आधार वर्ष को २०११-१२ से बदलकर २०२२-२३ कर रहा है, और नई श्रृंखला २७ फरवरी को जारी की जाएगी।
यह संशोधन और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार वर्ष को २०२४ में अपडेट करने का उद्देश्य मौजूदा आर्थिक संरचना को बेहतर तरीके से दर्शाना है, जिसमें डिजिटल कॉमर्स और सेवाओं की बढ़ती भूमिका शामिल है।
इस बदलाव में अनौपचारिक क्षेत्र के बेहतर आकलन और जीएसटी जैसे नए डेटा स्रोतों को शामिल किया जाएगा, जिससे भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "महत्वपूर्ण पद्धतिगत बदलाव और नई डेटा श्रृंखला के जारी होने के कारण संशोधन की सीमा का अनुमान लगाना कठिन है।"
नई पद्धति में जीएसटी रिकॉर्ड, ई-वाहन (वाहन पंजीकरण) और प्राकृतिक गैस खपत जैसी अधिक विस्तृत जानकारियों को शामिल किया जाएगा।
वित्तीय वर्ष २०२५-२६ के लिए जीडीपी के दूसरे अग्रिम अनुमान और पिछले तीन वित्तीय वर्षों के जीडीपी आंकड़े, साथ ही २०२२-२३ आधार वर्ष के अनुसार तिमाही जीडीपी अनुमान २७ फरवरी को जारी किए जाएंगे।
हालिया आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की संभावित जीडीपी लगभग ७ प्रतिशत आंकी गई है और वित्तीय वर्ष २०२७ में इसके ६.८ से ७.२ प्रतिशत के बीच बढ़ने का अनुमान है।
इस दौरान, वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से प्रभावित है। २०२५ और २०२६ में वैश्विक वृद्धि दर ३.३ प्रतिशत रहने का अनुमान है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव, ऊंचे कर्ज और डिजिटलीकरण तथा डीकार्बोनाइजेशन जैसे संरचनात्मक बदलावों के कारण अन्य क्षेत्रों में वृद्धि असमान रह सकती है।