भारत की GDP वृद्धि दर Q1 FY27 में 7.8%, दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्था बरकरार: डॉ. सौरभ गर्ग
सारांश
मुख्य बातें
भारत वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने 31 अगस्त को मीडिया से बातचीत में कहा कि यह आँकड़ा केंद्र सरकार के नीतिगत हस्तक्षेपों की सफलता और भारतीय परिवारों की सतत आर्थिक सक्रियता का प्रमाण है। यह वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 6.9 प्रतिशत से 0.9 प्रतिशत अधिक है।
मुख्य आँकड़े और घटनाक्रम
जीडीपी डेटा जारी होने के बाद डॉ. गर्ग ने कहा कि भारत बीते तीन वर्षों में लगातार तेज़ वृद्धि हासिल करने में सफल रहा है। इस तिमाही में नॉमिनल जीडीपी में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जबकि वास्तविक ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में 8.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
गर्ग ने इस मज़बूत प्रदर्शन का श्रेय निजी अंतिम उपभोग व्यय, कॉर्पोरेट निवेश और सरकारी पूँजीगत व्यय को दिया — तीनों मोर्चों पर एक साथ गति को उन्होंने असाधारण बताया।
सुधारों की भूमिका
डॉ. गर्ग ने अर्थव्यवस्था की मज़बूती के पीछे संरचनात्मक सुधारों को अहम बताया। उन्होंने कहा कि बीते एक वर्ष में लागू जीएसटी 2.0 जैसे सुधारों का सीधा असर लेनदेन की मात्रा और पारदर्शिता पर पड़ा है। साथ ही डेटा संग्रह के स्रोतों में भी सुधार हुआ है, जिससे नीति-निर्माण अधिक सटीक हो सका है। उन्होंने कहा, 'अगर हम किसी चीज़ की सही तरीके से निगरानी कर पाते हैं तो उस आधार पर सही कदम उठाना संभव होता है।'
वित्त मंत्री की प्रतिक्रिया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस आँकड़े पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर अर्थव्यवस्था की मज़बूती और लचीलेपन को दर्शाती है। उन्होंने इस प्रदर्शन का श्रेय भारत के नागरिकों की मेहनत के साथ-साथ एनडीए सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों और कुशल प्रबंधन को दिया।
आम जनता और निवेशकों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मंदी की आशंका और भू-राजनीतिक तनाव कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर पर दबाव डाल रहे हैं। भारत का 7.8 प्रतिशत का आँकड़ा इसे प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर रखता है। गौरतलब है कि यह लगातार तीसरा वर्ष है जब भारत ने वैश्विक औसत से काफ़ी ऊपर वृद्धि दर्ज की है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरी तिमाही के आँकड़े यह तय करेंगे कि क्या यह गति टिकाऊ है। उपभोक्ता माँग और निजी निवेश की निरंतरता, मानसून के प्रदर्शन और वैश्विक माँग पर निर्भर करेगी। सरकार के अनुसार, डेटा-आधारित नीति-निर्माण और संरचनात्मक सुधारों की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।