श्रीनगर कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिग को गाड़ी चलाने देने पर पिता को तीन साल की सजा, ₹25,000 जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
श्रीनगर की स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट (ट्रैफिक) कोर्ट ने 14 जून 2026 को एक वाहन मालिक को अपने नाबालिग बेटे को गाड़ी चलाने की अनुमति देने के लिए दोषी ठहराते हुए तीन साल की साधारण कैद और ₹25,000 जुर्माने का प्रस्ताव दिया। आरोपी हारून खान, जो श्रीनगर के फतेह कदल के निवासी हैं, को मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 199-ए और 180 के तहत दोषी माना गया।
मामले का घटनाक्रम
मामले के अभिलेखों के अनुसार, ट्रैफिक अधिकारियों ने एक नाबालिग को हारून खान की गाड़ी चलाते हुए पाया। चालान पेश होने के बाद खान वकील के माध्यम से कोर्ट में उपस्थित हुए और वाहन के स्वामित्व को स्वीकार किया। कार्यवाही के दौरान उन्होंने अपराध स्वीकार कर लिया और ट्रायल की माँग नहीं की, जिसके बाद कोर्ट ने उनका बयान दर्ज कर उन्हें दोषी ठहराया।
कानूनी प्रावधान और सजा का विवरण
मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 199-ए के तहत जब कोई नाबालिग इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध करता है, तो वाहन के अभिभावक या मालिक को उत्तरदायी माना जाता है। इस प्रावधान में कारावास, जुर्माना और वाहन का पंजीकरण रद्द करने का कठोर दंड निर्धारित है।
कोर्ट ने धारा 199-ए के तहत तीन साल की साधारण कैद और ₹25,000 जुर्माना, तथा धारा 180 के तहत तीन महीने की साधारण कैद और ₹1,000 जुर्माने का प्रस्ताव दिया। दोनों सजाएँ एक साथ चलने का आदेश दिया गया। इसके अतिरिक्त, वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र एक वर्ष के लिए रद्द कर दिया गया।
प्रोबेशन का लाभ और राहत
कोर्ट ने कई कारकों पर विचार करते हुए — जिनमें अपराध में किसी अनैतिक कृत्य का अभाव, आरोपी का कोई पूर्व दोषसिद्धि रिकॉर्ड न होना, तथा उनकी आयु और पृष्ठभूमि शामिल हैं — आरोपी को 'प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट' का लाभ प्रदान किया। खान को दो वर्षों तक शांति बनाए रखने और सदाचरण के लिए ₹2 लाख का बॉन्ड भरने का निर्देश दिया गया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन होने पर प्रस्तावित सजा लागू होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि इस दोषसिद्धि के कारण सरकारी या निजी नौकरी, पासपोर्ट सत्यापन अथवा इसी प्रकार के कार्यों में कोई अयोग्यता नहीं मानी जाएगी।
फैसले का महत्व
यह फैसला जम्मू-कश्मीर में सड़क सुरक्षा कानूनों के प्रवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की घटनाएँ देशभर में सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण रही हैं, और मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 में 2019 में किए गए संशोधनों ने इस श्रेणी के अपराधों के लिए दंड को काफी कठोर किया था। यह ऐसे समय में आया है जब नाबालिग चालकों से जुड़ी दुर्घटनाओं पर राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है।
यह फैसला स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट (ट्रैफिक), शब्बीर अहमद मलिक ने सुनाया। वाहन और उससे संबंधित दस्तावेज़ पंजीकृत मालिक को सौंपने का आदेश भी दिया गया।