1 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मेघालय पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: सौतेली बेटी के यौन उत्पीड़न में दोषी को 30 वर्ष की कठोर कैद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मेघालय पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला: सौतेली बेटी के यौन उत्पीड़न में दोषी को 30 वर्ष की कठोर कैद

सारांश

मेघालय की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 2020 में दर्ज नाबालिग सौतेली बेटी के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी टेरेन मॉलिह को 30 वर्ष की कठोर कैद सुनाई। हिरासत में बिताए 3 वर्ष 11 महीने घटाने के बाद अब उसे 26 वर्ष और जेल में रहना होगा — घरेलू यौन हिंसा के खिलाफ न्यायिक सख्ती का स्पष्ट संदेश।

मुख्य बातें

शिलॉन्ग की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 28 अगस्त 2026 को टेरेन मॉलिह को दोषी करार देते हुए 30 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई।
मामला 7 दिसंबर 2020 को पूर्वी खासी हिल्स के मॉन्गैप पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था; चार्जशीट 5 फरवरी 2021 को दाखिल की गई।
दोषी को पॉक्सो की धाराओं 4, 6, 8 और 10 के तहत अलग-अलग सजाएँ; कुल जुर्माना ₹1 लाख ।
हिरासत में बिताए 3 वर्ष 11 महीने 28 दिन घटाने के बाद अब शेष 26 वर्ष जेल में काटने होंगे।
मामले की जाँच महिला पुलिस उप-निरीक्षक एल.

शिलॉन्ग की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 28 अगस्त 2026 को नाबालिग सौतेली बेटी के साथ यौन शोषण के दोषी टेरेन मॉलिह को 30 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। यह मामला 7 दिसंबर 2020 को पूर्वी खासी हिल्स जिले के मॉन्गैप पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। स्पेशल जज (पॉक्सो) एम.के. लिंगदोह की अध्यक्षता में सुनाया गया यह फैसला बाल यौन शोषण के विरुद्ध न्यायिक सख्ती का स्पष्ट संदेश है।

मुख्य घटनाक्रम

ईस्ट खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक विवेक स्यिम के अनुसार, मामला दर्ज होने के बाद जाँच के दौरान मॉलिह को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 5 फरवरी 2021 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की। मामले की जाँच महिला पुलिस उप-निरीक्षक एल. खारजाना ने की, जो वर्तमान में ईस्ट खासी हिल्स के महिला पुलिस स्टेशन में तैनात हैं।

अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धाराओं के तहत मॉलिह को दोषी ठहराया।

धारावार सजा का विवरण

कोर्ट ने मॉलिह को पॉक्सो अधिनियम की चार धाराओं — 4, 6, 8 और 10 — के तहत अलग-अलग सजा सुनाई:

धारा 4 के तहत 20 वर्ष की जेल और ₹30,000 का जुर्माना। जुर्माना न भरने पर तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कैद।

धारा 6 के तहत 30 वर्ष की कठोर कारावास और ₹40,000 का जुर्माना। जुर्माना न भरने पर चार महीने की अतिरिक्त जेल।

धारा 8 के तहत पाँच वर्ष की जेल और ₹10,000 का जुर्माना। जुर्माना न भरने पर एक महीने की अतिरिक्त कैद।

धारा 10 के तहत सात वर्ष की जेल और ₹20,000 का जुर्माना। जुर्माना न भरने पर एक महीने की अतिरिक्त साधारण कैद।

हिरासत अवधि का समायोजन

पुलिस के अनुसार, कोर्ट ने सजा तय करते समय मॉलिह द्वारा पहले ही हिरासत में बिताई गई अवधि को ध्यान में रखा। मॉलिह पहले ही हिरासत में 3 वर्ष, 11 महीने और 28 दिन बिता चुका था। इस समायोजन के बाद मॉलिह को अब 26 वर्ष और जेल में रहना होगा।

आम जनता पर असर

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देशभर में पॉक्सो मामलों में त्वरित न्याय और कड़ी सजा की माँग लगातार उठती रही है। मेघालय की इस स्पेशल पॉक्सो कोर्ट का निर्णय घरेलू परिवेश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक मजबूत मिसाल स्थापित करता है। गौरतलब है कि मामला दर्ज होने से लेकर दोषसिद्धि तक की यह प्रक्रिया लगभग छह वर्षों में पूरी हुई।

क्या होगा आगे

दोषी को अब शेष 26 वर्ष की सजा काटनी होगी। जुर्माने की राशि अदा न होने पर अतिरिक्त कारावास का प्रावधान भी लागू होगा। इस मामले के फैसले से राज्य में पॉक्सो मामलों की सुनवाई में और तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आदर्श नहीं है, लेकिन कई लंबित पॉक्सो मामलों की तुलना में फिर भी बेहतर है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य में पीड़ित पुनर्वास और गवाह संरक्षण तंत्र उतना ही मजबूत है जितनी सजा — क्योंकि न्याय केवल दोषसिद्धि से नहीं, पीड़ित के जीवन की बहाली से भी मापा जाता है। घरेलू परिवेश में होने वाले यौन अपराधों में अक्सर रिपोर्टिंग दर कम रहती है; यह फैसला उन परिवारों को साहस दे सकता है जो अभी भी चुप हैं।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय पॉक्सो मामले में किसे और क्या सजा मिली?
शिलॉन्ग की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने टेरेन मॉलिह को नाबालिग सौतेली बेटी के यौन उत्पीड़न में दोषी पाते हुए 30 वर्ष की कठोर कारावास और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला 28 अगस्त 2026 को स्पेशल जज एम.के. लिंगदोह ने सुनाया।
यह मामला कब और कहाँ दर्ज हुआ था?
यह मामला 7 दिसंबर 2020 को मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले के मॉन्गैप पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। पुलिस ने IPC और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
दोषी को अब कितने वर्ष जेल में रहना होगा?
कोर्ट ने हिरासत में बिताए 3 वर्ष 11 महीने 28 दिन को सजा में समायोजित किया है। इसलिए टेरेन मॉलिह को अब 26 वर्ष और जेल में रहना होगा।
पॉक्सो की किन धाराओं में दोषी ठहराया गया?
मॉलिह को पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 (20 वर्ष जेल), धारा 6 (30 वर्ष कठोर कारावास), धारा 8 (5 वर्ष जेल) और धारा 10 (7 वर्ष जेल) के तहत दोषी ठहराया गया। प्रत्येक धारा में अलग जुर्माना भी लगाया गया है।
इस मामले की जाँच किसने की?
इस मामले की जाँच महिला पुलिस उप-निरीक्षक एल. खारजाना ने की, जो वर्तमान में ईस्ट खासी हिल्स के महिला पुलिस स्टेशन में तैनात हैं। चार्जशीट 5 फरवरी 2021 को अदालत में दाखिल की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले