तेलंगाना हाई कोर्ट ने हाइड्रा कमिश्नर रंगनाथ को राहत, सिंगल जज का हटाने का आदेश अस्थायी रूप से निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने 1 सितंबर 2026 को हैदराबाद डिजास्टर रिस्पॉन्स एंड एसेट प्रोटेक्शन एजेंसी (हाइड्रा) के कमिश्नर ए.वी. रंगनाथ को बड़ी राहत देते हुए सिंगल जज के उस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी, जिसमें राज्य सरकार को उन्हें पद से हटाकर किसी अन्य अधिकारी को नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। यह मामला हैदराबाद में सरकारी भूमि संरक्षण और न्यायालय की अवमानना के गंभीर आरोपों से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
जस्टिस अनिल कुमार जुकांती ने 27 जुलाई को राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि रंगनाथ को हाइड्रा कमिश्नर पद से तत्काल हटाया जाए। यह आदेश शांता श्रीराम कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर अवमानना याचिका पर आया था।
कंपनी का आरोप था कि हाइड्रा के अधिकारी 50 वाहनों और 200 कर्मचारियों के साथ लोथकुंटा स्थित उनकी 40 एकड़ भूमि में बिना अनुमति घुस गए और कोर्ट के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया।
सिंगल जज की कड़ी टिप्पणियाँ
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रंगनाथ पर गंभीर टिप्पणियाँ कीं। जस्टिस जुकांती ने कहा था कि वे 'अपनी मर्जी से काम करने वाले' बन गए हैं और हाइड्रा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य कर रहा है — राजस्व, सिंचाई और GHMC विभागों को नज़रअंदाज़ करते हुए।
कोर्ट ने यहाँ तक चेतावनी दी थी कि बार-बार आदेश उल्लंघन की स्थिति में उन्हें सेना की हिरासत में लेकर आर्मी बैरक में रखने का निर्देश दिया जा सकता है। रंगनाथ को एक हलफनामा दाखिल करने को कहा गया था, जिसमें विवादित संपत्ति में अनधिकृत प्रवेश और बाड़ लगाने के लिए माफी माँगी जानी थी — किंतु हलफनामा दाखिल नहीं हुआ और अधिकारी सुनवाई में अनुपस्थित रहे।
गौरतलब है कि लगभग डेढ़ साल की अवधि में रंगनाथ के खिलाफ 63 अवमानना याचिकाएँ लंबित हो चुकी थीं।
डिवीजन बेंच में राहत
रंगनाथ ने 27 जुलाई के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी। उनकी ओर से हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राजीव शकधर ने पैरवी की। प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद बेंच ने सिंगल जज के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी, जिससे रंगनाथ फिलहाल अपने पद पर बने रह सकते हैं।
रंगनाथ का पक्ष और हाइड्रा का दावा
आदेश के बाद रंगनाथ ने कहा कि वे अपने खिलाफ दायर सभी 63 अवमानना मामलों का कानूनी तरीके से सामना करेंगे और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी मामले प्रभावशाली अतिक्रमणकारियों द्वारा दायर किए गए हैं, जो झीलों और सरकारी ज़मीनों की रक्षा के लिए हाइड्रा के अभियान से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा — 'सरकार द्वारा मुझे सौंपी गई जिम्मेदारियों की परवाह किए बिना मैं 100 प्रतिशत परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।'
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी रंगनाथ लगभग दो साल पहले राज्य सरकार द्वारा स्थापित हाइड्रा के प्रमुख हैं। एजेंसी का दावा है कि उसने अब तक ₹1.5 लाख करोड़ मूल्य की 3,315 एकड़ सरकारी भूमि को अतिक्रमण से बचाया है और अनेक जल निकायों को पुनर्स्थापित किया है।
विवाद और विपक्ष की आलोचना
हाइड्रा के कामकाज को लेकर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि एजेंसी ने सरकारी ज़मीन पर बसे गरीब परिवारों के घरों को बुलडोजर से ध्वस्त किया है। यह विवाद ऐसे समय में और गहरा हो गया है जब तेलंगाना में शहरी भूमि अधिकार और झील संरक्षण एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। मामले की अगली सुनवाई में डिवीजन बेंच के रुख पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।