तेलंगाना हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: HYDRAA कमिश्नर रंगनाथ को हटाएँ, 63 अवमानना मामले लंबित
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सोमवार, 27 जुलाई को मुख्य सचिव संजय जाजू को निर्देश दिया कि वे हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया एवं संपत्ति संरक्षण एजेंसी (HYDRAA) के आयुक्त एवी रंगनाथ को तत्काल पद से हटाकर उनके स्थान पर किसी उपयुक्त अधिकारी की नियुक्ति करें। न्यायमूर्ति अनिल कुमार जुकांति ने यह कड़ा आदेश रंगनाथ द्वारा अदालती निर्देशों की बार-बार अवहेलना के चलते जारी किया। यह मामला हैदराबाद के लोथकुंटा क्षेत्र में स्थित 40 एकड़ भूमि से जुड़े अवमानना प्रकरण से उत्पन्न हुआ है।
मामले की पृष्ठभूमि
एक निजी निर्माण कंपनी ने HYDRAA अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने न्यायालय की निषेधाज्ञा के बावजूद लोथकुंटा स्थित संपत्ति में प्रवेश कर बाड़ लगाई। इसी के आधार पर अवमानना याचिका दायर की गई थी। न्यायमूर्ति जुकांति ने इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिलाया कि रंगनाथ के डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में उनके विरुद्ध उच्च न्यायालय में कथित तौर पर 63 अवमानना मामले लंबित हो चुके हैं।
माफ़ीनामे की अनदेखी और अदालत की कड़ी प्रतिक्रिया
न्यायालय ने रंगनाथ को सोमवार तक लिखित हलफनामे के ज़रिये माफ़ी माँगने का आदेश दिया था। किंतु HYDRAA का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने अदालत को सूचित किया कि हलफनामे की जगह एक याचिका दायर की जाएगी। अदालत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और स्पष्ट किया कि एडवोकेट जनरल के हस्तक्षेप के बाद सोमवार तक का समय विशेष रूप से हलफनामा दाखिल करने के लिए दिया गया था।
पिछली सुनवाई में सेना तैनाती की चेतावनी
पिछली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जुकांति ने यहाँ तक कह दिया था कि यदि आवश्यक हुआ तो वे सेना को HYDRAA आयुक्त को हिरासत में लेकर बाइसन डिवीजन की सैन्य बैरक में रखने का निर्देश दे सकते हैं। उन्होंने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को बाइसन डिवीजन में तैनात सबसे वरिष्ठ ब्रिगेडियर से संपर्क कर विवादित स्थल पर 10 सैन्य कर्मियों की तैनाती की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। इसके बाद एडवोकेट जनरल सुदर्शन रेड्डी ने रंगनाथ की ओर से न्यायालय को आश्वस्त किया था कि वे अदालती आदेशों का पालन करेंगे।
HYDRAA का कार्य और विवाद
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी रंगनाथ राज्य सरकार द्वारा लगभग दो वर्ष पूर्व गठित HYDRAA के प्रमुख हैं। एजेंसी का दावा है कि उसने पिछले दो वर्षों में ₹1.5 लाख करोड़ मूल्य की 3,315 एकड़ सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है तथा कई जल निकायों को पुनर्स्थापित किया है। न्यायमूर्ति जुकांति ने स्वयं माना कि सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा करने का HYDRAA का मिशन सराहनीय है, परंतु साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि एजेंसी की शक्तियों का प्रयोग संयम और कानून के शासन के कड़े अनुपालन में ही होना चाहिए।
विपक्ष की आलोचना और आगे की राह
विपक्षी दलों ने HYDRAA पर आरोप लगाया है कि एजेंसी सरकारी ज़मीन पर रह रहे गरीबों के घरों को बुलडोजर से ध्वस्त कर रही है। अब मुख्य सचिव संजय जाजू को न्यायालय के आदेश के अनुसार रंगनाथ के स्थान पर उपयुक्त अधिकारी की पहचान करनी होगी। यह घटनाक्रम HYDRAA के संचालन और जवाबदेही पर व्यापक सवाल खड़े करता है, जिनका उत्तर आने वाले दिनों में देना होगा।