हैदराबाद: हाइड्रा ने 16 ट्रांसजेंडर लोगों को दिया सम्मानजनक रोजगार, 'ईगल टीम' में हुए शामिल
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया और संपत्ति संरक्षण एजेंसी (हाइड्रा) ने 29 मई 2026 को एक ऐतिहासिक पहल के तहत 16 ट्रांसजेंडर लोगों को अपने बल में शामिल किया है — जिनमें 11 ट्रांस महिलाएं और 5 ट्रांस पुरुष हैं। तेलंगाना सरकार की इस एजेंसी ने इन्हें 'हाइड्रा ईगल टीम' का हिस्सा बनाया है, जो हैदराबाद और उसके आसपास के क्षेत्रों में जल निकायों तथा सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रही है।
क्या है यह पहल और इसका दायरा
हाइड्रा हाल के महीनों में हैदराबाद और आसपास के इलाकों में झीलों, जल निकासी चैनलों और सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने की मुहिम के लिए चर्चा में रहा है। एजेंसी के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ये 16 ट्रांसजेंडर कर्मचारी किसी भी समय और कहीं भी ड्यूटी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इन्हें अतिक्रमणकारियों की हैसियत या प्रभाव की परवाह किए बिना निडरता से काम करने के लिए सराहा गया है।
मुख्य अभियानों में भूमिका
ट्रांसजेंडर टीम ने संगारेड्डी जिले के अमीनपुर मंडल स्थित ऐलापुर में 862 एकड़ सरकारी भूमि की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा उन्होंने माधोपुर में एडुलाकुंटा झील को बचाने के अभियान में भी सक्रिय योगदान दिया। वे सार्वजनिक पार्कों और सामुदायिक उपयोग की भूमि की निगरानी में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
हाइड्रा अधिकारियों के अनुसार, इन कर्मचारियों में लोगों की भावनाओं को समझने और सहानुभूति रखने की स्वाभाविक क्षमता है। वे तनावपूर्ण स्थितियों में महिलाओं से संवाद स्थापित करने, अधिकारियों और समुदाय के बीच तालमेल बिठाने तथा भीड़ को समझाने-बुझाने में विशेष रूप से प्रभावी साबित हो रहे हैं।
टीम के सदस्यों की आवाज़
तांशी राय ने कहा, 'हम गुजारे के लिए भीख माँग रहे थे। पहले हम जहाँ भी जाते थे, हमारा मज़ाक उड़ाया जाता था। अगर हम काम माँगते थे, तो हमें मना कर दिया जाता था — लेकिन अब, जब हम अपनी ड्यूटी करने के लिए यूनिफॉर्म पहनकर निकलते हैं तो हर कोई हमसे इज्जत से बात करता है।' उन्होंने यह भी कहा कि हर महीने एक निश्चित आमदनी और समाज में बढ़ी हुई प्रतिष्ठा ने उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया है।
गायत्री ने कहा, 'अगर मौका मिले, तो ट्रांसजेंडर लोग किसी भी क्षेत्र में बेहतरीन काम कर सकते हैं। हाइड्रा में हमारी ड्यूटी इस बात का सबूत है। अधिकारियों से लेकर हर दूसरे स्टाफ सदस्य तक — हर कोई हमारा पूरा साथ देता है और हमारे साथ बराबरी का बर्ताव किया जाता है।'
सामाजिक और आर्थिक असर
इस रोजगार से इन कर्मचारियों के परिवारों को भी आर्थिक सहारा मिल रहा है। टीम के सदस्यों का कहना है कि हाइड्रा की वर्दी पहनना उनके लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक नई सामाजिक पहचान का प्रतीक है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब देशभर में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए मुख्यधारा के रोजगार के अवसर अभी भी सीमित हैं और सरकारी संस्थाओं में उनका समावेश एक दुर्लभ घटना मानी जाती है।
आगे की राह
हाइड्रा की यह पहल तेलंगाना में समावेशी सरकारी नियोजन की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम के रूप में देखी जा रही है। गौरतलब है कि यह एजेंसी अपने कड़े अतिक्रमण-विरोधी अभियानों के लिए पहले से चर्चा में है, और अब ट्रांसजेंडर समुदाय को इस अभियान का हिस्सा बनाकर उसने एक नई मिसाल कायम की है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य सरकारी एजेंसियाँ भी इस मॉडल को अपनाती हैं।