रेवंत रेड्डी ने हिटलर से प्रेरणा का किया दावा, किशन रेड्डी ने माँगी बिना शर्त माफी
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 7 जून को बेंगलुरु में आयोजित 'द हिंदूज़ हडल: इंडिया इन डायलॉग' कार्यक्रम में स्वीकार किया कि उन्होंने जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर से प्रेरणा लेकर हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया एवं संपत्ति संरक्षण एजेंसी (हाइड्रा) का गठन किया था। इस बयान पर केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए रेवंत रेड्डी से तेलंगाना की जनता से बिना शर्त माफी माँगने की माँग की है।
मुख्य घटनाक्रम
रेवंत रेड्डी ने बेंगलुरु के उक्त सार्वजनिक मंच पर यह टिप्पणी करते हुए कहा कि हाइड्रा के गठन के पीछे हिटलर की कार्यशैली से प्रेरणा ली गई थी। उन्होंने हैदराबाद में हुए विध्वंस अभियानों की तुलना ईरान और इज़राइल जैसे युद्धग्रस्त देशों में हुई कार्रवाइयों से भी की।
किशन रेड्डी की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने रेवंत रेड्डी का वीडियो एक्स पर साझा करते हुए लिखा, 'कांग्रेस की खतरनाक हिटलर और आपातकाल वाली मानसिकता एक बार फिर खुलकर सामने आई। रेवंत रेड्डी खुलेआम शेखी बघार रहे हैं कि हिटलर ने उन्हें हाइड्रा बनाने के लिए प्रेरित किया।' किशन रेड्डी ने यह भी कहा कि युद्धग्रस्त देशों से तुलना उनके नेता राहुल गांधी की भाषा की प्रतिध्वनि है और आपातकाल से लेकर हिटलर तक — कांग्रेस ने हमेशा जनता की आवाज़ दबाई है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
गौरतलब है कि 17 मई को भी किशन रेड्डी ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर किसानों से धान खरीद में देरी करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि खरीद के लिए आवश्यक बोरे, परिवहन, ऋण, ब्याज और गोदाम किराए तक का खर्च केंद्र सरकार वहन कर रही है, फिर भी राज्य सरकार प्रक्रिया में देरी कर रही है।
किसान और उर्वरक मुद्दा
किशन रेड्डी ने यह भी बताया था कि केंद्र सरकार 45 किलो यूरिया की एक बोरी किसानों को मात्र ₹242 में दे रही है, जबकि उसकी वास्तविक लागत ₹2,500 है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उर्वरकों की कीमतें बढ़ने के बावजूद केंद्र सरकार ने वर्षों से यूरिया की कीमत में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं की।
आगे क्या
रेवंत रेड्डी के बयान ने तेलंगाना की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मामले को विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर उठाने के संकेत दिए हैं। यह देखना बाकी है कि कांग्रेस इस विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है या नहीं।