6 अगस्त 2026
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हैदराबाद को इको-फ्रेंडली शहर बनाने की मुहिम: सीएम रेवंत रेड्डी ने गुर्रमगुडा में वनमहोत्सव का शुभारंभ किया

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हैदराबाद को इको-फ्रेंडली शहर बनाने की मुहिम: सीएम रेवंत रेड्डी ने गुर्रमगुडा में वनमहोत्सव का शुभारंभ किया

सारांश

हैदराबाद की बाढ़ और अतिक्रमण की यादें इस बार संकल्प बनकर लौटीं। सीएम रेवंत रेड्डी ने गुर्रमगुडा की 424 एकड़ वन भूमि पर वनमहोत्सव का शुभारंभ किया — जो 2021 की बाढ़ से उपजे एक विचार की परिणति है और हैदराबाद को इको-फ्रेंडली शहर बनाने की मुहिम का अगला पड़ाव।

मुख्य बातें

सीएम रेवंत रेड्डी ने 18 जून 2026 को गुर्रमगुडा इको पार्क में वनमहोत्सव का शुभारंभ किया।
गुर्रमगुडा रिजर्व फॉरेस्ट में ₹17.84 करोड़ के विकास कार्यों का उद्घाटन किया गया।
दिसंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने गुर्रमगुडा की 102 एकड़ भूमि को वन भूमि घोषित किया था।
मार्च 2026 में राज्य सरकार ने 424 एकड़ 31 गुंटा भूमि को आरक्षित वन घोषित कर शहरी वन पार्क विकसित करने का निर्णय लिया।
राज्यभर में ₹17.66 करोड़ की पर्यावरणीय परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन, 11 जिलों में विस्तार।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 18 जून 2026 को स्पष्ट किया कि उनकी सरकार हैदराबाद को पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल (इको-फ्रेंडली) शहर में बदलने के मिशन पर काम कर रही है। हैदराबाद के निकट गुर्रमगुडा इको पार्क में आयोजित 'वनमहोत्सव' कार्यक्रम में पौधारोपण करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों की पर्यावरणीय क्षति और बाढ़ जैसी आपदाओं से उपजे संकल्प की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है।

वनमहोत्सव की पृष्ठभूमि और प्रेरणा

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2021 की बाढ़ के दौरान जब वे मलकाजगिरी से सांसद थे, तब गुर्रमगुडा क्षेत्र के दौरे के समय उनके मन में इस वन भूमि को पुनर्जीवित करने का विचार आया था। उन्होंने उस दौरे की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा कीं। रेड्डी ने कहा कि पहले झीलों पर अतिक्रमण और वन भूमि पर अवैध कब्जों के कारण मामूली बारिश में भी शहर में अव्यवस्था फैल जाती थी।

सरकार की प्रमुख पहलें

रेवंत रेड्डी ने बताया कि वर्तमान सरकार तीन मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है — वर्षा जल निकासी नालों (स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स) का पुनरुद्धार, वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया और शहर को हरियाली से भरपूर बनाना। यह ऐसे समय में आया है जब दिसंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने गुर्रमगुडा की 102 एकड़ भूमि को वन भूमि घोषित करते हुए तेलंगाना सरकार की अपील स्वीकार की और दशकों पुराने साहेबनगर कलां (गुर्रमगुडा रिजर्व फॉरेस्ट) विवाद का निपटारा किया था।

इसके बाद मार्च 2026 में राज्य सरकार ने तेलंगाना वन अधिनियम, 1967 की धारा 15 के तहत गुर्रमगुडा की 424 एकड़ 31 गुंटा भूमि को आरक्षित वन घोषित किया और इसे एक बड़े शहरी वन पार्क के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया।

उद्घाटन और विकास कार्य

मुख्यमंत्री ने गुर्रमगुडा रिजर्व फॉरेस्ट में ₹17.84 करोड़ की लागत से कराए गए विकास कार्यों का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने राज्यभर में ₹17.66 करोड़ की लागत से तैयार शहरी पार्कों, इको पार्कों, वन्यजीव संरक्षण, चिड़ियाघर आधुनिकीकरण, आवासीय भवनों और पर्यावरणीय अवसंरचना से जुड़ी परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन भी किया।

ये परियोजनाएँ निजामाबाद, कोठागुडेम, हनमकोंडा, मेडक, महबूबनगर, मुलुगु, नारायणपेट, भूपालपल्ली, संगारेड्डी, रंगा रेड्डी और वारंगल सहित विभिन्न जिलों में विकसित की गई हैं।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि हैदराबाद में बाढ़ की समस्या वर्षों से नागरिकों के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स के पुनरुद्धार और वन भूमि की रक्षा से न केवल बाढ़ का खतरा कम होगा, बल्कि शहरी तापमान में भी कमी आने की उम्मीद है। 424 एकड़ के इस शहरी वन पार्क से हैदराबाद के लाखों निवासियों को हरित आवरण और बेहतर वायु गुणवत्ता का लाभ मिलने की संभावना है।

आगे की राह

रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम उनकी सरकार की दीर्घकालिक पर्यावरण नीति का हिस्सा है, जिसमें अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखना और हैदराबाद को 'प्रकृति के बीच बसने वाला शहर' बनाना शामिल है। राज्यभर में चल रही पर्यावरणीय परियोजनाएँ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स का पुनरुद्धार और वन भूमि की वापसी अगले मानसून तक ज़मीन पर दिखेगी। हैदराबाद में बाढ़ की समस्या केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं — शहरी नियोजन की दशकों पुरानी विफलताएँ भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं। ₹17.84 करोड़ की राशि 424 एकड़ के विकास के लिए पर्याप्त है या नहीं, यह सवाल भी उठता है। जब तक अतिक्रमण-विरोधी कानूनी लड़ाई के नतीजे व्यापक पैमाने पर नहीं आते, तब तक यह मुहिम प्रतीकात्मकता और ठोस बदलाव के बीच की खाई को नहीं पाट सकती।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुर्रमगुडा वनमहोत्सव क्या है और इसका आयोजन क्यों किया गया?
गुर्रमगुडा वनमहोत्सव तेलंगाना सरकार द्वारा 18 जून 2026 को हैदराबाद के निकट गुर्रमगुडा इको पार्क में आयोजित वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम है। यह आयोजन उस वन भूमि पर हुआ जिसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद अतिक्रमण से मुक्त कराया गया था।
गुर्रमगुडा की वन भूमि को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का क्या फैसला था?
दिसंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने साहेबनगर कलां (गुर्रमगुडा रिजर्व फॉरेस्ट) मामले में तेलंगाना सरकार की अपील स्वीकार करते हुए 102 एकड़ भूमि को वन भूमि घोषित किया और पूर्व के आदेशों को निरस्त कर दशकों पुराने विवाद का निपटारा किया। इसके बाद मार्च 2026 में राज्य सरकार ने 424 एकड़ 31 गुंटा भूमि को आरक्षित वन घोषित किया।
हैदराबाद को इको-फ्रेंडली बनाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
सरकार तीन प्रमुख मोर्चों पर काम कर रही है — वर्षा जल निकासी नालों (स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स) का पुनरुद्धार, वन भूमि को कानूनी प्रक्रिया से अतिक्रमण मुक्त कराना और शहर में हरित आवरण बढ़ाना। इसके अलावा राज्यभर में ₹17.66 करोड़ की पर्यावरणीय परियोजनाएँ 11 जिलों में विकसित की जा रही हैं।
वनमहोत्सव कार्यक्रम में किन परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ?
सीएम रेवंत रेड्डी ने गुर्रमगुडा रिजर्व फॉरेस्ट में ₹17.84 करोड़ के विकास कार्यों का उद्घाटन किया। साथ ही राज्यभर में ₹17.66 करोड़ की लागत से तैयार शहरी पार्कों, इको पार्कों, वन्यजीव संरक्षण, चिड़ियाघर आधुनिकीकरण और पर्यावरणीय अवसंरचना परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन भी किया गया।
सीएम रेवंत रेड्डी को गुर्रमगुडा वन पार्क की प्रेरणा कब और कैसे मिली?
रेवंत रेड्डी के अनुसार, 2021 की बाढ़ के दौरान जब वे मलकाजगिरी से सांसद थे, तब गुर्रमगुडा क्षेत्र के दौरे के समय उनके मन में इस वन भूमि को पुनर्जीवित करने का विचार आया था। वर्तमान वनमहोत्सव उसी विचार की व्यावहारिक परिणति है।
राष्ट्र प्रेस
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