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तेलंगाना: शहरी केंद्रों में इंदिराम्मा आवास के लिए सरकारी जमीन का उपयोग, रेवंत रेड्डी का निर्देश

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तेलंगाना: शहरी केंद्रों में इंदिराम्मा आवास के लिए सरकारी जमीन का उपयोग, रेवंत रेड्डी का निर्देश

सारांश

तेलंगाना सरकार ने इंदिराम्मा आवास योजना को नई दिशा दी — अब पुलिस, राजस्व और परिवहन विभागों की अप्रयुक्त शहरी जमीनें गरीबों के फ्लैटों के लिए उपयोग होंगी। पहले चरण में 17 विधानसभा क्षेत्रों में 7,680 फ्लैट बनेंगे, जिनमें ₹5 लाख सरकारी सब्सिडी और भूमि लागत पूरी तरह राज्य वहन करेगा।

मुख्य बातें

रेवंत रेड्डी ने 24 जुलाई को इंदिराम्मा शहरी आवास योजना की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सरकारी विभागों की अप्रयुक्त जमीनें आवास निर्माण के लिए उपयोग करने का निर्देश दिया।
पुलिस, राजस्व और परिवहन विभागों की जमीनें इंदिराम्मा आवास के लिए ली जाएंगी; इन विभागों को बदले में अन्य स्थानों पर जमीन दी जाएगी।
पहले चरण में 17 विधानसभा क्षेत्रों में 7,680 फ्लैट बनाए जाएंगे — राजेंद्रनगर, मल्काजगिरी, जुबली हिल्स, सिकंदराबाद छावनी सहित।
प्रत्येक फ्लैट का क्षेत्रफल 528 वर्ग फुट , निर्माण लागत ₹11 लाख ; सरकार ₹5 लाख सब्सिडी देगी और भूमि लागत पूरी तरह वहन करेगी।
मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि आवास कार्यस्थलों के पास बनाए जाएं ताकि लाभार्थियों की आजीविका प्रभावित न हो ।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार, 24 जुलाई को अधिकारियों को निर्देश दिया कि इंदिराम्मा शहरी आवास योजना के तहत निर्माण के लिए पुलिस, राजस्व और परिवहन विभागों की अप्रयुक्त सरकारी जमीनों का उपयोग किया जाए — विशेष रूप से हैदराबाद के शहरी केंद्रों में। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार यह निर्देश योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक के दौरान दिया गया।

समीक्षा बैठक में क्या हुआ

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इंदिराम्मा शहरी आवास योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए आउटर रिंग रोड (ओआरआर) सीमा के भीतर विभिन्न सरकारी विभागों के स्वामित्व वाली अप्रयुक्त भूमि की पहचान करने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने बैठक में कई विधानसभा क्षेत्रों में चिन्हित आवास स्थलों का विवरण प्रस्तुत किया।

सीएमओ के अनुसार, बैठक में तय किया गया कि पुलिस, राजस्व और परिवहन विभागों की जमीनें इंदिराम्मा आवास के लिए उपयोग में लाई जाएंगी और इन विभागों को बदले में अन्य स्थानों पर वैकल्पिक भूमि आवंटित की जाएगी।

मुख्यमंत्री की मंशा और तर्क

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया कि आवासीय क्षेत्रों और कार्यस्थलों से दूर इंदिराम्मा आवास बनाने से लाभार्थियों की रोज़गार और आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए बने आवास यदि कार्यस्थलों के पास न हों तो वे अनुपयोगी पड़े रहते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सरकारी आवास योजनाओं की उपयोगिता और स्थान-चयन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

योजना का ढाँचा और लागत

राज्य सरकार ने CURE (Comprehensive Urban Renewal for Equity) क्षेत्र के अंतर्गत इंदिराम्मा आवास निर्माण की घोषणा पहले ही कर दी है। प्रत्येक फ्लैट का कुल क्षेत्रफल लगभग 528 वर्ग फुट और कारपेट एरिया 400 वर्ग फुट होगा। निर्माण लागत लगभग ₹11 लाख है, जिसमें सरकार ₹5 लाख की सब्सिडी देगी। लाभार्थी को शेष ₹6 लाख का भुगतान स्वयं करना होगा। भूमि की संपूर्ण लागत राज्य सरकार वहन करेगी।

पहले चरण के निर्वाचन क्षेत्र

पहले चरण में 17 विधानसभा क्षेत्रों में 7,680 फ्लैटों के निर्माण और वितरण की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इनमें राजेंद्रनगर, महेश्वरम, सेरिलिंगमपल्ली, इब्राहिमपटनम, मल्काजगिरी, नामपल्ली, खैरताबाद, जुबली हिल्स, कारवां, बहादुरपुरा, अंबरपेट, कुकटपल्ली, मेडचल, कुथबुल्लापुर, सनथनगर, सिकंदराबाद छावनी और मलकपेट शामिल हैं।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

इस समीक्षा बैठक में मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी और पोन्नम प्रभाकर, सड़क एवं भवन (आर एंड बी) विभाग के विशेष मुख्य सचिव विकास राज, डीजीपी सीवी आनंद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एन. श्रीधर और वी. शेषाद्री सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चिन्हित विधानसभा क्षेत्रों में अप्रयुक्त सरकारी भूमि की पहचान की प्रक्रिया में तेज़ी लाने का निर्देश दिया। आगामी हफ्तों में भूमि-चिन्हीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य की समयसीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह तथ्य देशभर की आवास योजनाओं में बार-बार सामने आया है। लेकिन असली परीक्षा भूमि-चिन्हीकरण की गति और विभागों के बीच समन्वय में होगी — सरकारी जमीनें आमतौर पर कानूनी विवादों और अतिक्रमण में उलझी होती हैं। ₹5 लाख सब्सिडी के बाद भी लाभार्थी पर ₹6 लाख का बोझ है, जो शहरी अनौपचारिक क्षेत्र के सबसे कमज़ोर तबके के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि भूमि-चिन्हीकरण में देरी हुई तो 7,680 फ्लैटों की समयसीमा कागज़ों तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदिराम्मा शहरी आवास योजना क्या है?
इंदिराम्मा शहरी आवास योजना तेलंगाना सरकार की एक पहल है जिसके तहत शहरी गरीबों को सब्सिडी पर फ्लैट दिए जाते हैं। प्रत्येक फ्लैट का क्षेत्रफल लगभग 528 वर्ग फुट है, निर्माण लागत ₹11 लाख है और सरकार ₹5 लाख की सब्सिडी देती है जबकि भूमि लागत पूरी तरह राज्य वहन करता है।
तेलंगाना सरकार इंदिराम्मा आवास के लिए किन विभागों की जमीन लेगी?
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार पुलिस, राजस्व और परिवहन विभागों की अप्रयुक्त जमीनें इंदिराम्मा आवास के लिए उपयोग की जाएंगी। इन विभागों को बदले में अन्य स्थानों पर वैकल्पिक भूमि आवंटित की जाएगी।
पहले चरण में कितने फ्लैट बनेंगे और किन क्षेत्रों में?
पहले चरण में 17 विधानसभा क्षेत्रों में 7,680 फ्लैट बनाने की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इनमें राजेंद्रनगर, मल्काजगिरी, जुबली हिल्स, नामपल्ली, खैरताबाद, सिकंदराबाद छावनी, मलकपेट सहित कुल 17 क्षेत्र शामिल हैं।
इंदिराम्मा फ्लैट के लिए लाभार्थी को कितना भुगतान करना होगा?
प्रत्येक फ्लैट की निर्माण लागत लगभग ₹11 लाख है, जिसमें सरकार ₹5 लाख की सब्सिडी देगी। लाभार्थी को शेष ₹6 लाख का भुगतान स्वयं करना होगा जबकि भूमि की पूरी लागत राज्य सरकार वहन करेगी।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आवास स्थान को लेकर क्या चिंता जताई?
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवासीय क्षेत्रों और कार्यस्थलों से दूर बनाए गए आवास गरीबों के रोज़गार और आजीविका पर प्रतिकूल असर डालते हैं और अनुपयोगी पड़े रहते हैं। इसीलिए उन्होंने ओआरआर के भीतर शहरी केंद्रों में कार्यस्थलों के निकट आवास बनाने पर जोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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