शी जिनपिंग का नई दिल्ली में ब्रिक्स को 'चार अग्रणी' बनने का आह्वान, 18वीं बैठक में रखा भविष्य का रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के नेताओं की 18वीं बैठक के पहले चरण में हिस्सा लिया और 'युग की जिम्मेदारी साझा करें, अग्रणी शक्ति बनने का साहस करें' शीर्षक से एक महत्त्वपूर्ण भाषण दिया। इसमें उन्होंने ब्रिक्स सहयोग के 20 वर्षों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए इस समूह को 'चार अग्रणी' की भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया।
ब्रिक्स सहयोग के 20 वर्ष: एक असाधारण यात्रा
इस वर्ष ब्रिक्स सहयोग की 20वीं वर्षगांठ है। राष्ट्रपति शी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट, कोविड-19 महामारी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का मिलकर सामना करने से लेकर सदस्य देशों के ऐतिहासिक विस्तार और बहुआयामी सहयोग ढाँचे के निर्माण तक — यह यात्रा आत्मनिर्भरता और परस्पर सहयोग की मिसाल रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स अब उभरते बाज़ारों और विकासशील देशों के सबसे प्रभावशाली सहयोग मंचों में से एक बन चुका है।
गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक बहुध्रुवीयता मज़बूत हो रही है, वैश्विक दक्षिण की आवाज़ बुलंद हो रही है, और एकपक्षवाद तथा शक्ति राजनीति की प्रवृत्तियाँ भी सक्रिय हैं।
शी का 'चार अग्रणी' प्रस्ताव: क्या है रोडमैप
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों के लिए चार प्रमुख भूमिकाओं की रूपरेखा सामने रखी।
पहला — नवाचार और विकास में अग्रणी: तकनीकी क्रांति के अवसरों को मज़बूती से पकड़ना, विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन जैसे मंचों का उपयोग करना और ओपन सोर्स सहयोग के ज़रिए नए औद्योगीकरण को बढ़ावा देना।
दूसरा — शांति और स्थिरता की रक्षा में अग्रणी: साझा, व्यापक, सहयोगात्मक और सतत सुरक्षा की अवधारणा का पालन करना, शीत युद्ध की मानसिकता का विरोध करना और क्षेत्रीय हॉटस्पॉट मुद्दों के समाधान में रचनात्मक भूमिका निभाना।
तीसरा — सभ्यताओं के आदान-प्रदान में अग्रणी: ब्रिक्स सांस्कृतिक आदान-प्रदान मंच जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए लोगों के बीच आपसी समझ बढ़ाना और विभिन्न सभ्यताओं के बीच सामंजस्य स्थापित करना।
चौथा — वैश्विक शासन सुधार में अग्रणी: संयुक्त राष्ट्र के अधिकार को बनाए रखना, बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की रक्षा करना, संरक्षणवाद का विरोध करना और साइबर स्पेस, बाहरी अंतरिक्ष तथा गहरे समुद्र जैसे नए क्षेत्रों के शासन में सक्रिय भागीदारी करना।
वैश्विक प्रतिक्रिया और बैठक का माहौल
बैठक में शामिल गणमान्य व्यक्तियों ने राष्ट्रपति शी के प्रस्ताव की सराहना की। रिपोर्टों के अनुसार, यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी व्यापक रूप से चर्चित हुआ। विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रस्ताव विश्व बहुध्रुवीयता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लोकतंत्रीकरण की ऐतिहासिक प्रवृत्ति के अनुरूप है।
यह ऐसे समय में आया है जब शांति, विकास, सुरक्षा और शासन के क्षेत्र में 'चार घाटे' लगातार सामने आ रहे हैं, और मानव समाज इतिहास के एक महत्त्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है।
चीन की अगली ब्रिक्स अध्यक्षता: क्या होगा आगे
अगले वर्ष चीन ब्रिक्स का अध्यक्ष देश बनेगा और ब्रिक्स देशों के नेताओं की 19वीं बैठक की मेज़बानी करेगा। राष्ट्रपति शी ने कहा कि यदि ब्रिक्स देश एकजुट होकर 'चार अग्रणी' बनने की दिशा में लगातार प्रयास करते हैं, तो वे ब्रिक्स सहयोग के तीसरे 'स्वर्णिम दशक' की सफल शुरुआत कर सकते हैं।
इस ऐतिहासिक मोड़ पर ब्रिक्स की दिशा तय करना आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में निर्णायक साबित हो सकता है।