ब्रिक्स अध्यक्षता 2027: चीन करेगा 19वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी, शी जिनपिंग ने 'तीसरे स्वर्णिम दशक' का किया आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार, 12 सितंबर 2026 को घोषणा की कि चीन अगले वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा और 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर जिनपिंग ने कहा कि चीन इस अवसर का उपयोग सभी सदस्य देशों के साथ आम सहमति बनाने और ब्रिक्स सहयोग के 'तीसरे स्वर्णिम दशक' की नींव रखने के लिए करेगा।
चीन की ब्रिक्स अध्यक्षता की घोषणा
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बयान को साझा किया। माओ निंग ने लिखा कि चीन सभी ब्रिक्स साझेदार देशों के साथ मिलकर सहयोग के तीसरे स्वर्णिम दशक की शुरुआत करेगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब ब्रिक्स समूह वैश्विक भू-राजनीतिक पुनर्संरेखण के बीच अपनी प्रासंगिकता और प्रभाव को और गहरा करने का प्रयास कर रहा है।
मध्य-पूर्व संकट पर शी जिनपिंग की चिंता
ब्रिक्स अध्यक्षता की घोषणा के अलावा शी जिनपिंग ने मध्य-पूर्व में जारी सशस्त्र संघर्ष पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे युद्ध ने सभी देशों के नागरिकों को गंभीर नुकसान पहुँचाया है और यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के विपरीत है। चीनी राष्ट्रपति ने संबंधित पक्षों से राजनीतिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने और स्थायी एवं व्यापक युद्धविराम स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन अन्य ब्रिक्स सदस्यों के साथ मिलकर मध्य-पूर्व में शांति और स्थिरता बहाल करने में अपनी 'उचित भूमिका' निभाएगा।
नई दिल्ली घोषणा 2026 की मुख्य बातें
नई दिल्ली में शनिवार को अपनाई गई '2026 नई दिल्ली घोषणा' में ब्रिक्स नेताओं ने स्वीकार किया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ध्रुवीकरण और अविश्वास तेज़ी से बढ़ रहा है। घोषणा में अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया। नेताओं ने कहा कि मौजूदा चुनौतियों और उनसे जुड़े सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए राजनीतिक एवं कूटनीतिक उपायों का सहारा लेना अनिवार्य है, ताकि संघर्ष की आशंकाओं को न्यूनतम किया जा सके।
घोषणा में यह भी रेखांकित किया गया कि सभी राष्ट्रों की सुरक्षा परस्पर जुड़ी और अविभाज्य है। ब्रिक्स नेताओं ने संवाद, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका को संघर्ष निवारण और समाधान में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।
वैश्विक संदर्भ और ब्रिक्स का बढ़ता दायरा
गौरतलब है कि ब्रिक्स समूह ने पिछले कुछ वर्षों में अपने सदस्य आधार का काफ़ी विस्तार किया है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिमी गठबंधनों — विशेषकर G7 — के समानांतर वैश्विक दक्षिण के देश बहुपक्षीय मंचों पर अपनी आवाज़ मज़बूत कर रहे हैं। चीन की अगले वर्ष की अध्यक्षता इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि बीजिंग लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और ब्रेटन वुड्स संस्थाओं में सुधार की वकालत करता रहा है।
आगे क्या
चीन की ब्रिक्स अध्यक्षता 2027 में शुरू होगी और 19वें शिखर सम्मेलन की तिथि व स्थान की औपचारिक घोषणा अभी बाक़ी है। विश्लेषकों का मानना है कि बीजिंग इस अध्यक्षता के दौरान व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और डी-डॉलराइज़ेशन जैसे एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा। नई दिल्ली घोषणा के क्रियान्वयन और उसके ठोस परिणामों पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।