घाटल मास्टर प्लान को मिली हरी झंडी: बंगाल की BJP सरकार केंद्र के साथ मिलकर लागू करेगी बाढ़ नियंत्रण परियोजना
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने सोमवार, 25 मई 2026 को राज्य की बहुप्रतीक्षित बाढ़ नियंत्रण एवं ड्रेनेज परियोजना 'घाटल मास्टर प्लान' को केंद्र सरकार के साथ संयुक्त रूप से लागू करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया। इस परियोजना की लागत केंद्र और राज्य सरकार बराबर-बराबर साझा करेंगी। यह फैसला राज्य सचिवालय 'नबान्ना' में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें सभी विभागों के सचिव उपस्थित रहे।
क्यों अटकी थी यह परियोजना
गौरतलब है कि घाटल मास्टर प्लान वर्षों से अधर में लटकी थी। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार इसे केंद्र सरकार के साथ संयुक्त रूप से लागू करने को तैयार नहीं थी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में 'डबल इंजन' सरकार के गठन के बाद केंद्र-राज्य संबंधों में नई गर्मजोशी आई है। केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक तालमेल न होने के कारण दक्षिण बंगाल के लाखों लोग हर मानसून में जलभराव की समस्या झेलते रहे।
बैठक में क्या निर्णय हुए
मुख्यमंत्री अधिकारी ने बैठक में सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि इस परियोजना में राज्य सरकार के वित्तीय योगदान का शीघ्र आकलन किया जाए। साथ ही केंद्र सरकार के साथ समझौते का मसौदा भी जल्द तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य विभाग को 8 जून 2026 तक केंद्र प्रायोजित योजना 'आयुष्मान भारत' को राज्य में लागू करने की रूपरेखा अंतिम रूप देने का आदेश दिया गया। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में अब और विलंब नहीं होना चाहिए।
रोज़गार मिशन को भी मिली प्राथमिकता
बैठक में रोज़गार सृजन पर भी ज़ोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को 'वीबी-जी राम जी' (विकसित भारत — गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) परियोजना के तहत 100 दिन के रोज़गार कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से शुरू करने का निर्देश दिया। यह योजना पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम से जानी जाती थी। उल्लेखनीय है कि पिछली सरकार के दौरान इस योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पिछले दो वर्षों से केंद्र की फंडिंग रुकी हुई थी।
आम जनता पर असर
माना जा रहा है कि घाटल मास्टर प्लान के लागू होने से दक्षिण बंगाल के बड़े हिस्सों — खासकर पश्चिम मेदिनीपुर और आसपास के जिलों — में हर मानसून सीज़न में होने वाली भयंकर जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी। यह क्षेत्र वर्षों से बाढ़ और जलजमाव से त्रस्त रहा है, और स्थानीय निवासियों के लिए यह परियोजना लंबे समय से माँग का विषय रही है।
आगे की राह
अब सिंचाई विभाग द्वारा वित्तीय आकलन पूरा होने के बाद केंद्र सरकार के साथ औपचारिक समझौते की प्रक्रिया शुरू होगी। आयुष्मान भारत की रूपरेखा 8 जून 2026 तक तय होने के बाद राज्य में इस स्वास्थ्य योजना का विस्तार भी संभव होगा। नई सरकार के इन शुरुआती फैसलों से स्पष्ट है कि केंद्र-राज्य सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।