10 जुलाई 2026
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घाटल मास्टर प्लान को मिली हरी झंडी: बंगाल की BJP सरकार केंद्र के साथ मिलकर लागू करेगी बाढ़ नियंत्रण परियोजना

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घाटल मास्टर प्लान को मिली हरी झंडी: बंगाल की BJP सरकार केंद्र के साथ मिलकर लागू करेगी बाढ़ नियंत्रण परियोजना

सारांश

वर्षों से अटकी 'घाटल मास्टर प्लान' परियोजना को बंगाल की नई BJP सरकार ने 25 मई को हरी झंडी दे दी। TMC सरकार के दौरान केंद्र-राज्य तालमेल न होने से रुकी यह बाढ़ नियंत्रण योजना अब 50-50 लागत साझेदारी के साथ आगे बढ़ेगी — दक्षिण बंगाल के लाखों लोगों को राहत की उम्मीद।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में 25 मई 2026 को 'नबान्ना' में हुई बैठक में 'घाटल मास्टर प्लान' को केंद्र के साथ संयुक्त रूप से लागू करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया।
परियोजना की लागत केंद्र और राज्य सरकार बराबर-बराबर वहन करेंगी; सिंचाई विभाग को वित्तीय आकलन शीघ्र करने के निर्देश।
TMC सरकार के कार्यकाल में केंद्र के साथ सहयोग न होने के कारण यह परियोजना वर्षों से लंबित थी।
स्वास्थ्य विभाग को 8 जून 2026 तक आयुष्मान भारत की राज्य में क्रियान्वयन रूपरेखा तैयार करने का आदेश।
100 दिन के रोज़गार कार्यक्रम (वीबी-जी राम जी / पूर्व मनरेगा) को तत्काल शुरू करने के निर्देश; भ्रष्टाचार आरोपों के चलते दो वर्षों से केंद्र की फंडिंग रुकी थी।
परियोजना से पश्चिम मेदिनीपुर सहित दक्षिण बंगाल के बड़े हिस्सों में मानसूनी जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद।

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने सोमवार, 25 मई 2026 को राज्य की बहुप्रतीक्षित बाढ़ नियंत्रण एवं ड्रेनेज परियोजना 'घाटल मास्टर प्लान' को केंद्र सरकार के साथ संयुक्त रूप से लागू करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया। इस परियोजना की लागत केंद्र और राज्य सरकार बराबर-बराबर साझा करेंगी। यह फैसला राज्य सचिवालय 'नबान्ना' में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें सभी विभागों के सचिव उपस्थित रहे।

क्यों अटकी थी यह परियोजना

गौरतलब है कि घाटल मास्टर प्लान वर्षों से अधर में लटकी थी। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार इसे केंद्र सरकार के साथ संयुक्त रूप से लागू करने को तैयार नहीं थी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में 'डबल इंजन' सरकार के गठन के बाद केंद्र-राज्य संबंधों में नई गर्मजोशी आई है। केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक तालमेल न होने के कारण दक्षिण बंगाल के लाखों लोग हर मानसून में जलभराव की समस्या झेलते रहे।

बैठक में क्या निर्णय हुए

मुख्यमंत्री अधिकारी ने बैठक में सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि इस परियोजना में राज्य सरकार के वित्तीय योगदान का शीघ्र आकलन किया जाए। साथ ही केंद्र सरकार के साथ समझौते का मसौदा भी जल्द तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य विभाग को 8 जून 2026 तक केंद्र प्रायोजित योजना 'आयुष्मान भारत' को राज्य में लागू करने की रूपरेखा अंतिम रूप देने का आदेश दिया गया। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में अब और विलंब नहीं होना चाहिए।

रोज़गार मिशन को भी मिली प्राथमिकता

बैठक में रोज़गार सृजन पर भी ज़ोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को 'वीबी-जी राम जी' (विकसित भारत — गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) परियोजना के तहत 100 दिन के रोज़गार कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से शुरू करने का निर्देश दिया। यह योजना पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम से जानी जाती थी। उल्लेखनीय है कि पिछली सरकार के दौरान इस योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पिछले दो वर्षों से केंद्र की फंडिंग रुकी हुई थी।

आम जनता पर असर

माना जा रहा है कि घाटल मास्टर प्लान के लागू होने से दक्षिण बंगाल के बड़े हिस्सों — खासकर पश्चिम मेदिनीपुर और आसपास के जिलों — में हर मानसून सीज़न में होने वाली भयंकर जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी। यह क्षेत्र वर्षों से बाढ़ और जलजमाव से त्रस्त रहा है, और स्थानीय निवासियों के लिए यह परियोजना लंबे समय से माँग का विषय रही है।

आगे की राह

अब सिंचाई विभाग द्वारा वित्तीय आकलन पूरा होने के बाद केंद्र सरकार के साथ औपचारिक समझौते की प्रक्रिया शुरू होगी। आयुष्मान भारत की रूपरेखा 8 जून 2026 तक तय होने के बाद राज्य में इस स्वास्थ्य योजना का विस्तार भी संभव होगा। नई सरकार के इन शुरुआती फैसलों से स्पष्ट है कि केंद्र-राज्य सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति में होगी — वित्तीय आकलन और केंद्र के साथ औपचारिक समझौते में लगने वाला समय तय करेगा कि यह 'सैद्धांतिक फैसला' ज़मीन पर कब उतरेगा। दक्षिण बंगाल में बाढ़ की समस्या दशकों पुरानी है और इस परियोजना की माँग भी उतनी ही पुरानी — सवाल यह है कि 'डबल इंजन' का राजनीतिक लाभ लेने की जल्दबाज़ी में तकनीकी और वित्तीय तैयारी पर्याप्त है या नहीं। मनरेगा के नाम बदलकर 'वीबी-जी राम जी' करना और आयुष्मान भारत को एक साथ लागू करने की समयसीमा देना नई सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है, पर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी पुरानी फंडिंग को पटरी पर लाने की जवाबदेही तंत्र अभी स्पष्ट नहीं है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घाटल मास्टर प्लान क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
घाटल मास्टर प्लान पश्चिम बंगाल की एक प्रमुख बाढ़ नियंत्रण एवं ड्रेनेज परियोजना है, जिसका उद्देश्य दक्षिण बंगाल — विशेषकर पश्चिम मेदिनीपुर और आसपास के जिलों — में हर मानसून में होने वाले जलभराव को रोकना है। यह क्षेत्र वर्षों से बाढ़ की विभीषिका झेलता आया है और यह परियोजना वहाँ के लाखों निवासियों के लिए राहत की उम्मीद है।
यह परियोजना अब तक क्यों लागू नहीं हो पाई थी?
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार इस परियोजना को केंद्र सरकार के साथ संयुक्त रूप से लागू करने को तैयार नहीं थी, जिससे यह वर्षों तक अधर में लटकी रही। केंद्र-राज्य के बीच राजनीतिक मतभेद इसके क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा बने रहे।
परियोजना की लागत कौन वहन करेगा?
25 मई 2026 को हुई बैठक में तय हुआ कि इस परियोजना का खर्च केंद्र और राज्य सरकार बराबर-बराबर साझा करेंगी। सिंचाई विभाग को राज्य के वित्तीय योगदान का शीघ्र आकलन करने और केंद्र के साथ समझौते का मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में आयुष्मान भारत को लेकर क्या निर्णय हुआ?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को 8 जून 2026 तक 'आयुष्मान भारत' योजना को राज्य में लागू करने की रूपरेखा अंतिम रूप देने का निर्देश दिया। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।
वीबी-जी राम जी योजना क्या है और इसे क्यों दोबारा शुरू किया जा रहा है?
वीबी-जी राम जी (विकसित भारत — गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) पहले मनरेगा के नाम से जानी जाने वाली 100 दिन के रोज़गार गारंटी योजना का नया रूप है। पिछली सरकार के दौरान इस योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पिछले दो वर्षों से केंद्र की फंडिंग रुकी हुई थी, और अब नई सरकार ने इसे तत्काल प्रभाव से शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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