मनोहर लाल का पश्चिम बंगाल को रोडमैप: 2 करोड़ स्मार्ट मीटर, ₹40,000 करोड़ शहरी कोष और सोलर विस्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय विद्युत एवं आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने 31 मई 2025 को कोलकाता में पश्चिम बंगाल की बिजली और शहरी विकास योजनाओं की व्यापक समीक्षा की और राज्य के लिए केंद्र सरकार का विस्तृत रोडमैप सार्वजनिक किया। इस रोडमैप में स्मार्ट मीटर विस्तार, नवीकरणीय ऊर्जा, मेट्रो वित्तपोषण और स्वच्छता अवसंरचना को प्राथमिकता दी गई है।
स्मार्ट मीटर कार्यक्रम: 2 करोड़ उपभोक्ता लक्ष्य
मनोहर लाल ने घोषणा की कि स्मार्ट मीटर कार्यक्रम का अगला चरण जुलाई 2026 से शुरू होगा, जिसमें पश्चिम बंगाल के लगभग 2 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को शामिल किया जाएगा। पहले चरण में सरकारी कार्यालयों और परिसरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, उसके बाद बड़े उपभोक्ताओं और अंततः घरेलू उपयोगकर्ताओं तक इसका विस्तार होगा।
उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प उपलब्ध होंगे। केंद्र सरकार प्रति स्मार्ट मीटर ₹900 की सब्सिडी देगी, जबकि उपभोक्ता स्थापना लागत के रूप में प्रति माह लगभग ₹100 का योगदान करेंगे। मंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बिलिंग दक्षता में सुधार, नुकसान में कमी और पारदर्शी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
पारेषण घाटा और वित्तीय स्थिरता
मनोहर लाल ने बताया कि वर्तमान में पारेषण और वितरण में होने वाला नुकसान लगभग 12 प्रतिशत है। इसे नियंत्रित करने के लिए दो महीनों के भीतर एक व्यापक स्रोत आवंटन योजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही संशोधित टैरिफ ढाँचे और लंबित देनदारियों के निपटान पर भी काम जारी है।
उन्होंने बताया कि लगभग ₹800 करोड़ की सब्सिडी सहायता और बकाया राशि की वसूली की जाएगी, जबकि पिछले वर्षों में अनुमानित ₹15,000 करोड़ के संचित घाटे के प्रबंधन की योजना बनाई जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के विद्युत क्षेत्र पर वित्तीय दबाव लंबे समय से चिंता का विषय रहा है।
प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना और नवीकरणीय ऊर्जा
मंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला, जो नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सहयोग से लागू की जा रही है। यह योजना 3 किलोवाट से कम क्षमता वाले रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन वाले उपभोक्ताओं को लक्षित करती है, जिससे विशेष रूप से घरेलू और ग्रामीण उपभोक्ताओं को बिजली बिलों में कमी और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने का लाभ मिलेगा।
शहरी अवसंरचना और मेट्रो वित्तपोषण
शहरी परिवहन अवसंरचना पर बोलते हुए मनोहर लाल ने बताया कि मेट्रो रेल वित्तपोषण मॉडल के तहत केंद्र और राज्य सरकार परियोजना लागत का 15-15 प्रतिशत योगदान देंगी, जबकि शेष 70 प्रतिशत संस्थागत ऋणों से वित्तपोषित होगा। मेट्रो परियोजनाओं पर सामान्यतः 25 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में विचार किया जाता है।
शहरी चुनौती कोष के तहत शहरी अवसंरचना विकास के लिए ₹40,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इस वित्तपोषण ढाँचे में केंद्र और राज्य सरकारें प्रत्येक ₹10,000 करोड़ देंगी, जबकि शेष ₹20,000 करोड़ वित्तीय संस्थानों से आने की उम्मीद है।
स्वच्छता और हिमालयी शहर पहल
स्वच्छता पहलों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल में स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए पंजीकरण 15 जून तक खुले रहेंगे। उन्होंने स्वच्छ ऐप के शुभारंभ की भी जानकारी दी, जिसके माध्यम से नागरिक भौगोलिक टैग वाली तस्वीरें अपलोड करके स्वच्छता संबंधी समस्याओं की रिपोर्ट कर सकते हैं।
शहरी क्षेत्रों में चिन्हित सभी पुराने कचरा स्थलों को ₹550 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ एक वर्ष के भीतर वैज्ञानिक प्रसंस्करण के लिए लक्षित किया गया है। स्वच्छ हिमालयी शहर पहल के तहत 13 हिमालयी राज्यों के लिए ₹1,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिसमें पश्चिम बंगाल के पाँच शहर — दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, कुर्सियोंग, सिलीगुड़ी और मिरिक — शामिल हैं।
गौरतलब है कि घरेलू और सार्वजनिक शौचालयों का व्यापक सर्वेक्षण एक महीने के भीतर राज्य भर में किया जाएगा, ताकि स्वच्छता कवरेज का आकलन और कमियों की पहचान हो सके। मंत्री ने कहा कि बिजली, शहरी अवसंरचना, स्वच्छता और स्वच्छ ऊर्जा में समन्वित प्रयास पश्चिम बंगाल के नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।