प्रगति की 51वीं बैठक: PM मोदी ने ₹30,000 करोड़ के 7 इंफ्रा प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की, रूफटॉप सोलर पर दिया मिशन मोड का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मई 2025 को नई दिल्ली स्थित 'सेवा तीर्थ' में प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्र से जुड़े 7 बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की गई, जिनकी कुल लागत करीब ₹30,000 करोड़ है और जो देश के 9 राज्यों में क्रियान्वित हो रहे हैं। केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करते हुए परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।
रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में लागू करने का निर्देश
बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शहरों, रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक संस्थानों में रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में लागू करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे बिजली का खर्च घटेगा, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने नहरों के ऊपर और किनारों पर सोलर पैनल लगाने की संभावनाएं तलाशने के भी निर्देश दिए।
केन-बेतवा परियोजना को अन्य राज्यों के लिए मॉडल बनाने की अपील
बैठक में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की विस्तार से समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजना अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल बननी चाहिए, ताकि राज्यों के बीच जल विवादों का समाधान सहयोग और आपसी समझ के आधार पर हो सके। उन्होंने राज्यों से नदी जोड़ो परियोजनाओं, जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और बेहतर सिंचाई व्यवस्था को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाने का आह्वान किया, जिससे दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
वधावन बंदरगाह को राष्ट्रीय मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब बनाने पर जोर
सड़क और पोर्ट कनेक्टिविटी पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने वधावन बंदरगाह को केवल एक बंदरगाह नहीं, बल्कि देश के एक बड़े मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने की बात कही। उनके अनुसार यह परियोजना कोस्टल शिपिंग, इनलैंड वाटरवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, हाई-स्पीड रेल, हाईवे और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से जुड़े एक राष्ट्रीय गेटवे के रूप में तैयार होनी चाहिए।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 पर समीक्षा
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल बुनियादी ढाँचे के निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए — इसके परिणाम ज़मीन पर दिखने चाहिए। उन्होंने राज्यों को ठोस कचरा प्रबंधन, वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट्स और गोबरधन प्लांट्स को तेज़ी से पूरा करने के निर्देश दिए।
परियोजनाओं में देरी पर चिंता, मासिक समीक्षा की नई व्यवस्था
प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि सार्वजनिक परियोजनाओं में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि लोगों को ज़रूरी सुविधाएं समय पर नहीं मिल पातीं। उन्होंने मंत्रालयों, विभागों और राज्यों से लंबित मुद्दों को शीघ्र सुलझाने और समयबद्ध ढंग से काम पूरा करने की अपील की। बैठक की शुरुआत में कैबिनेट सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर राज्यों में सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की एक नई व्यवस्था शुरू की गई है। यह कदम शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।