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प्रगति की 51वीं बैठक: PM मोदी ने ₹30,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा की

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प्रगति की 51वीं बैठक: PM मोदी ने ₹30,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा की

सारांश

प्रगति की 51वीं बैठक में PM मोदी ने नौ राज्यों में ₹30,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा की। केन-बेतवा, वधावन बंदरगाह और रूफटॉप सोलर पर विशेष जोर — साथ ही परियोजनाओं में देरी पर कड़ा संदेश और जवाबदेही की नई निगरानी व्यवस्था का ऐलान।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 27 मई 2025 को 'सेवा तीर्थ' में प्रगति की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की।
₹30,000 करोड़ से अधिक लागत की परियोजनाओं की समीक्षा हुई, जो नौ राज्यों में रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्र में फैली हैं।
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को राज्यों के बीच जल-सहयोग के आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
वधावन बंदरगाह को रेल, सड़क, हवाई और जलमार्गों से जुड़े राष्ट्रीय मल्टी-मॉडल प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने का निर्देश।
शहरी क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में लागू करने और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 में तेज़ी लाने का आग्रह।
कैबिनेट सचिव ने सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की नियमित समीक्षा के लिए नई निगरानी व्यवस्था लागू होने की जानकारी दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मई 2025 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने बुधवार, 27 मई को प्रगति की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक 'सेवा तीर्थ' में आयोजित हुई, जिसमें देशभर के नौ राज्यों में फैली ₹30,000 करोड़ से अधिक लागत की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की समीक्षा की गई।

मुख्य परियोजनाओं की समीक्षा

बैठक में रेलवे, बिजली और सड़क संपर्क से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, समीक्षा में समय-सीमा के पालन, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और लंबित मुद्दों के त्वरित समाधान पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी परियोजनाओं में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि आम जनता को सुविधाओं का लाभ भी देर से मिलता है।

केन-बेतवा और स्वच्छ भारत मिशन पर जोर

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को बैठक में एक आदर्श मॉडल परियोजना के रूप में प्रस्तुत किया गया। मोदी ने कहा कि इस तरह की परियोजनाएँ राज्यों के बीच सहयोग और जल संसाधनों के कुशल उपयोग का उदाहरण बन सकती हैं। उन्होंने जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और दक्ष सिंचाई प्रणाली को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने राज्यों से ठोस कचरा प्रबंधन, अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र और गोबरधन योजना के तहत बुनियादी ढाँचे के विकास में तेज़ी लाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का असली उद्देश्य केवल ढाँचा खड़ा करना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में मापने योग्य बदलाव लाना है।

ऊर्जा और बंदरगाह संपर्क

बिजली क्षेत्र की चर्चा में प्रधानमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर सिस्टम को मिशन मोड में लागू करने पर बल दिया। उनका कहना था कि इससे बिजली की लागत घटेगी, ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत होगी और स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार होगा — विशेष रूप से आवासीय क्षेत्रों, शहरों और सार्वजनिक संस्थानों में।

सड़क और बंदरगाह संपर्क की समीक्षा में वधावन बंदरगाह को एक आधुनिक मल्टी-मॉडल विकास मॉडल के रूप में विकसित करने की बात कही गई। प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में तैयार करने का निर्देश दिया, जो रेल, सड़क, हवाई और जलमार्गों से सुगमता से जुड़ा हो।

जवाबदेही की नई व्यवस्था

बैठक की शुरुआत में कैबिनेट सचिव ने जानकारी दी कि सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की नियमित समीक्षा के लिए एक नई निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। यह कदम परियोजनाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रगति मंच — जिसे 2015 में शुरू किया गया था — इस प्रकार शासन के डिजिटल समन्वय का एक स्थापित माध्यम बन चुका है।

आगे की राह में सभी संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों से अपेक्षा की गई है कि वे समयबद्ध तरीके से परियोजनाओं को पूरा करें, ताकि इन विकास कार्यों का लाभ ज़मीनी स्तर पर जन-जन तक पहुँच सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि समीक्षा और क्रियान्वयन के बीच की खाई कितनी पाटी जा सकी है। केन-बेतवा जैसी परियोजनाएँ वर्षों से 'मॉडल' का दर्जा पाती रही हैं, फिर भी ज़मीनी प्रगति धीमी रही है। रूफटॉप सोलर को 'मिशन मोड' में लागू करने का आह्वान नया नहीं है — असली कसौटी यह होगी कि इस बार राज्य-स्तरीय अनुपालन की निगरानी कितनी पारदर्शी होती है। नई सामाजिक क्षेत्र समीक्षा व्यवस्था सही दिशा में कदम है, पर इसकी विश्वसनीयता स्वतंत्र सत्यापन पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रगति की 51वीं बैठक में क्या हुआ?
27 मई 2025 को 'सेवा तीर्थ' में आयोजित इस बैठक में PM मोदी ने नौ राज्यों में फैली ₹30,000 करोड़ से अधिक की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की समीक्षा की। रेलवे, बिजली, सड़क, केन-बेतवा परियोजना और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 प्रमुख एजेंडे में थे।
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना क्या है और इसे मॉडल क्यों कहा गया?
केन-बेतवा परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की दो नदियों को जोड़ने की राष्ट्रीय नदी जोड़ो योजना का हिस्सा है। PM मोदी ने इसे राज्यों के बीच जल-सहयोग और संसाधन प्रबंधन के आदर्श उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया और जल संरक्षण व कुशल सिंचाई पर जोर दिया।
वधावन बंदरगाह को मल्टी-मॉडल हब के रूप में क्यों विकसित किया जाएगा?
महाराष्ट्र में स्थित वधावन बंदरगाह को रेल, सड़क, हवाई और जलमार्गों से जोड़कर राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख व्यापारिक प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की योजना है। PM मोदी ने इसे आधुनिक मल्टी-मॉडल विकास मॉडल बताया जो देश की लॉजिस्टिक्स क्षमता को मज़बूत करेगा।
प्रगति बैठक में रूफटॉप सोलर पर क्या निर्देश दिए गए?
PM मोदी ने शहरी आवासीय क्षेत्रों, सार्वजनिक संस्थानों और शहरों में रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में लागू करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे बिजली की लागत कम होगी, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी और स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार होगा।
प्रगति मंच क्या है और यह कैसे काम करता है?
प्रगति (Pro-Active Governance and Timely Implementation) एक ICT-आधारित बहु-स्तरीय प्रणाली है जिसे 2015 में शुरू किया गया था। इसके ज़रिए PM सीधे केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बड़ी विकास परियोजनाओं की समीक्षा करते हैं, ताकि देरी और समन्वय की कमी दूर की जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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