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प्रगति की 52वीं बैठक: PM मोदी ने ₹30,000 करोड़ की चार बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की समीक्षा की

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प्रगति की 52वीं बैठक: PM मोदी ने ₹30,000 करोड़ की चार बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की समीक्षा की

सारांश

प्रगति की 52वीं बैठक में PM मोदी ने ₹30,000 करोड़ की चार राज्यों में फैली बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की समीक्षा की, मिशन मोड में समाधान के निर्देश दिए। साथ ही टीबी अभियान में AI के उपयोग और साइबर ठगी रोकने के लिए ई-जीरो FIR लागू करने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 24 जून 2026 को प्रगति की 52वीं बैठक की अध्यक्षता नई दिल्ली के सेवा तीर्थ में की।
सड़क, बिजली, औद्योगिक कॉरिडोर और मेट्रो रेल से जुड़ी चार परियोजनाओं की समीक्षा हुई, जिनकी कुल लागत लगभग ₹30,000 करोड़ है और ये चार राज्यों में फैली हैं।
मोदी ने पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पोर्टल को वास्तविक समय में अपडेट रखने और जमीनी स्थिति दर्शाने पर जोर दिया।
टीबी मुक्त भारत अभियान में AI और डिजिटल तकनीक के उपयोग तथा NCC कैडेटों व माय भारत स्वयंसेवकों की भागीदारी का सुझाव दिया।
साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए राज्यों को ई-जीरो FIR व्यवस्था लागू करने और एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 24 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में 'प्रगति' की 52वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सड़क, बिजली, औद्योगिक कॉरिडोर और मेट्रो रेल क्षेत्रों से जुड़ी चार प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की गहन समीक्षा की गई, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग ₹30,000 करोड़ है और जो चार राज्यों में फैली हुई हैं।

प्रगति मंच: क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित यह बहु-माध्यम मंच केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को एकीकृत कर सक्रिय शासन और समयबद्ध क्रियान्वयन को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है। 52वीं बैठक का आयोजन यह दर्शाता है कि यह मंच लगातार और नियमित रूप से बुनियादी ढाँचे की प्रगति पर नज़र रखने का एक स्थापित तंत्र बन चुका है।

गौरतलब है कि प्रगति बैठकों के ज़रिये अब तक देशभर में लाखों करोड़ रुपये की परियोजनाओं की निगरानी की जा चुकी है, जिनमें से कई दशकों से लंबित थीं।

मुख्य घटनाक्रम: किन परियोजनाओं की हुई समीक्षा

बैठक में समीक्षा की गई चार परियोजनाएँ आर्थिक विकास, क्षेत्रीय संपर्क, औद्योगिक प्रगति और जनकल्याण की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताई गई हैं। समीक्षा में समयसीमा के पालन, विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल, बाधाओं के समाधान और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में देरी न केवल लागत बढ़ाती है, बल्कि आम नागरिकों और उद्योगों को समय पर मिलने वाले लाभों से भी वंचित कर देती है। उन्होंने संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों को लंबित मुद्दों का मिशन मोड में समाधान करने और उच्चतम स्तर पर सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

पीएम गतिशक्ति और डिजिटल निगरानी पर जोर

मोदी ने बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की प्रभावी योजना और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के सक्रिय उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के विवरण, उपयोगिताओं, अवसंरचना परतों, स्वीकृतियों और क्षेत्रीय सूचनाओं को पोर्टल पर नियमित और समयबद्ध तरीके से अपडेट किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि मंच पर जमीनी स्तर की नवीनतम स्थिति दिखाई देनी चाहिए ताकि बाधाओं का पहले से अनुमान लगाया जा सके, एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर हो और वास्तविक समय के आँकड़ों के आधार पर निर्णय लिए जा सकें।

टीबी मुक्त भारत और साइबर अपराध पर भी चर्चा

बैठक में प्रधानमंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान की भी समीक्षा की और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहित नवीनतम डिजिटल तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जागरूकता, रोगियों के फॉलो-अप और सामुदायिक सहभागिता के लिए NCC कैडेटों और 'माय भारत' स्वयंसेवकों की एक टीम गठित करने का सुझाव दिया।

साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा करते हुए मोदी ने डिजिटल मंचों के बढ़ते दुरुपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपनी समस्या के समाधान के लिए एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए।

ई-जीरो FIR और समन्वित कार्रवाई का आह्वान

साइबर धोखाधड़ी के मामलों में वित्तीय नुकसान रोकने और नागरिकों का विश्वास बहाल करने के लिए मोदी ने स्पष्ट जवाबदेही, त्वरित प्रतिक्रिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों तथा डिजिटल मंचों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों को साइबर धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित पंजीकरण के लिए ई-जीरो FIR व्यवस्था लागू करने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर ठगी की घटनाओं में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है और नागरिकों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाना सरकार की प्राथमिकता बन गई है। आगे की बैठकों में इन परियोजनाओं और अभियानों की प्रगति की पुनः समीक्षा अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 52 बैठकों के बाद भी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि की समस्या क्यों बनी हुई है। ₹30,000 करोड़ की परियोजनाओं की समीक्षा तब तक अर्थपूर्ण नहीं होगी जब तक जवाबदेही सार्वजनिक रूप से मापने योग्य न हो। साइबर ठगी पर ई-जीरो FIR का निर्देश सही दिशा में कदम है, परंतु राज्यों में इसके क्रियान्वयन की गति और एकरूपता पर नज़र रखना ज़रूरी होगा। गतिशक्ति पोर्टल को 'वास्तविक समय' में रखने की माँग तब तक कागजी रहेगी जब तक डेटा अपडेट की जवाबदेही किसी विशिष्ट अधिकारी पर न हो।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रगति बैठक क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
प्रगति (Pro-Active Governance and Timely Implementation) एक ICT-आधारित बहु-माध्यम मंच है जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री स्वयं करते हैं। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को एकीकृत कर बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
52वीं प्रगति बैठक में किन परियोजनाओं की समीक्षा हुई?
24 जून 2026 को हुई 52वीं बैठक में सड़क, बिजली, औद्योगिक कॉरिडोर और मेट्रो रेल क्षेत्रों से जुड़ी चार परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग ₹30,000 करोड़ है और ये चार अलग-अलग राज्यों में फैली हैं।
PM मोदी ने साइबर अपराध पर क्या निर्देश दिए?
मोदी ने राज्यों को साइबर धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित पंजीकरण के लिए ई-जीरो FIR व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों और डिजिटल मंचों के बीच बेहतर समन्वय और स्पष्ट जवाबदेही की भी माँग की।
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का बैठक में क्या महत्व रहा?
प्रधानमंत्री ने परियोजनाओं की प्रभावी योजना और क्रियान्वयन के लिए गतिशक्ति पोर्टल को वास्तविक समय में अपडेट रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर जमीनी स्थिति दिखाई देनी चाहिए ताकि बाधाओं का पहले से अनुमान लगाया जा सके और विश्वसनीय आँकड़ों के आधार पर निर्णय लिए जा सकें।
टीबी मुक्त भारत अभियान में AI का उपयोग कैसे होगा?
प्रधानमंत्री ने टीबी अभियान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहित नवीनतम डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने जागरूकता, रोगियों के फॉलो-अप और सामुदायिक सहभागिता के लिए NCC कैडेटों और 'माय भारत' स्वयंसेवकों की एक समर्पित टीम गठित करने का सुझाव दिया।
राष्ट्र प्रेस
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