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IFS 2025 बैच से PM मोदी का आह्वान: राजनय को पारंपरिक सीमाओं से बाहर ले जाएं, डिजिटल और नागरिक-केंद्रित बनाएं मिशन

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IFS 2025 बैच से PM मोदी का आह्वान: राजनय को पारंपरिक सीमाओं से बाहर ले जाएं, डिजिटल और नागरिक-केंद्रित बनाएं मिशन

सारांश

PM मोदी ने IFS के 2025 बैच से कहा — राजनय सिर्फ दूतावासों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सामुदायिक जुड़ाव, निवेश के नए मौके, डिजिटल मिशन और त्वरित कांसुलर सेवाएं — यही 21वीं सदी की भारतीय कूटनीति की नई परिभाषा है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 24 अगस्त 2026 को 'सेवा तीर्थ', नई दिल्ली में IFS 2025 बैच के ट्रेनी अधिकारियों से संवाद किया।
युवा राजनयिकों को पारंपरिक कूटनीतिक दायरे से बाहर जाकर स्थानीय समुदायों और प्रवासी भारतीयों से सार्थक जुड़ाव बनाने का निर्देश।
निवेश के नए अवसरों की पहचान कर भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने पर जोर।
भारतीय मिशनों की डिजिटल उपस्थिति और कांसुलर सेवाओं को तकनीक के जरिए अधिक सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनाने का आह्वान।
भारत की सभ्यतागत विरासत, संस्कृति और पर्यटन को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की अपेक्षा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अगस्त 2026, सोमवार को नई दिल्ली स्थित 'सेवा तीर्थ' में भारतीय विदेश सेवा (IFS) के 2025 बैच के ट्रेनी अधिकारियों से सीधा संवाद किया। इस बातचीत में उन्होंने युवा राजनयिकों को पारंपरिक कूटनीतिक ढाँचे की सीमाओं से आगे बढ़कर स्थानीय समुदायों, प्रवासी भारतीयों और नागरिकों के साथ गहरा जुड़ाव बनाने का आह्वान किया।

मुख्य संदेश: परंपरा से परे जाएं

प्रधानमंत्री ने युवा राजनयिकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि भारतीय मिशन केवल सरकारों और संस्थानों तक सीमित न रहें, बल्कि सामुदायिक स्तर पर लोगों से सार्थक संबंध बनाएं। उन्होंने कहा कि अपनी पोस्टिंग वाले देशों में जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार करें और स्थानीय समुदायों के साथ भारत के संबंधों को और प्रगाढ़ करें।

आर्थिक भागीदारी और निवेश पर जोर

मोदी ने ट्रेनी अधिकारियों से कहा कि वे निवेश के नए अवसरों की पहचान करें और भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी को सशक्त बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएं। उन्होंने भारत की सभ्यतागत विरासत, संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं को विश्व मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की भी अपेक्षा जताई। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'सॉफ्ट पावर' को कूटनीतिक हथियार के रूप में तेज़ी से विकसित कर रहा है।

डिजिटल मिशन और नागरिक-केंद्रित सेवाएं

प्रधानमंत्री ने भारतीय मिशनों की डिजिटल उपस्थिति को मजबूत करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वेबसाइट अक्सर वह पहला माध्यम होती है जिसके ज़रिए नागरिक किसी संस्थान से जुड़ते हैं, इसलिए उसे सूचनापूर्ण और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना आवश्यक है। उन्होंने कांसुलर सेवाओं को अधिक सुलभ, त्वरित और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए टेक्नोलॉजी के अधिकतम उपयोग का आग्रह किया।

सभ्यता और तकनीक का संगम

मोदी ने ट्रेनी अधिकारियों को प्रेरित किया कि वे भारत की सभ्यतागत खूबियों को टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और प्रभावी संवाद के साथ जोड़कर भारत की वैश्विक छवि को और सुदृढ़ करें। गौरतलब है कि यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब भारत की विदेश नीति तेजी से बहुआयामी हो रही है और प्रवासी भारतीय समुदाय कूटनीति में एक महत्वपूर्ण कड़ी बनता जा रहा है।

आगे की राह

IFS के 2025 बैच के ये ट्रेनी अधिकारी शीघ्र ही विभिन्न देशों में अपनी पोस्टिंग पर जाएंगे। प्रधानमंत्री का यह संबोधन उनके लिए एक स्पष्ट नीतिगत दिशा है — केवल पारंपरिक कूटनीति नहीं, बल्कि जन-केंद्रित, तकनीक-सक्षम और आर्थिक रूप से सक्रिय राजनय जो 21वीं सदी के भारत की आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर प्रतिबिंबित करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

सवाल यह है कि क्या IFS अधिकारियों के पास इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षण है — विशेषकर जब कई मिशनों में स्टाफ की कमी एक पुरानी समस्या रही है। सभ्यतागत विरासत और आर्थिक कूटनीति का यह संयोजन 'विकसित भारत' की वैश्विक ब्रांडिंग का हिस्सा लगता है, लेकिन इसकी सफलता ज़मीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने IFS 2025 बैच के ट्रेनी अधिकारियों से क्या कहा?
PM मोदी ने 24 अगस्त 2026 को 'सेवा तीर्थ' में IFS 2025 बैच से संवाद करते हुए कहा कि राजनय को पारंपरिक दायरे से बाहर ले जाएं और स्थानीय समुदायों व प्रवासी भारतीयों से सार्थक जुड़ाव बनाएं। उन्होंने डिजिटल मिशन, नागरिक-केंद्रित कांसुलर सेवाएं और भारत की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
'सेवा तीर्थ' क्या है और यह बैठक क्यों हुई?
'सेवा तीर्थ' नई दिल्ली में स्थित वह केंद्र है जहाँ भारतीय विदेश सेवा के ट्रेनी अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। यह बैठक IFS 2025 बैच के अधिकारियों को उनकी विदेश पोस्टिंग से पहले प्रधानमंत्री द्वारा नीतिगत दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई।
मोदी ने भारतीय मिशनों की डिजिटल उपस्थिति पर क्यों जोर दिया?
प्रधानमंत्री ने कहा कि वेबसाइट अक्सर वह पहला माध्यम होती है जिसके जरिए नागरिक किसी संस्थान से जुड़ते हैं, इसलिए मिशनों को तकनीक-सक्षम और नागरिक-अनुकूल बनाना जरूरी है। उन्होंने कांसुलर सेवाओं को तेज, सुलभ और डिजिटल बनाने का आह्वान किया।
IFS अधिकारियों की आर्थिक कूटनीति में क्या भूमिका होगी?
मोदी ने IFS अधिकारियों से कहा कि वे अपनी पोस्टिंग वाले देशों में भारत के लिए निवेश के नए अवसरों की पहचान करें और वैश्विक आर्थिक भागीदारी को मजबूत करें। इसके साथ ही भारत की सभ्यतागत विरासत, संस्कृति और पर्यटन को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की भी जिम्मेदारी उन पर होगी।
भारतीय विदेश सेवा (IFS) में ट्रेनी अधिकारी कौन होते हैं?
IFS अधिकारी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चुने जाते हैं और भारत का विदेशों में प्रतिनिधित्व करते हैं। 2025 बैच के ये ट्रेनी अधिकारी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद विभिन्न देशों में भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में तैनात होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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