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विकसित भारत 2047: PM मोदी ने IAS 2024 बैच के 183 अधिकारियों को दिया 'नागरिक देवो भव' का मंत्र

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विकसित भारत 2047: PM मोदी ने IAS 2024 बैच के 183 अधिकारियों को दिया 'नागरिक देवो भव' का मंत्र

सारांश

PM मोदी ने IAS 2024 बैच के 183 अधिकारियों को 'नागरिक देवो भव' का मंत्र देते हुए विकसित भारत 2047 की दिशा में परिणाम-आधारित, डेटा-संचालित और समावेशी प्रशासन अपनाने का आह्वान किया। बैच में 40% से अधिक महिला अधिकारी — एक ऐतिहासिक अनुपात।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 23 जून 2026 को सेवा तीर्थ, नई दिल्ली में IAS 2024 बैच के 183 प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया।
मोदी ने 'नागरिक देवो भव' का मंत्र देते हुए हर निर्णय के केंद्र में नागरिकों को रखने का आग्रह किया।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य हेतु आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, ऊर्जा सुरक्षा और युवा रोजगार को प्रमुख प्राथमिकताएँ बताया।
शासन में डिजिटल गवर्नेंस , AI और डेटा-आधारित प्रशासन को परिणाम-केंद्रित मॉडल का आधार बताया।
IAS 2024 बैच में 40% से अधिक महिला अधिकारी — प्रशासनिक सेवाओं में बढ़ती लैंगिक भागीदारी का संकेत।
कार्यक्रम में कैबिनेट सचिव टी.वी.
सोमनाथन , प्रधान सचिव पी.के.
मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 23 जून 2026 को नई दिल्ली के सेवा तीर्थ में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) 2024 बैच के 183 अधिकारी प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उनसे विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने युवा सिविल सेवकों से कहा कि उनके प्रशासनिक निर्णय न केवल उनके करियर को, बल्कि करोड़ों नागरिकों के भविष्य को भी दिशा देंगे।

मुख्य संदेश: 'नागरिक देवो भव'

प्रधानमंत्री मोदी ने अधिकारियों को 'नागरिक देवो भव' का मंत्र देते हुए कहा कि हर प्रशासनिक निर्णय के केंद्र में नागरिक होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी फाइलें महज कागजी प्रक्रिया नहीं हैं — उनके पीछे लाखों लोगों की आकांक्षाएँ, समस्याएँ और जीवन जुड़े होते हैं। शासन को संवेदनशील, जवाबदेह और समावेशी बनाना इन अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि लोकसेवा की वास्तविक परीक्षा ईमानदारी, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने में है। दो वर्षों के फील्ड अनुभव और प्रशासनिक प्रशिक्षण के बाद ये अधिकारी एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं जहाँ उनकी कार्यशैली राष्ट्र की दिशा तय करेगी।

विकसित भारत 2047 की प्राथमिकताएँ

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नीति और प्रशासनिक निर्णय देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में योगदान देने वाला होना चाहिए। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा और युवाओं के लिए रोजगार एवं अवसर सृजन को वर्तमान समय की प्रमुख प्राथमिकताएँ बताया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बड़े विकासात्मक लक्ष्यों को विभागीय सीमाओं में रहकर हासिल नहीं किया जा सकता। विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही स्थायी और प्रभावी परिणाम सुनिश्चित होंगे।

डिजिटल गवर्नेंस और डेटा-आधारित प्रशासन

मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में शासन व्यवस्था प्रक्रिया-आधारित मॉडल से परिणाम-आधारित मॉडल की ओर बढ़ी है। डिजिटल गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीक की मदद से सेवा वितरण अधिक पारदर्शी और सुगम हुआ है।

डेटा-आधारित प्रशासन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आँकड़ों को केवल संख्या के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि उन्हें करोड़ों लोगों के जीवन, चुनौतियों और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब मानना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से नियमित रूप से यह मूल्यांकन करने को कहा कि सरकारी नीतियाँ जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दे रही हैं या नहीं।

महिला प्रतिनिधित्व और संतुष्टि का मापदंड

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए बताया कि IAS 2024 बैच में 40 प्रतिशत से अधिक अधिकारी महिलाएँ हैं — जो प्रशासनिक सेवाओं में लैंगिक समानता की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि संतुष्टि पद या अधिकार से नहीं, बल्कि कार्यों के ठोस और मापनीय परिणामों से मिलनी चाहिए।

कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक) डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा, प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की सचिव रचना शाह तथा LBSNAA के निदेशक श्रीराम तरणिकांति सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आने वाले वर्षों में यह बैच देश की प्रशासनिक रीढ़ बनेगा — और इन अधिकारियों की कार्यशैली ही तय करेगी कि विकसित भारत 2047 का सपना कितनी तेजी से हकीकत बनता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'परिणाम-आधारित शासन' का नारा जमीन पर कितना उतरता है — जबकि नौकरशाही की संरचना और प्रोत्साहन तंत्र अभी भी काफी हद तक प्रक्रिया-केंद्रित बना हुआ है। बैच में 40% महिला अधिकारियों का आँकड़ा उत्साहजनक है, परंतु ग्रामीण और दूरस्थ पोस्टिंग में लैंगिक समानता की असली परीक्षा होगी। 'नागरिक देवो भव' जैसे मंत्र तभी सार्थक होते हैं जब शिकायत निवारण तंत्र और जवाबदेही ढाँचा उन्हें संस्थागत रूप से समर्थन दे। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, किंतु इसे हासिल करने के लिए नीतिगत निरंतरता और मापनीय मील के पत्थर तय करना अभी भी एक अनुत्तरित चुनौती है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने IAS 2024 बैच को क्या संदेश दिया?
PM मोदी ने 23 जून 2026 को सेवा तीर्थ में IAS 2024 बैच के 183 प्रशिक्षु अधिकारियों को 'नागरिक देवो भव' का मंत्र देते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर प्रशासनिक निर्णय के केंद्र में नागरिक होने चाहिए।
विकसित भारत 2047 के लिए PM मोदी ने कौन-सी प्राथमिकताएँ गिनाईं?
मोदी ने आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा और युवाओं के लिए रोजगार एवं अवसर सृजन को प्रमुख प्राथमिकताएँ बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नीति और प्रशासनिक निर्णय इन्हीं लक्ष्यों की दिशा में होना चाहिए।
IAS 2024 बैच में महिला अधिकारियों का अनुपात कितना है?
PM मोदी ने स्वयं बताया कि IAS 2024 बैच में 40 प्रतिशत से अधिक अधिकारी महिलाएँ हैं। उन्होंने इसे राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक बताया।
सेवा तीर्थ कार्यक्रम में कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे?
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक) डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा, प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन, DoPT सचिव रचना शाह और LBSNAA निदेशक श्रीराम तरणिकांति उपस्थित रहे।
PM मोदी ने डेटा-आधारित प्रशासन पर क्या कहा?
मोदी ने कहा कि आँकड़ों को केवल संख्या नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब मानना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से नियमित रूप से यह मूल्यांकन करने को कहा कि सरकारी नीतियाँ जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दे रही हैं या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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