भूपेंद्र यादव ने IFS 2024 बैच को दिया मंत्र: नैतिकता और कार्यकुशलता ही सफल लोक सेवक की असली पहचान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 1 अगस्त 2026 को देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) में आयोजित दीक्षांत समारोह में भारतीय वन सेवा (IFS) के 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नैतिकता और कार्यकुशलता एक सफल लोक सेवक की सबसे मजबूत नींव हैं।
मुख्य संदेश: नवाचार और जनभागीदारी
यादव ने अधिकारियों से 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि और मरुस्थलीकरण जैसी बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार, आधुनिक प्रौद्योगिकी और जनभागीदारी को अपना हथियार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी जब अपने करियर के सर्वाधिक उत्पादक चरण में होंगे, तब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष मना रहा होगा — यह संयोग नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।
AI और प्रौद्योगिकी का मानवीय उपयोग
केंद्रीय मंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य उन्नत प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि AI को केवल डेटा संग्रह और विश्लेषण तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे मानवीय संवेदनशीलता के साथ जोड़कर व्यावहारिक समाधान विकसित करने में भी लगाया जाए। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वन प्रबंधन में डिजिटल निगरानी तंत्र तेजी से विस्तार पा रहे हैं।
नेतृत्व पर जोर: सक्षम प्रशासक से आगे बढ़ें
यादव ने अधिकारियों से केवल सक्षम प्रशासक बनने तक सीमित न रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि त्याग, करुणा और दूसरों को प्रेरित करने की क्षमता ही एक सच्चे नेता की असली पहचान होती है। मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने सफल प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रमाण पत्र और पदक भी प्रदान किए।
IGNFA की उपलब्धियाँ और 2024 बैच का प्रदर्शन
IGNFA के निदेशक राजेंद्र प्रसाद खजूरिया ने निदेशक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह संस्थान 1938 से राष्ट्र की सेवा में है — पहले भारतीय वन महाविद्यालय के रूप में, और अब IGNFA के रूप में। अब तक स्वतंत्र भारत के सभी IFS अधिकारियों के साथ-साथ 14 मित्र देशों के 369 वन अधिकारियों ने यहाँ प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
खजूरिया ने बताया कि 2024 बैच के 109 भारतीय वन सेवा परिवीक्षाधीन अधिकारियों और भूटान के 2 अधिकारी प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 अधिकारियों ने 20 महीने का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा किया। इनमें से 75 अधिकारियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर ऑनर्स डिप्लोमा हासिल किया।
क्या होगा आगे
यह बैच अब देश के विभिन्न वन मंडलों में तैनात होगा, जहाँ इन्हें जलवायु अनुकूलन, वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक वन प्रबंधन जैसी ज़मीनी चुनौतियों का सामना करना होगा। 'विकसित भारत 2047' के संदर्भ में इन अधिकारियों की भूमिका आने वाले दशकों में भारत की पर्यावरण नीति की दिशा तय करने में निर्णायक मानी जा रही है।