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जयशंकर का CELAC मंत्रियों से संबोधन: भारत की आर्थिक ताकत 'ग्लोबल साउथ' की समृद्धि में सहायक

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जयशंकर का CELAC मंत्रियों से संबोधन: भारत की आर्थिक ताकत 'ग्लोबल साउथ' की समृद्धि में सहायक

सारांश

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में CELAC के 33 देशों के मंत्रियों को बताया — भारत की दोगुनी GDP और डिजिटल ताकत अब 'ग्लोबल साउथ' की साझा समृद्धि का आधार बन सकती है। स्वास्थ्य, ऊर्जा और डिजिटल टेक्नोलॉजी में ठोस सहयोग पर सहमति बनी।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में CELAC के विदेश मंत्रियों को संबोधित किया।
जयशंकर ने कहा कि भारत की जीडीपी दोगुनी से अधिक हो चुकी है और विकास दर मजबूत बनी हुई है।
33 सदस्यीय CELAC के साथ स्वास्थ्य, खाद्य, ऊर्जा, SME और डिजिटल टेक्नोलॉजी में सहयोग पर सहमति बनी।
जमैका में हरिकेन मेलिसा और वेनेजुएला के भूकंप के दौरान भारत की मानवीय सहायता का उल्लेख किया गया।
CELAC मंत्रियों ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस , CDRI , ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस और मिशन लाइफ को समर्थन दिया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में लैटिन अमेरिका और कैरिबियन राज्यों के समुदाय (CELAC) के विदेश मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में भारत का उभरना उसे 'ग्लोबल साउथ' के देशों की साझा समृद्धि की दिशा में ठोस योगदान देने में सक्षम बनाता है। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत वैश्विक दक्षिण के साथ अपने संबंधों को नई गहराई देने की कोशिश में जुटा है।

मुख्य वक्तव्य और आर्थिक संदर्भ

जयशंकर ने कहा, 'पिछले दशक में भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है। हमारी जीडीपी दोगुनी से अधिक हो गई है और विकास दर मजबूत बनी हुई है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज भारत के पास 'बड़ी और तेजी से कुशल हो रही मानव संसाधन क्षमता, बढ़ती हुई क्षमताएं, एक बढ़ता हुआ बाजार, मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बढ़ती ताकत' मौजूद है।

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि 'ग्लोबल साउथ' के साथ भारत का जुड़ाव संकीर्ण राष्ट्रीय हितों से प्रेरित नहीं, बल्कि 'हमारी एकजुटता और साझा समृद्धि के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।'

भारत की क्षेत्रीय सहायता के उदाहरण

जयशंकर ने लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने जमैका में हरिकेन मेलिसा के दौरान और वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत द्वारा प्रदान की गई मदद का उल्लेख किया। इसके अलावा, कैरिबियन में विकास कार्यक्रमों को समर्थन और लैटिन अमेरिकी देशों को दवाइयों की आपूर्ति का भी जिक्र किया।

बैठक की अध्यक्षता और सहयोग क्षेत्र

विदेश मंत्री जयशंकर ने उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन के साथ मिलकर 33 सदस्यीय CELAC के विदेश मंत्रियों की इस बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक के पश्चात उन्होंने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि मंत्री स्वास्थ्य और फार्मा, खाद्य और कृषि, ऊर्जा और संसाधन, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में सहयोग पर सहमत हुए।

भारत की वैश्विक पहलों को समर्थन

बैठक में CELAC मंत्रियों ने भारत की अगुवाई वाली कई अंतरराष्ट्रीय पहलों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। इनमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI), इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस और मिशन लाइफ शामिल हैं। गौरतलब है कि ये सभी पहलें वैश्विक स्तर पर जलवायु, आपदा प्रबंधन और टिकाऊ विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने में भारत की केंद्रीय भूमिका को दर्शाती हैं।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय कूटनीति में सक्रिय रूप से जुटा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-CELAC सहयोग के नए अध्याय से दक्षिण-दक्षिण सहयोग को ठोस रूप मिल सकता है, बशर्ते कि सहमत क्षेत्रों में त्वरित क्रियान्वयन सुनिश्चित हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों का कहना है कि भारत-लैटिन अमेरिका व्यापार अभी भी अपनी क्षमता से काफी नीचे है, और घोषित सहयोग क्षेत्रों में क्रियान्वयन का ट्रैक रिकॉर्ड मिला-जुला रहा है। गौरतलब है कि चीन पहले से इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश कर चुका है, इसलिए भारत के लिए असली परीक्षा यह होगी कि वह वादों को ठोस परियोजनाओं में बदल सके। बिना मापने योग्य द्विपक्षीय लक्ष्यों के, यह सहयोग एजेंडा कागज़ पर ही रह सकता है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने CELAC बैठक में क्या कहा?
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत की जीडीपी दोगुनी से अधिक हो चुकी है और एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में भारत 'ग्लोबल साउथ' के देशों की साझा समृद्धि में सार्थक योगदान दे सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और कृषि में सहयोग पर CELAC सदस्यों के साथ सहमति की जानकारी दी।
CELAC क्या है और इसमें कितने देश हैं?
CELAC यानी 'कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरिबियन स्टेट्स' एक क्षेत्रीय संगठन है जिसमें लैटिन अमेरिका और कैरिबियन के 33 देश शामिल हैं। यह संगठन क्षेत्रीय राजनीतिक संवाद और सहयोग का मंच है।
भारत ने लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र की किस तरह मदद की है?
भारत ने जमैका में हरिकेन मेलिसा और वेनेजुएला में भूकंप के दौरान मानवीय सहायता प्रदान की। इसके अलावा, कैरिबियन में विकास कार्यक्रमों को समर्थन और लैटिन अमेरिकी देशों को दवाइयों की आपूर्ति भी की गई।
भारत की किन वैश्विक पहलों को CELAC का समर्थन मिला?
CELAC मंत्रियों ने भारत की अगुवाई वाली पाँच प्रमुख पहलों — इंटरनेशनल सोलर अलायंस, CDRI, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस और मिशन लाइफ — के प्रति समर्थन व्यक्त किया। ये पहलें जलवायु, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी हैं।
भारत-CELAC सहयोग में किन क्षेत्रों पर सहमति बनी?
बैठक के बाद जयशंकर ने बताया कि दोनों पक्ष स्वास्थ्य और फार्मा, खाद्य और कृषि, ऊर्जा और संसाधन, लघु एवं मध्यम उद्यम (SME) तथा डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर सहमत हुए।
राष्ट्र प्रेस
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